MUZAFFARNAGAR PALIKA-ईओ आवास के रेनोवेशन में हो रहा था खेल

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में धांधली का खेल इतनी सफाई और निडरता से खेला जा रहा है, इसकी बानगी गाहे-बगाहे सामने आती ही रहती है। यहां जनता के लिए होने वाले कामकाज की हालत क्या हो, जबकि ईओ आवास के रेनोवेशन में ही ठेकेदार फर्म के द्वारा आंख में धूल झौंकने का काम करते हुए नए स्टीमेट में नए दाम के सामाने के बदले पुराने खिड़की-दरवाजे ही कील-कांटों से ठोंककर फिर से लटका दिए गए। जबकि इनको नया लगाये जाने का अनुबंध किया गया था। ईओ प्रज्ञा सिंह ने जब यह देखा तो वो भी ठेकेदार की हरकतों से अचम्भित हो गईं और उन्होंने पालिका के निर्माण विभाग से ईओ आवास के रेनोवेशन का स्टीमेट तलब किया तो ठेकेदार की हरकत की सारी पोल खुल गई। ईओ की नाराजगी के बाद ठेकेदार ने नए दाम पर लगाये गये पुराने माल को उतारकर भूल सुधार की, लेकिन यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

साल 1950 में टाउनहाल में पालिका भवन का निर्माण हुआ था, इसी के आसपास उत्तरी सिविल लाइन में ईओ आवास का भी निर्माण किया गया। तब से लेकर इस आवास की दयनीय स्थिति की किसी ने सुध नहीं ली। जबकि करीब इन 70 सालों में 58 अधिशासी अधिकारी नगरपालिका में तैनात रह चुके हैं। इनमें से अधिकांश इसी ईओ आवास में रहे। कुछ अपने परिवारों के साथ भी यहां पर रहे हैं। पिछले कुछ दशकों से तो ईओ आवास पूरी तरह से जर्जर सा हो रहा था। निवर्तमान ईओ हेमराज सिंह के समय में तो इस आवास की छत से मलबा दो बार उस समय गिरा, जबकि हेमराज कमरे में सो रहे थे। 17 फरवरी 2024 को प्रथम श्रेणी की अफसर प्रज्ञा सिंह ने पालिका में पहली महिला ईओ के रूप में पदभार ग्रहण किया तो वो ईओ आवास की हालत देखकर काफी मायूस हुई। इसको रहने लायक बनाने के लिए उन्होंने चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप से रेनोवेशन कराये जाने का आग्रह किया। इसके बाद निर्माण विभाग ने ईओ आवास के रेनोवेशन का स्टीमेट बनाकर इसका टैण्डर निकाल दिया। वान्या कंस्ट्रक्शन को यह ठेका मिला और ठेकेदार अभिषेक कुमार ने काम शुरू करा दिया।

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सूत्रों के अनुसार ईओ आवास के इस रेनोवेशन पर पालिका ने बोर्ड फंड से करीब 6 लाख रुपये का बजट खर्च किया है। इसके लिए निर्माण विभाग से अवर अभियंता के द्वारा ईओ आवास का निरीक्षण करने के उपरांत आवश्यकता के अनुरूप कार्य को लेकर स्टीमेट तैयार किया गया था। इसमें फर्श और दीवारों पर टाइल्स, लाइटिंग, खिड़की और दरवाजे पुराने हटाकर उनको नये लगाने, मुख्य द्वार को बदलना, द्वार पर लाइटिंग और रंग-रोगन आदि कार्य कराये जाने शामिल थे। इस रेनोवेशन में पूरी तरह से नया सामान ही लगाने के लिए सशर्त अनुबंध ठेकेदार फर्म वान्या कंस्ट्रक्शन के साथ किया गया था, लेकिन ठेकेदार फर्म ने इसमें खेला कर दिया। आरोप है कि ठेकेदार फर्म के द्वारा ईओ आवास से उतारे गये पुराने खिड़की और दरवाजों को ही मरम्मत कर कील-कांटे दुरुस्त करते हुए वापस वहीं टांग दिया गया, जबकि स्टीमेट में नये खिड़की और दरवाजे शामिल किये गये थे।

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कार्य होने के दौरान जब ईओ प्रज्ञा सिंह ने निरीक्षण किया तो वो पुराना सामान ही देखकर भड़क गई और स्टीमेट तलब कर लिया। इसमें नया सामान लगाने की शर्त शामिल होने के बाद ईओ ने ठेकेदार के प्रति नाराजगी जताई और निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी सख्त हिदायत दी। तब कहीं जाकर ईओ आवास पर स्टीमेंट के तहत अनुबंध की शर्तों के अनुसार रेनोवेशन का कार्य किया गया। इस सम्बंध में पालिका के सहायक अभियंता सिविल अखंड प्रताप सिंह का कहना है कि रेनोवेशन के काम में थोड़ा बहुत पुराना भी चलता है। इसमें जो चलने वाला सामान होता है, उसको मरम्मत करके लगाया जा सकता है। इसमें खेल होने जैसी कोई बात नहीं है। न ही ठेकेदार ने जानबूझकर किसी शर्त का उल्लंघन करते हुए सामान लगाया है। उन्होंने कहा कि ईओ मेडम ने स्टीमेट जरूर मंगाया था, ताकि वो रेनोवेशन में होने वाले कार्यों के बारे में जानकारी ले सकें। वहीं ईओ प्रज्ञा सिंह का कहना है कि रेनोवेशन में शामिल कार्यों की जानकारी के लिए उन्होंने जेई निर्माण से स्टीमेट तलब किया था। उनको जानकारी मिली थी कि ठेकेदार ने उतारे गये पुराने खिड़की दरवाजे और दूसरा सामान ही मरम्मत कर लगा दिया है। इसको बाद में ठेकेदार द्वारा सुधार करते हुए हटा लिया गया था। इसमें कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।

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तीन दिन के अवकाश पर गईं ईओ प्रज्ञा सिंह

मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् की ईओ प्रज्ञा सिंह गुरूवार को तीन दिन के अवकाश पर लखनऊ चली गईं हैं। उनको 27 अपै्रल को स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत लखनऊ में स्वच्छ भारत मिशन निदेशक के द्वारा बुलाई गई मीटिंग में भी प्रतिभाग करना है, इसके साथ ही अन्य विभागीय कामकाज भी निपटाने हैं। रविवार तक ईओ प्रज्ञा सिंह अवकाश पर रहेंगी और सोमवार को वो कार्यालय ज्वाइन करेंगी। ऐसे में सोमवार तक पालिका में दो कर अधीक्षक का मामला लटके रहने की संभावना है। क्योंकि गुरूवार तक चेयरपर्सन के योगदान आख्या के सम्बंध में आदेश ईओ को प्राप्त नहीं हुए थे। 

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