भाकियू अराजनैतिक में घमासान, युवा मंडल प्रभारी ने दिया इस्तीफा

चरथावल ब्लॉक के ग्राम अध्यक्षों और पदाधिकारियों के साथ कुशलवीर सिंह ने संगठन छोड़ा, किसान नेता ने लगाए आंदोलन के नाम पर समझौते और वसूली के आरोप

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) में संगठनात्मक नीतियों को लेकर असंतोष सामने आया है। संगठन में युवा मंडल प्रभारी के पद पर कार्य कर रहे किसान नेता ठाकुर कुशलवीर सिंह ने चरथावल ब्लॉक के ग्राम अध्यक्षों और अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों के साथ संगठन से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली और किसान हितों से जुड़े मुद्दों पर नाराजगी जताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

ठाकुर कुशलवीर सिंह और उनके साथ बैठक में मौजूद किसानों का आरोप है कि संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी किसानों के हितों के लिए होने वाले आंदोलनों और धरनों का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए करते हैं। उनका दावा है कि किसानों की समस्याओं को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन किए जाते हैं, लेकिन बाद में संबंधित मामलों में कथित तौर पर समझौते कर लिए जाते हैं। इसी कार्यप्रणाली से आहत होकर उन्होंने संगठन छोड़ने का निर्णय लिया है।

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कुशलवीर सिंह ने आरोप लगाया कि मुजफ्फरनगर जनपद में चलाये गये आरडीएफ के खिलाफ बड़े आंदोलन के बाद संबंधित क्षेत्र में कचरा जलाने वाली फैक्ट्रियों और प्रशासन के साथ कथित सांठगांठ की गई। उन्होंने दावा किया कि इस मामले से जुड़े एक किसान नेता के सहयोगी की पत्नी के नाम आरडीएफ की आपूर्ति का लाइसेंस बनवाया गया, जिससे आर्थिक लाभ लिया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब सामने नहीं आया है।

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किसान नेता ने आरोप लगाया कि जिले में पेस्टिसाइड की बिक्री को लेकर पहले भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया गया था। उनका दावा है कि इसके बाद पेस्टिसाइड विक्रेताओं और सप्लायरों से कथित तौर पर धन वसूली की गई। उन्होंने संगठन के कुछ पदाधिकारियों पर ऐसे लोगों को प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया, जिनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। कुशलवीर सिंह ने यह भी दावा किया कि संबंधित किसान नेता पर उनके पूर्व संगठन में रहते हुए चोरी और ठगी के आरोप लगाए गए थे।

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ठाकुर कुशलवीर सिंह ने किसानों से अपील की कि वे किसान हितों के नाम पर काम करने वाले संगठनों और उनके पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली को परखकर ही उन पर भरोसा करें। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों का उद्देश्य किसानों की समस्याओं को उठाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना होना चाहिए, न कि आंदोलन के माध्यम से निजी हित साधना। इस घटनाक्रम से भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के स्थानीय संगठन में असंतोष की स्थिति सामने आई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों पर संगठन के संबंधित पदाधिकारियों का कोई पक्ष सामने नहीं आया।

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