MUZAFFARNAGAR-आधी रात मलबे से आई आवाज, मैं जिन्दा हूं, बचा लो!

मुजफ्फरनगर। जानसठ क्षेत्र के गांव तालड़ा में हुए भयावह हादसे को लेकर लोगों में आज सुबह तक भी चर्चा हो रही है, इसमें लोग पुलिस और प्रशासन के द्वारा बचाव कार्यों के लिए दिखाई गई संवेदनशीलता को लेकर भी प्रशंसा कर रहे हैं। करीब 16 घंटे लगातार चले राहत एवं बचाव कार्य के चलते पुलिस प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम सभी 19 मजदूरों को मलबे से निकालने में सफल रही। दुखद यह है कि इनमें से दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन की हालत गंभीर बताई गई है। अंतिम मजदूर को आधी रात के बाद मलबे से सुरक्षित निकाला गया। इस मजदूर ने मलबे से ही लगातार आवाज लगाई, मैं जिन्दा हूं, मुझे बचा लोग, तो एनडीआरएफ ने बचाव कार्य तेज करते हुए उसको बाहर निकालकर ही दम लिया। सुबह सभी मजदूरों को निकालने के बाद एनडीआरएफ की टीम वापस लौट गई। जहां कल चीत्कार और अफरातफरी का आलम था, अब वहां पर मलबा और सन्नाटा पसरा पड़ा है। यह हादसे अपने पीछे कई अहम सवाल भी छोड़ गया है। वहीं हादसे के बाद मजदूरों के परिजन भी सवेरे जिला मुख्यालय पहुंचे और अपनों का हाल चाल जानने को बदहवास नजर आये। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। दोपहर बाद दोनों मजदूरों के शवों को परिजनों के हवाला कर दिया गया था।

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जानसठ थाना क्षेत्र के तालड़ा मोड़ पर मवाना के मुरसलीन ने करीब डेढ़ साल पहले भूमि खरदीने के बाद ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर छह-छह दुकानें बनाई थीं। यहां पर पानीपत खटीमा राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण होने के कारण हाईवे की ऊंचाई अधिक होने के कारण उसकी दुकान काफी नीचे हो गई थी। उसके द्वारा दुकानों का लिंटर उभरवाने के लिए रामपुर निवासी ठेकेदार छुट्टन को ठेका दिया था। करीब पांच दिन पहले ठेकेदार ने अपने पार्टनर विक्की के साथ रामपुर, बरेली और मुरादाबाद के मजदूरों के साथ काम शुरू कराया था। रविवार को ठेकेदार अपने घर चला गया था। मजदूरों के साथ विक्की लिंटर उभरवाने का काम करा रहा था कि शाम करीब पांच बजे कार्य के दौरान अचानक ही लिंटर गिर गया। इसमें वहां काम कर रहे 19 मजदूर मलबे में दब गये, चीख-पुकार मची तो लोगों ने दौड़ लगा ली और बचाव में जुट गये। सीएम योगी ने घटना का संज्ञान लेकर बचाव कार्य तेजी से कराने के निर्देश दिये। एसएसपी अभिषेक सिंह, डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी के साथ ही एडीजी मेरठ जोन डीके ठाकुर, कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियान, भाकियू नेता राकेश टिकैत भी मौके पर पहुंच गये।

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गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम भी पहुंची। पांच जनरेटर और 12 हाइड्रा एवं जेसीबी मशीनों के साथ बचाव कार्य तेजी से किया गया। 18 मजदूरों को मलबे से निकाला गया, इनमें से दो की मौत हो चुकी थी। मजदूरों की तलाश का काम लगातार जारी था, इसी बीच आधी रात के बाद एनडीआरएफ की टीम में लगे कर्मचारियों को मलबे से कुछ आवाज सुनाई दी। मशीनों का शोर थामकर इस आवाज का सुना गया तो मलबे से मजदूर चिल्ला रहा था, मैं जिन्दा हूं, मुझे बचा लो। इसके बाद टीम ने जवाब देते हुए मजदूर का हौसला बनाया और रात करीब ढाई बजे मलबे में दबे अंतिम मजदूर को भी बचा लिया गया। उसको मलबे से निकालकर गंभीर हालत में अस्पताल भिजवाया गया। वहां से उसको मेरठ रैफर कर दिया गया। यह मजदूर जनपद रामपुर के थाना सैफनी क्षेत्र के गांव रायपुर कम्हेडा निवासी बिंकेश है। बिंकेश को करीब दस घंटे के बाद मलबे से बाहर निकाला गया। बिंकेश की हालत खराब थी, लेकिन जब वो सुरक्षित हाथों तक पहुंचा तो उसके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान भी तैर रही थी। बिंकेश तक पहुंचने के लिए एनडीआरएफ कर्मियों को लिंटर का बड़ा हिस्सा काटकर जगह बनानी पड़ी।

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वहीं एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि थानाक्षेत्र जानसठ में 02 मंजिला मकान गिरकर उसके नीचे दबे मजदूरों का रेस्क्यू आॅपरेशन मंगलवार सुबह समाप्त हो गया। इस दौरान सभी 19 मजदूरों को मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली। करीब 16 घंटे आॅपरेशन चलाया गया। स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन, डाॅग स्क्वाड, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ टीमों द्वारा तत्काल रेस्क्यू आॅपरेशन शुरु किया गया तथा मकान के मलबे में दबे 18 मजदूरों को बाहर निकाल कर उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर उपचार के दौरान 02 घायलों की मृत्यु हो गयी है। एसएसपी ने बताया कि देर रात टीमों द्वारा अथक प्रयास करते हुए मलबे में दबे 01 अन्य मजदूर को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका। सुबह टीमों द्वारा बिल्डिंग के मलबे का बारीकी से निरीक्षण किया गया है, जिसमें अब किसी भी मजदूर के दबे होने की संभावना नहीं है।

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