ड्यूटी के दौरान चाकू से किए गए हमले में हुई थी होमगार्ड की मौत, 13 गवाहों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत का ऐतिहासिक फैसला
मुजफ्फरनगर। करीब छह वर्ष पुराने बहुचर्चित होमगार्ड रतिराम हत्याकांड में न्यायालय ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। ड्यूटी के दौरान होमगार्ड पर हुए जानलेवा हमले के मामले में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी को फांसी की सजा से दंडित किया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। इससे पहले 24 जून 2026 को अदालत ने आरोपी दीपक को दोषी करार दिया था। अभियोजन के अनुसार मामला 4 जून 2020 का है। शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित बुढ़ाना मोड़ पुलिस चैकी पर तैनात कांस्टेबल इस्लाम और होमगार्ड रतिराम रात करीब 10.15 बजे क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें डीलर वाली गली से एक महिला के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। मौके पर पहुंचने पर पुलिसकर्मियों ने देखा कि आरोपी युवक दीपक का अपनी मां राजबाला के साथ विवाद चल रहा था।
दीपक अपनी मां पर हमलावर हो रहा था, पुलिस द्वारा हस्तक्षेप किए जाने पर आरोपी कथित रूप से आक्रोशित हो गया और गाली-गलौज करते हुए होमगार्ड रतिराम पर चाकू से हमला कर दिया। उसने होमगार्ड पर चाकू से कई वार कर दिए, हमले में गंभीर रूप से घायल रतिराम को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया था। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि, करीब चार माह तक चले उपचार के बाद 4 अक्टूबर 2020 को मेरठ में होमगार्ड रतिराम की मृत्यु हो गई। इसके बाद मृतक के पुत्र अर्जुन की तहरीर पर मामले में हत्या की धाराएं बढ़ाई गईं।
सहायक शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में आरोपी दीपक के खिलाफ कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए। प्रस्तुत साक्ष्यों, चिकित्सीय रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने 25 जून को आरोपी दीपक की गिरफ्तारी की थी। पुलिस ने होमगार्ड की मौत हो जाने के बाद 13 अक्टूबर को हत्या की धाराओं के साथ आरोपपत्र दाखिल किया, इसके बाद 5 नवंबर 2020 को अतिरिक्त आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। 19 दिसंबर को आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए थे। लंबी सुनवाई और बहस के बाद अब दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।






