बिजलीघर धरना प्रकरण में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार की नाराजगी के बावजूद जेई ने दर्ज कराया मुकदमा, विभागीय कार्रवाई से बढ़ी सियासी गर्मी
मुजफ्फरनगर। गांधी कॉलोनी बिजलीघर पर हुए विवाद ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव का रूप ले लिया है। रालोद विधायक एवं प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार की कथित नाराजगी और चेतावनी के बावजूद विद्युत विभाग ने कार्रवाई करते हुए गांधी वाटिका फीडर के जेई तकनीकी रमनजीत सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करा दिया है। इस कार्रवाई के बाद साफ संकेत मिले हैं कि विद्युत विभाग के अधिकारी इस मामले में पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। मुख्य अभियंता विनोद कुमार को मंत्री ने सीधी चेतावनी दी थी कि मुकदमा हुआ तो देख लूंगा, लेकिन इसके बावजूद मुख्य अभियंता ने एक्शन करा ही दिया।
इस चर्चित मामले में बिजली घर पर प्रदर्शन करने वाले नागरिक मोनू, आशु बालियान, अभिषेक त्यागी समेत 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, कर्मचारी को बंधक बनाने और विद्युत आपूर्ति बाधित करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इस प्रकरण ने प्रदेश सरकार के एक मंत्री और विद्युत विभाग के शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद को भी सार्वजनिक कर दिया है।
जेई रमनजीत सिंह द्वारा नई मंडी थाने में दी गई तहरीर में बताया गया कि गांधी वाटिका क्षेत्र में स्थित 400 केवीए ट्रांसफार्मर में खराबी आने के कारण क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत नया ट्रांसफार्मर लगाकर सुबह करीब 9रू30 बजे तक व्यवस्था बहाल कर दी गई थी। लेकिन इसी दौरान कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और विद्युत कर्मियों के साथ कथित अभद्रता की। बताया कि 27 जून की सुबह करीब एक बजे सूचना मिली थी कि गांधी वाटिका गली नंबर-17 स्थित 400 केवीए ट्रांसफार्मर में फॉल्ट आने से क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो गई है। जांच के दौरान ट्रांसफार्मर खराब पाया गया, जिसके बाद विभागीय प्रक्रिया पूरी करते हुए नया ट्रांसफार्मर स्थापित कराया गया।
तहरीर के अनुसार, जब लाइनमैन सुधीर द्वारा ट्रांसफार्मर पर लोड देने का प्रयास किया गया, तभी मोनू, आशु बालियान, अभिषेक त्यागी तथा 15 से 20 अन्य लोगों ने कथित रूप से लाइनमैन को बंधक बना लिया और गांधी वाटिका फीडर की विद्युत आपूर्ति जबरन बंद करा दी। इससे लगभग एक हजार उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। विभाग ने इसे सरकारी कार्य में बाधा और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास बताया है।
थाने में दी गई तहरीर के मामले को लेकर क्षेत्र के लोगों ने सुबह प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और सारी जानकारी दी। मंत्री अनिल कुमार और विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता विनोद गुप्ता के बीच इसको लेकर फोन पर वार्ता हुई, इस बातचीत का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में मंत्री द्वारा एफआईआर दर्ज न कराने के लिए दबाव बनाया और कहा कि युवकों ने कर्मचारी के साथ अभद्रता को लेकर माफी मांग ली है। मुख्य अभियंता ने कार्रवाई करने की हट दिखाई तो मंत्री बिफर गये और सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि चीफ साहब यदि इसमें एफआईआर हुई तो मैं दूख लूंगा और लट्ठ लेकर बैठूंगा।
इसके बावजूद जेई की तहरीर पर तीनों युवको ंको नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इससे पहले कौशल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव का भी इस प्रकरण को लेकर एक वीडियो सामने आया था। हालांकि, विभागीय स्तर पर कार्रवाई होने और मुकदमा दर्ज होने के बाद यह संदेश गया है कि विद्युत विभाग के अधिकारी अपने कर्मचारियों के समर्थन में सख्त रुख अपनाए हुए हैं। चीफ का एक्शन मंत्री की चेतावनी पर भारी पड़ा है, मंत्री भी वो, जिनको सीएम योगी की कैबिनेट में स्थान मिला है।






