गेहूं संकट छाने पर मनमोहन ने महात्मा टिकैत से मांगा था सहयोग

मुजफ्फरनगर। रविवार को नम आंखों के साथ पूर्व प्रधानमंत्री और देश के एक महान अर्थशास्त्री के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसके साथ ही उनसे जुड़ी यादों को हर व्यक्ति ताजा करने का प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ. राकेश टिकैत ने भी 17 साल पुराने उस दौर की एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा की है, जब देश में गेहूं की कमी का संकट गहराने के बाद प्रधानमंत्री रहते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने भाकियू अध्यक्ष महेन्द्र सिंह टिकैत को दिल्ली बुलाया और इस संकट से निपटने के लिए सहयोग मांगा था। राकेश टिकैत का कहना है कि डॉ. मनमोहन सिंह किसान हितैषी थे, लेकिन आज का दौर ऐसा है कि किसानों की अनदेखी करने में प्रधानमंत्री कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। 

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92 साल की आयु में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का विगत दिवस एम्स में निधन हो गया। रविवार को नम आंखों के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुजफ्फरनगर जनपद से भी डॉ. मनमोहन सिंह की यादें जुड़ी हैं, वो यहां पर 2013 के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान पहुंचे और दंगा पीड़ितों से बात कर उनको ढांढस बंधाने का काम किया था। ऐसे में उनकी यादों को लेकर बात हो रही है। भाकियू ने भी किसान हितों को लेकर उनके प्रयासों, सहयोग और कार्यों की सराहना की है। किसान नेता राकेश टिकैत ने अपनी फेसबुक वॉल से 17 साल पुुरानी एक तस्वीर साझा करते हुए दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को नमन किया है। इस तस्वीर के साथ उन्होंने एक संदेश भी साझा किया, जिसमें कहा गया है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान अर्थशास्त्री के रूप में देश को अपनी सेवा दे चुके डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की दुखद सूचना प्राप्त हुई, अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में डॉ. मनमोहन सिंह जी ने हमेशा किसान हितों को ध्यान में रखा और समय-समय पर बैठक आयोजित कर किसान हितैषी नीतियों के निर्माण के लिए सफल प्रयास किए। राकेश टिकैत ने इस तस्वीर के अवसर को भी बयां करते हुए जानकारी दी कि साल 2007 में देश जब गेहूं की कमी के संकट से जूझ रहा था, तो उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत और किसान नेता अजमेर सिंह लाखोवाल से बैठक कर एक सफल कार्य योजना का निर्माण किया, जिससे देश को आज भी लाभ हो रहा है।

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राकेश टिकैत ने इस संदर्भ में कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री रहने के दौरान अपने दोनों ही कार्यकाल में किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं किया। किसानों की बात सुनी और उनके लिए काम करके दिखाया। 17 साल पहले छाये गेहूं के संकट के बाद किसान नेताओं के साथ मिलकर उन्होंने जो नीति निर्धारण किया, उसी का परिणाम है कि देश उसके बाद कभी भी गेहूं के संकट के दौर से नहीं गुजरा। आज केन्द्र सरकार में किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज किसानों की बात तक सुनने को तैयार नहीं है। किसानों को लगातार आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। सरकार को किसानों की बात सुननी चाहिए।

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