एनसीईआरटी सिलेबस समीक्षा का आदेश, विवादित अध्याय पर नई बहस

एनसीईआरटी सिलेबस समीक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया है। सरकार ने अदालत को बताया कि एनसीईआरटी के पूरे सिलेबस की समीक्षा कराई जाएगी और इसके लिए आदेश जारी कर दिया गया है। यह मामला कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में शामिल न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय को लेकर उठा था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र, राज्यों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे विवादित अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले तीन विशेषज्ञों से दूरी बनाए रखें।

दरअसल, एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक ‘समाज की खोज: भारत और उससे आगे’ में एक अध्याय शामिल किया गया था, जिसमें न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार और लंबित मामलों से जुड़े संदर्भों का उल्लेख था। इस अध्याय को लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया था और मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि न्यायपालिका के संस्थागत कार्यों की स्वस्थ और वस्तुनिष्ठ आलोचना को रोकना अदालत का उद्देश्य नहीं है। हालांकि, पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि विधि अध्ययन पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों का पैनल एक सप्ताह के भीतर गठित किया जाए।

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इस पर सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि एनसीईआरटी में व्यवस्थागत बदलाव शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विषय विशेषज्ञों की जांच के बिना अब कोई भी सामग्री प्रकाशित नहीं की जाएगी। इस विवाद के बीच एनसीईआरटी ने मंगलवार को विवादित अध्याय को लेकर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगी थी। संस्था के निदेशक और सदस्यों ने कहा कि कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में शामिल विवादित अध्याय को लेकर हुई असुविधा के लिए उन्हें खेद है।

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एनसीईआरटी ने यह भी बताया कि पूरी पुस्तक को फिलहाल वापस ले लिया गया है और इसे उपलब्ध नहीं रखा गया है। संस्था के बयान में कहा गया कि “एनसीईआरटी शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।” इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही पाठ्यपुस्तक पर प्रतिबंध लगा चुका है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पुस्तक की सभी भौतिक और डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का आदेश दिया था।

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 इसके साथ ही अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा था कि विवादित अध्याय के साथ पुस्तक प्रकाशित करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। अब पूरे मामले के बीच केंद्र सरकार द्वारा घोषित एनसीईआरटी सिलेबस समीक्षा को शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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