व्यावसायिक दौर में भी चिकित्सा को सेवा का माध्यम बनाए रखा, तीन पीढ़ियों का उपचार कर अर्जित किया लोगों का भरोसा
मुजफ्फरनगर। वर्तमान परिदृश्य में जब हर जगह चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं और बड़े अस्पतालों की होड़ तेज है, ऐसे समय में शहर के प्रेमपुरी में स्थित आरोग्य क्लीनिक आज भी सेवा, सादगी और मानवीय संवेदनाओं की पहचान बना हुआ है। इस क्लीनिक के संस्थापक डॉ. हरेन्द्र कुमार जैन ने हाल ही में चिकित्सा सेवा के 50 वर्ष पूरे कर लिए। पांच दशकों के इस सफर में उन्होंने न केवल हजारों मरीजों का उपचार किया, चिकित्सा को व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम मानकर समाज और जनपद में अपनी अलग पहचान बनाई।
15 जुलाई 1976 को प्रेमपुरी चौक पर किराये की एक छोटी-सी दुकान से शुरू हुआ आरोग्य क्लीनिक आज भी उसी सेवा भावना के साथ लोगों का उपचार कर रहा है। वर्ष 1984 में डॉ. जैन ने वहीं भूमि खरीदकर अपना मकान बनाया और उसके बाहरी हिस्से में क्लीनिक स्थापित किया। तब से लेकर आज तक वे इसी स्थान पर नियमित रूप से मरीजों की सेवा कर रहे हैं।

5 सितम्बर 1948 को हरिद्वार में अपनी ननिहाल में जन्मे डॉ. हरेन्द्र कुमार जैन की प्रारंभिक शिक्षा उनके पिता स्वर्गीय सुरेन्द्र कुमार जैन के सिंचाई विभाग में चीफ इंजीनियर होने के कारण विभिन्न जनपदों में हुई। उन्होंने हरिद्वार से ही हाईस्कूल किया और वर्ष 1974 में एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इंटर्नशिप के बाद दो वर्षों तक सेवा देने के पश्चात उन्होंने अपने पैतृक शहर मुजफ्फरनगर लौटकर निजी चिकित्सा सेवा शुरू करने का निर्णय लिया।

डॉ. हरेन्द्र जैन मूल रूप से शहर के अबूपुरा मोहल्ले के निवासी हैं। उनके खानदानी लोग आज भी यहां पर निवास करते हैं। वर्तमान में उनका परिवार भी चिकित्सा एवं अन्य क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहा है। बड़े पुत्र डॉ. पल्लव जैन मानसिक रोग विशेषज्ञ हैं और सदर बाजार क्षेत्र में अपना अस्प्ताल बनाकर प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनकी पुत्रवधू डॉ. समता जैन पत्नी डॉ. पल्लव जैन एमबीबीएस जनरल फिजिशियन हैं तथा आरोग्य क्लीनिक में अपने ससुर डॉ. हरेन्द्र जैन के साथ मरीजों का उपचार कर रही हैं। छोटे पुत्र नमन जैन दिल्ली स्थित एचडीएफसी एर्गाे में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं। परिवार में दो पोते और दो पोतियां भी हैं।
अपने जीवन के 78 वर्ष पूर्ण कर चुके डॉ. हरेन्द्र जैन आज भी पूरी ऊर्जा के साथ प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक क्लीनिक में बैठकर मरीजों का उपचार करते हैं। उनका कहना है कि चिकित्सा पेशे में आने का उद्देश्य कभी आर्थिक लाभ नहीं रहा। उनके अनुसार ईश्वर की कृपा उन पर बनी रही और ईश्वर जो कुछ भी दिया वो उससे संतुष्ट हैं, क्योंकि जीवन में उनको ईश्वर ने जरूरत से भी अधिक दिया है, इसलिए वे चिकित्सा को सेवा और मानवता का धर्म मानकर निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 50 वर्षों के इस सफर में अनेक जरूरतमंद मरीजों का निःशुल्क उपचार और दवाएं उपलब्ध कराना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा है। यही कारण है कि आज भी शहर के अनेक परिवारों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी उन्हीं से उपचार कराने पहुंचती है। कभी जिन बच्चों का इलाज उन्होंने किया था, वे आज बुजुर्ग हो चुके हैं और उनका विश्वास आज भी पहले जैसा कायम है। चिकित्सा सेवा के 50 वर्ष पूर्ण होने पर डॉ. हरेन्द्र जैन ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने मरीजों के अटूट विश्वास और स्नेह को दिया। उनका कहना है कि मरीजों का प्रेम और भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है, जिसने उन्हें पांच दशक तक निरंतर सेवा के लिए प्रेरित किया।
