मुजफ्फरनगर-वहलना चौक का नाम बदलने का सभासद सीमा जैन ने किया विरोध

बोर्ड बैठक में प्रस्ताव संख्या 1234 पर पुनर्विचार की मांग, महाराणा प्रताप के सम्मान में किसी अन्य प्रमुख स्थान पर चौक विकसित करने का दिया सुझाव

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद की शुक्रवार को टाउनहाल स्थित सभाकक्ष में अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप की अध्यक्षता में आयोजित बोर्ड बैठक में वहलना चौक का नाम बदलने का प्रस्ताव चर्चा का विषय बना रहा। दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-58 पर शहर के प्रवेश द्वार के निकट स्थित वहलना चौक का नाम बदलकर महाराणा प्रताप चौक किए जाने संबंधी प्रस्ताव संख्या 1234 पर सभासद सीमा जैन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने इस संबंध में अध्यक्ष को लिखित आपत्ति सौंपते हुए प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और वहलना चौक का वर्तमान नाम यथावत रखने की मांग की।

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वार्ड संख्या 33 की सभासद सीमा जैन पत्नी विकल्प जैन ने अपने पत्र में कहा कि वहलना चौक केवल एक स्थान का नाम नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान जुड़ी हुई है। चौक के समीप स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र वहलना जैन समाज की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस धार्मिक स्थल का प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक महत्व जनपद की विरासत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में चौक का नाम परिवर्तित किए जाने से जैन समाज की भावनाएं प्रभावित होने की आशंका है।

सीमा जैन ने अपने विरोध के साथ महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व और उनके ऐतिहासिक योगदान के प्रति पूरा सम्मान भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप अदम्य साहस, स्वाभिमान, त्याग और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। उनके गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने के लिए शहर में उनके नाम पर चौक अथवा किसी अन्य सार्वजनिक स्थल का नामकरण किया जाना स्वागत योग्य कदम होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि नगरपालिका परिषद शहर के किसी अन्य उपयुक्त और प्रमुख स्थान का चयन कर वहां महाराणा प्रताप चौक विकसित करे। इससे महान योद्धा के सम्मान के साथ-साथ वहलना क्षेत्र की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान भी सुरक्षित रह सकेगी।

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सभासद सीमा जैन ने अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप से आग्रह किया कि प्रस्ताव संख्या 1234 पर निर्णय लेते समय सभी समुदायों की धार्मिक आस्था, सामाजिक भावनाओं और ऐतिहासिक विरासत को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि शहर की पहचान विभिन्न समाजों की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से मिलकर बनी है। इसलिए किसी भी स्थान का नाम बदलने से पहले उससे जुड़ी जनभावनाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बोर्ड बैठक में प्रस्तुत प्रस्ताव को निरस्त कर वहलना चौक का नाम पूर्ववत रखने की मांग करते हुए कहा कि सामाजिक सौहार्द और सभी समुदायों के सम्मान को प्राथमिकता देते हुए ऐसा निर्णय लिया जाना चाहिए, जिससे किसी भी समाज की भावनाएं आहत न हों।

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