बहन की आबरू की रक्षा के लिए जान गंवाने वाले ममेरे भाइयों की पुण्यतिथि पर हवन-यज्ञ, श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा जनसैलाब
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में साम्प्रदायिक दंगों का कारण बने कवाल कांड को 13 साल हो चुके हैं, लेकिन इसका दर्द और राजनीतिक गर्माहट आज भी ताजा है। शुक्रवार को भाई और बहन के प्यार को समर्पित रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया गया। ऐसे में बहन की आबरू की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए जान गंवाने वाले ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की 13वीं पुण्यतिथि पर रक्षाबंधन के दिन शुक्रवार को कवाल क्षेत्र में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
कवाल के मजरे के रूप में पहचाने जाने वाले गांव मलिकपुरा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और हवन-यज्ञ में राजनीतिक, सामाजिक तथा विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने पहुंचकर दोनों भाइयों को श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षाबंधन के पर्व पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाई-बहन के रिश्ते, त्याग और बलिदान की चर्चा प्रमुखता से हुई।

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कौशल विकास विभाग के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व विधायक उमेश मलिक, जिला पंचायत प्रशासक डॉ. वीरपाल निर्वाल, भाजपा नेता गौरव स्वरूप, जानसठ ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र सिंह, मोरना ब्लॉक प्रमुख अनिल राठी, मीरापुर विधायक प्रतिनिधि सुप्रिया पाल, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुधीर सैनी, जानसठ के पूर्व चेयरमैन यनेश तंवर, प्रवेंद्र भड़ाना, भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय मंत्री अमित राठी, जिला सहकारी बैंक चेयरमैन ठा. रामनाथ सिंह, जिला सहकारी बैंक डायरेक्टर हरेंद्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद भारद्वाज, डॉ. शुभम मलिक और भाजपा नेता अचिंत मित्तल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि सभा में गौरव के पिता रवींद्र सिंह और बहन शैली चौधरी सहित परिवार के सदस्यों ने भी दोनों भाइयों को याद किया। हवन-यज्ञ में आहुति देकर सचिन और गौरव की आत्मा की शांति की कामना की गई। इसके साथ ही कवाल कांड के बाद मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के दौरान मारे गए 12 लोगों के परिजनों ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यज्ञ में सभी मृतकों के नाम की पूर्णाहुति कर उन्हें स्मरण किया गया।

रक्षाबंधन के दिन आयोजित इस कार्यक्रम में भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी सचिन और गौरव की स्मृति विशेष रूप से भावुक रही। लोगों ने कहा कि दोनों भाइयों का बलिदान हर वर्ष रक्षाबंधन पर उन्हें याद दिलाता है कि भाई का रिश्ता केवल स्नेह तक सीमित नहीं, बल्कि बहन की रक्षा और उसके सम्मान के लिए त्याग का भी प्रतीक है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी पुण्यतिथि पर बड़ी संख्या में लोगों का जुटना इस घटना से जुड़ी स्मृतियों और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता रहा।
