जिला सहकारी बैंक के सभापति ठाकुर रामनाथ सिंह समेत तीन संचालक पदमुक्त

समितियों के पुनर्गठन के बाद संचालक पद की वैधता पर उठे सवाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

मुजफ्फरनगर। जिला सहकारी बैंक से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए बैंक के सभापति ठाकुर रामनाथ सिंह समेत तीन संचालकों को पद से पदमुक्त कर दिया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद ठाकुर रामनाथ सिंह का जिला सहकारी बैंक के सभापति पद पर बने रहने का अधिकार समाप्त हो गया है। उनके साथ संचालक पंकज पाल और बिजेंद्र मलिक एडवोकेट भी पदमुक्त हो गए हैं। मामला सहकारी समितियों के पुनर्गठन और उनके विभाजन के बाद संचालक पद की वैधता से जुड़ा है। इस संबंध में दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सीनियर बेंच ने सुनवाई की। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने मामले में फैसला सुनाया।

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जानकारी के अनुसार, संजय जैन बनाम सरकार मामले में याचिकाकर्ता सचिन जैन की ओर से करीब छह महीने पहले रिट याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में संबंधित संचालकों के पद पर बने रहने की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि सहकारी समितियों के विभाजन और पुनर्गठन के बाद संबंधित प्रतिनिधि अपनी पूर्व समितियों के बोर्ड का हिस्सा नहीं रह गए थे। ऐसे में पुरानी समितियों के आधार पर जिला सहकारी बैंक के संचालक पद पर उनका बने रहना नियमों के अनुरूप नहीं था।
मामले में पक्षकारों की दलीलों और संबंधित तथ्यों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संचालक पद की वैधता को लेकर फैसला सुनाया।

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अदालत के आदेश के बाद ठाकुर रामनाथ सिंह, पंकज पाल और बिजेंद्र मलिक एडवोकेट के संचालक पद समाप्त हो गए। संचालक पद समाप्त होने के साथ ठाकुर रामनाथ सिंह के सभापति पद पर बने रहने का आधार भी खत्म हो गया। बता दें कि जिला सहकारी बैंक में ठाकुर रामनाथ के अलावा 13 संचालक थे, हाईकोर्ट के फैसले के बाद तीन पद खत्म हो गये हैं, अब जिला सहकारी बैंक में 10 सदस्यीय बोर्ड वजूद है। इसमें किसान नेता राजू अहलावत, पूर्व प्रमुख अमित चौधरी बढेडी, पूर्व प्रमुख अनार सिंह रवि, पूर्व जिला पंचायत सदस्य हरेन्द्र शर्मा के अलावा दो महिला संचालक भी शामिल हैं, मुकेश कुमार जैन उप सभापति हैं।

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गौरतलब है कि जून 2023 में ठाकुर रामनाथ सिंह को मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक का सभापति चुना गया था। ठाकुर रामनाथ सिंह को भाजपा के पूर्व विधायक उमेश मलिक का कट्टर समर्थक माना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान अब समितियों के पुनर्गठन से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट का फैसला आया है। फैसले का असर जिला सहकारी बैंक के संचालन और आगामी सहकारी चुनावी प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद जिला सहकारी बैंक के संचालक मंडल में तीन पदों के खाली होने की स्थिति पैदा हो गई है। इन पदों को लेकर आगे की प्रक्रिया संबंधित सहकारी नियमों और शासन के निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी।

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