मुजफ्फरनगर दंगाः कपिल देव, संजीव बालियान और हरेंद्र मलिक सहित 25 आरोपियों से केस वापस

शासन ने जारी कर दिया था केस वापसी का आदेश, एमपी-एमएलए कोर्ट ने जारी किया आदेश, 13 साल बाद पक्ष विपक्ष के नेताओं को मिली बड़ी राहत

मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान नंगला मंदौड़ में हुई पंचायत से जुड़े मुकदमे में भाजपा नेताओं समेत 25 आरोपियों को राहत मिली है। सरकारी कार्य में बाधा डालने, रास्ता रोकने और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने जैसी धाराओं में दर्ज मामलों को उत्तर प्रदेश शासन के आदेश के बाद वापस लेने की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत पत्र के आधार पर केस वापसी के आदेश जारी किए।

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डीजीसी राजीव शर्मा एडवोकेट ने बताया कि यह मामला 31 जुलाई 2013 को नंगला मंदौड़ इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित पंचायत से जुड़ा है। पंचायत के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने, रास्ता रोकने और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धारा 7 के तहत तत्कालीन सिखेड़ा थाना प्रभारी चरण सिंह यादव ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, पूर्व विधायक उमेश मलिक सहित कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

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इसी प्रकरण में श्यामपाल चेयरमैन, साध्वी प्राची और बिट्टू सिखेड़ा के खिलाफ भी अलग आरोपपत्र दाखिल हुआ था। वहीं जीवना निवासी शिव कुमार की पत्रावली अलग कर दी गई थी, जबकि पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र कुतुबपुर की मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा तत्कालीन एडीएम प्रशासन की ओर से निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामले में वर्तमान सपा सांसद हरेंद्र मलिक, कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल, पूर्व विधायक उमेश मलिक, एमएलसी अशोक कटारिया और स्वामी नृसिंहानंद उर्फ दीपक त्यागी समेत 21 लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया गया था। इनमें से 16 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

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बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्यामवीर सिंह, बिजेंद्र सिंह मलिक, विनोद गुप्ता और आयुष बालियान ने बताया कि शासन की ओर से आदेश पहले ही जारी हो चुके थे। उत्तर प्रदेश शासन न्याय अनुभाग-5 (फौजदारी) के विशेष सचिव के पत्र का हवाला देते हुए डीजीसी को प्रशासन की ओर से पत्र लिखा गया था। अभियोजन की ओर से दिए पत्र के बाद अदालत ने अब केस वापस लेने के आदेश जारी कर दिए हैं।

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