आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के सान्निध्य में धर्म और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प व्यक्त करते अभय जैन।

देवबंद के अभय जैन ने संयम पथ पर चलने का लिया संकल्प

आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के सान्निध्य में लिए निर्णय को समाज ने त्याग, वैराग्य और आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरक कदम बताया।

देवबंद। देवबंद के अभय जैन ने 16 अगस्त को आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के सान्निध्य में जीवन को धर्म और संयम के मार्ग पर समर्पित करने का संकल्प लिया। इस निर्णय से नगर के सकल जैन समाज में गौरव और भावुकता का वातावरण है। समाज ने अभय जैन, उनकी माता अनु जैन और परिवार के त्यागपूर्ण भाव की अनुमोदना की है।

धर्म और संयम के मार्ग का संकल्प

प्राप्त जानकारी के अनुसार अभय जैन ने आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के चरणों में धर्म-साधना और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प व्यक्त किया। जैन समाज ने उनके निर्णय को आत्मकल्याण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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समाज के लोगों का कहना है कि सांसारिक सुविधाओं के बीच त्याग, वैराग्य और साधना का रास्ता चुनने का भाव साधारण नहीं होता। इसके लिए व्यक्ति के साथ उसके परिवार के धैर्य, सहमति और समर्पण की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

देवबंद के अभय जैन के निर्णय पर समाज ने जताया गौरव

देवबंद सकल जैन समाज की ओर से जारी संदेश में अभय जैन, उनकी माता अनु जैन और परिवार के संकल्प की हृदय से अनुमोदना की गई। समाज ने कहा कि नगर के किसी युवा का धर्म और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना सभी के लिए गौरव का विषय है।

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समाज के सदस्यों ने परिवार के भाव को अभिनंदन और वंदन योग्य बताते हुए अभय जैन के धार्मिक जीवन की मंगल कामना की। उनके इस निर्णय को नई पीढ़ी में धर्म, गुरु और संयम के प्रति श्रद्धा बढ़ाने वाला बताया गया।

संकल्प से जुड़ी क्लिप भी साझा की गईं

जैन समाज की ओर से अभय जैन के संकल्प से जुड़ी कुछ विशेष वीडियो क्लिप भी साझा की गई हैं। समाज ने लोगों से इन दृश्यों को केवल देखने के बजाय त्याग और आत्मसंयम के भाव पर चिंतन करने का आह्वान किया।

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संदेश में कहा गया कि यदि इन दृश्यों से लोगों के विचारों में सकारात्मक बदलाव आता है और धर्म के प्रति श्रद्धा बढ़ती है तो यही इस अनुमोदना की सार्थकता होगी।

फिलहाल अभय जैन द्वारा लिए गए संकल्प के विस्तृत धार्मिक स्वरूप, आगामी प्रक्रिया अथवा दीक्षा से संबंधित किसी निश्चित तिथि की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। देवबंद जैन समाज ने उनके जीवन का प्रत्येक कदम धर्म, संयम और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की मंगल भावना व्यक्त की है।

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