भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बसंत पंचमी पर पूजा भी, नमाज भी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित विवादित भोजशाला परिसर को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने बसंत पंचमी के दिन हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा-अर्चना की अनुमति दी है, जबकि मुस्लिम समुदाय को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक शुक्रवार की नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।

शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि दोनों धार्मिक गतिविधियां तय समय-सीमा में ही होंगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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सुरक्षा व्यवस्था पर कोर्ट की सख्त नजर

सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या की जानकारी पहले से जिला प्रशासन को दी जानी चाहिए, ताकि व्यवस्था में किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पूजा और नमाज के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए प्रशासन को सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाने होंगे।

दोनों समुदायों की अलग-अलग मान्यताएं

भोजशाला को लेकर लंबे समय से धार्मिक विवाद चला आ रहा है।
हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती यानी वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी व्यवस्था के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। यह व्यवस्था पिछले 23 वर्षों से लागू है।

शुक्रवार को बसंत पंचमी, बढ़ी प्रशासन की चुनौती

इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण भोजशाला में पूजा और नमाज एक ही दिन होने जा रही है, जिससे प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

इससे पहले वर्ष 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार को ही पड़ी थी। उस समय पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था, जिसके चलते स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और झड़पों की स्थिति बनी थी।

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पहले से बढ़ाई गई सुरक्षा

संभावित तनाव को देखते हुए इस बार जिला प्रशासन ने पहले ही भोजशाला परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती के साथ निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन तय दिशा-निर्देशों के तहत पूजा और नमाज को शांतिपूर्ण ढंग से कैसे संपन्न कराता है।

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