मुजफ्फरनगर सीट पर हरेन्द्र ने तोड़ा मिथक, पहली बार जीता गैर भाजपाई जाट

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट खुद में सियासी इतिहास को समेटे है। इन सभी इतिहास को मिथक के तौर पर सियासी हलकों में देखा जाता है। इस सीट पर आजादी के बाद से आज तक कोई भी गैर भाजपाई जाट नेता नहीं जीता था, लेकिन इस लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम ने यह मिथक भी तोड़ दिया है। हमेशा ही भाजपा को उसकी लहर में हराने का काम करने वाले हरेन्द्र मलिक ने यह इतिहास भी रच दिया। हरेन्द्र मलिक ऐसे पहले गैर भाजपाई जाट हैं, जो भाजपा के सामने चुनाव जीते हैं। जबकि इससे पूर्व यहां पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और रालोद मुखिया रहे चौधरी अजित सिंह भी हारे। इनके अलावा गैर भाजपा जाट प्रत्याशियों के रूप में मेजर जयपाल सिंह, अनुराधा चौधरी और हरेन्द्र मलिक जैसे नेता हारने वालों में शामिल हैं। इस बार भी हरेन्द्र मलिक गैर भाजपाई जाट के रूप में चुनाव मैदान में उतरे हैं, मुजफ्फरनगर सीट पर यह उनका चौथा चुनाव रहा।

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समाजवादी पार्टी ने जाट नेता हरेंद्र मलिक को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर मुजफ्फरनगर लोक सभा सीट से 2024 का चुनाव लड़ाने के लिए मैदान में उतारा। उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा और वो भाजपा प्रत्याशी तथा दो बार से सांसद संजीव बालियान के सामने मुख्य मुकाबले में बने हुए दिखाई दे रहे हैं। लेकिन इस सीट का इतिहास है कि यहां से आज तक एक भी गैर भाजपाई जाट चुनाव नहीं जीता। जो भी बड़ा जाट नेता भाजपा के अलावा अन्य पार्टी से चुनाव लड़ा, उसे हार ही मिली। भारतीय क्रांति दल से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने 1971 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन वह सीपीआई के ठाकुर विजयपाल सिंह से हार गए थे। इससे पहले 1962 में सीपीआई के मेजर जयपाल सिंह कांग्रेस के सुमत प्रसाद जैन के सामने हार चुके थे। मेजर जयपाल सिंह भी रसूखदार जाट माने जाते थे। 1977 में जाट नेता वरुण सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन वह लोकदल के सईद मुर्तजा से हार गए। 1998 में जिले के बड़े जाट नेता हरेंद्र मलिक ने सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें भी बीजेपी के सोहनवीर सिंह ने हरा दिया। 2009 लोकसभा चुनाव में जनपद की राजनीति में गहरा प्रभाव रखने वाली अनुराधा चौधरी भी बसपा के क़ादिर राणा के सामने हार गई थीं। अनुराधा चौधरी ने भाजपा के गठबंधन में रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा था। गैर भाजपाई जाट की हार का यह सिलसिला 2019 में भी जारी रहा। उस लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से रालोद के अजीत सिंह ने इलेक्शन लड़ा। लेकिन वह भी भाजपा के डा. संजीव बालियान के सामने हार गए। पिछले 32 साल की सियासत के दौरान इस सीट पर भाजपा के जाट प्रत्याशी 5 बार जीत चुके हैं। मुजफ्फरनगर में भाजपाई जाट का खाता 1991 में खुला। जब भाजपा के नरेश बालियान ने जनता दल के मुफ्ती मोहम्मद सईद को हराया। 1996 में भाजपा के सोहनवीर सिंह ने सपा के संजय सिंह को हराया। 1998 में भाजपा के सोहनवीर सिंह ने सपा के हरेंद्र मलिक को हराया। 2014 में भाजपा के डा. संजीव बालियान ने कादिर राणा को हराया। जबकि डा. संजीव बालियान ने 2019 में रालोद के अजित सिंह को हराकर अपनी जीत दूसरी बार बरकरार रखी। अब हरेन्द्र मलिक ने भाजपा के जाट को हराकर यह मिथक तोड़ दिया है।

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