पुराने वाहनों पर जब्ती कार्रवाई के खिलाफ भाकियू लामबंद

बागपत में ओवरएज वाहनों की जब्ती के बाद बोले टिकैत- कार्रवाई का दायरा बढ़ा तो किसान और ग्रामीण भी चपेट में आएंगे, आंदोलन का किया आह्वान

मुजफ्फरनगर। एनसीआर क्षेत्र में आने वाले जिलों में निर्धारित आयु पूरी कर चुके पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने सख्त विरोध का रुख अपनाया है। बागपत में पुराने वाहनों की जब्ती के बाद भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों और ग्रामीणों से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यदि कार्रवाई का दायरा बढ़ा तो इसका असर केवल कार और दोपहिया वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों के ट्रैक्टर और कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले अन्य वाहनों पर भी पड़ सकता है।

बागपत में परिवहन विभाग के द्वारा पिछले कुछ दिनों में चलाये गये अभियान के तहत 10 वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसमें ऐसे वाहनों को जब्त कर स्क्रैप सेंटर भेजा जा रहा है। इसका विरोध भी स्थानीय स्तर पर हुआ। अब भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने इस मुद्दे को उठाया है। किसान नेता राकेश टिकैत ने फेसबुक वॉल से जारी वीडियो संदेश में कहा कि बागपत में एनसीआर की पाबंदियों के नाम पर पुराने वाहनों को लेकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि अभी कार्रवाई कार और बाइक तक दिखाई दे रही है, लेकिन आने वाले समय में इसका असर किसानों के ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि बागपत के बाद मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली समेत एनसीआर के अन्य जिलों में भी इस तरह की जांच और कार्रवाई की पहुंच सकती है।

भाकियू नेता टिकैत ने कहा कि किसानों और ग्रामीणों के लिए पुराने वाहनों को अचानक बदलना आसान नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पुराने वाहनों को बदलने के लिए वाहन स्वामियों को आर्थिक सहायता और सब्सिडी दी जाए। उनके मुताबिक, सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे किसान पुराने वाहन हटाकर नए वाहन लेने में सक्षम हो सकें। उन्होंने कहा कि किसान बड़ी मुश्किल से मोटरसाइकिल या ट्रैक्टर खरीद पाता है और लंबे समय तक उसका इस्तेमाल करता है।

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उन्होंने पराली प्रबंधन को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। टिकैत ने आरोप लगाया कि पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई और विभिन्न प्रकार की पाबंदियों की बात की जा रही है, जबकि उनके अनुसार बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों से होने वाले प्रदूषण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नियमों के विपरीत कचरे को फैक्ट्रियों में जलाए जाने की शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होती।

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टिकैत ने कहा कि एक ओर किसान के ट्रैक्टर और ग्रामीण की मोटरसाइकिल को प्रदूषण के दायरे में रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़े उद्योगों के प्रदूषण पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पुराने वाहनों के मुद्दे को किसानों और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ते हुए कहा कि इसके खिलाफ संगठित तरीके से आवाज उठानी होगी। उन्होंने सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पुराने वाहनों पर कार्रवाई जारी रहती है तो सरकार को पहले वैकल्पिक व्यवस्था और आर्थिक राहत का प्रावधान करना चाहिए। टिकैत ने किसानों से इस मुद्दे पर तैयार रहने और जरूरत पड़ने पर आंदोलन करने का आह्वान किया।

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