न्याय का रविः हर छह माह में फांसी की सजा सुना रहे जज दिवाकर

17 साल की न्यायिक सेवा में 35 दोषियों को सुनाया मृत्युदंड, मुजफ्फरनगर में साढ़े आठ माह में नौ लोगों की हत्या के आठ मामलों में 22 को फांसी की सजा

मुजफ्फरनगर। अपराध की गंभीरता और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सख्त फैसलों के लिए चर्चित न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी 17 वर्ष की न्यायिक सेवा में 35 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 का पदभार संभालने के बाद उन्होंने पुराने मामलों की लगातार सुनवाई करते हुए हत्या के आठ मुकदमों का निस्तारण किया और इनमें कुल 22 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। उनके फैसलों में एक महिला और छह वर्षीय बच्चे की हत्या के मामले भी शामिल हैं।

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 2009 में न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी। इससे पहले संभल और बरेली में तैनाती के दौरान हत्या के अलग-अलग मामलों में 13 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई जा चुकी है। मुजफ्फरनगर में 29 नवंबर 2025 को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने लंबित पुराने मुकदमों की सुनवाई तेज की। करीब साढ़े आठ माह के कार्यकाल में कई चर्चित हत्याकांडों में निर्णय सामने आए।

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15 अक्टूबर 2019 को शहर कोतवाली क्षेत्र में 40 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या के मामले में 6 अप्रैल 2026 को अपने न्यायालय की पीठ पर बैठकर न्यायाधीश रवि दिवाकर ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई। भौराकलां क्षेत्र के सिसौली निवासी शेखर की वर्ष 2019 में 70 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में हुई हत्या के मामले में 28 अप्रैल 2026 को मुकेश, प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड सुनाया गया।

चरथावल क्षेत्र में वर्ष 2011 में राजेश देवी और उनके छह वर्षीय बेटे हिमांशु की हत्या के मामले में दोषी रईस उर्फ रहीस निवासी बरेली को 30 मई 2026 को दिए गए अपने फैसले में रवि दिवाकर द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। यह मामला न्यायालय के सबसे गंभीर मामलों में शामिल रहा। गांव ककरौली निवासी राजेंद्र सैनी की वर्ष 2018 में हत्या कर शव जलाने के मामले में रामकरण उर्फ सावन गिरी और गजेंद्र उर्फ गीलू को 20 जून 2026 को मृत्युदंड सुनाया गया। शहर कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ाना मोड़ पर वर्ष 2020 में गश्त के दौरान होमगार्ड रतिराम की हत्या के मामले में दोषी दीपक को 2 जुलाई 2026 को दिए फैसले में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।

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जनपद शामली के कुड़ाना गांव के जंगल में 11 अगस्त 2011 को हुए किसान राज सिंह हत्याकांड में 17 जुलाई 2026 को सुनील, अनिल, अजीत और सूरज उर्फ काला को मृत्युदंड दिया गया। छपार क्षेत्र के तेजलहेड़ा में लकड़ी ठेकेदार सालिम की हत्या के मामले में 12 अगस्त 2026 को दोषी शाहनवाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। इसके अगले दिन 13 अगस्त 2026 को शामली के भभीसा गांव में हुए पवन हत्याकांड में चार दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही मुजफ्फरनगर में न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर द्वारा मृत्युदंड दिए जाने वाले दोषियों की संख्या 22 तक पहुंच गई।

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ज्ञानवापी और संभल सर्वे के आदेश से सुर्खियों में आए थे रवि

न्यायिक सेवा के दौरान रवि कुमार दिवाकर कई महत्वपूर्ण मामलों में आदेशों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहे। अयोध्या में तैनाती के दौरान ज्ञानवापी परिसर के सर्वेक्षण का आदेश देने वाले न्यायाधीश के रूप में उनका नाम सामने आया था। इसके अलावा संभल में मस्जिद के सर्वे से जुड़े मामले में भी उनके आदेश की चर्चा हुई थी। लगातार गंभीर आपराधिक मामलों का निस्तारण और मृत्युदंड के फैसलों के कारण न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का मुजफ्फरनगर कार्यकाल न्यायिक क्षेत्र में खासा चर्चित रहा है। उनके न्यायालय में लंबित पुराने मामलों की सुनवाई और निर्णय प्रक्रिया को गति मिलने से पीड़ित पक्षों को वर्षों पुराने मामलों में फैसले का इंतजार खत्म हुआ है।

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