टैण्डर निरस्त होने से नाराज सभासदों ने खोला मोर्चा, चेयरपर्सन से शिकायत

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में शहर के 55 वार्डों के विकास के लिए 202 कार्यों के टैण्डरों का मामला लगातार विवादों में फंसता जा रहा है। करीब छह माह से लटके इन कार्यों में केवल 48 कार्य ही स्वीकृत हो पाये हैं। ऐसे में अब वार्डों में विकास कार्य लटकने के कारण सभासदों ने भी मुखर होकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ईओ पर जानबूझकर नियमों के विपरीत करीब 50 टैण्डर निरस्त करने के आरोप लगाते हुए चेयरपर्सन के समक्ष अपनी नाराजगी प्रकट की और जांच की मांग की है। चेयरपर्सन ने एई निर्माण को मौके पर ही बुलाकर जानकारी ली और उनको फटकार लगाते हुए पुनः परीक्षण कर रिपोर्ट मांगी है।

नगरपालिका परिषद् की जुलाई माह की बैठक में शहर के सभी 55 वार्डों में सीसी सड़क और आरसीसी नाली निर्माण के लिए 202 कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके बाद से इनकी निविदा प्रक्रिया लगातार ही विवादों में फंसी रही है। जुलाई से अब तक करीब छह माह में भी इन कार्यों के शुरू होने की संभावना नहीं बन पा रही है। पहले इन कार्यों में पूल कराने के लिए हुए विवाद के बाद टैण्डर प्रक्रिया को रोक दिया गया था। इसके बाद प्रक्रिया शुरू की गई तो आचार संहिता लागू होने के कारण यह लटक गये और अब जबकि लंबे इंतजार के बाद इन कार्यों के टैण्डर दो स्लॉट में खोले गये तो 202 में से केवल 48 कार्यों की निविदा ही स्वीकृत हो पाई। 160 कार्य की निविदा निरस्त होने से पालिका में हलचल मची है। ठेकेदार नाराज बताये गये हैं तो सभासदों में भी अपने वार्डों के कार्य लटकने के कारण गुस्सा है।

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शुक्रवार की सुबह करीब 30-35 सभासदों ने पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और अपनी शिकायत रखते हुए आरोप लगाया कि करीब 50 ऐसे कार्य की निविदा भी निरस्त कर दी गई, जो नियमानुसार सही थी। केवल निविदा शुल्क का डीडी ईओ नगरपालिका के नाम होने के कारण इनको स्वीकार नहीं किया गया, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं है। सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, मौहम्मद खालिद ने अपनी शिकायत में कहा कि ये निर्णय ईओ ने शासनादेश के खिलाफ जाकर लिया है और इससे उनके वार्डों के कार्य लटक गये हैं। चेयरपर्सन ने सभासदों की शिकायत पर एई निर्माण अखंड प्रताप और लिपिक अशोक ढींगरा को तत्काल तलब किया। बताया गया कि चेयरपर्सन ने एई से पूरी जानकारी मांगी तो वो संतोष जनक जवाब न देकर ईओ द्वारा टैण्डर निरस्त करने की बात कहते रहे। सभासदों ने कहा कि यदि टैण्डर निरस्त किये गये हैं तो ठेकेदारों द्वारा निविदा शुल्क के रूप में दिये गये डीडी वापस क्यों नहीं किये जा रहे हैं, और यदि ये पैसा रखा जा रहा है तो निविदा स्वीकृत मानी जायेगी। उन्होंने इसमें जांच कराये जाने की मांग की। चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने बताया कि सभासदों की शिकायत पर एई निर्माण को निरस्त टैण्डरों का पुनः परीक्षण करते हुए रिपोर्ट देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि अनावश्यक रूप से किसी भी वार्ड का विकास कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।

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एई निर्माण अखंड प्रताप सिंह का कहना है कि जिन ठेकेदारों के टैण्डर निरस्त किये गये हैं, उनमें से किसी ने भी कोई शिकायत निर्माण विभाग या अन्य स्तर पर नहीं की है। आज चेयरपर्सन ने उनको बुलाकर इस सम्बंध में जानकारी ली थी। इसमें उनको नियमानुसार जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। कोई भी टैण्डर नियमों के विपरीत निरस्त नहीं किया गया है। चेयरपर्सन ने निरस्त टैण्डरों का पुनः परीक्षण करते हुए विचार करने के लिए निर्देशित किया है। इस पर विभागीय लिपिक को आदेश देते हुए पत्रावलियां मंगाई जा रही हैं। इसके साथ ही करीब 160 कार्य के लिए रि टैण्डर कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस दौरान मुख्य रूप से सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, मौहम्मद खालिद, नवनीत गुप्ता, शौकत अंसारी, इरशाद हकीम, प्रशांत गौतम, बॉबी सिंह, ममता बालियान, शहजाद चीकू, नौशाद पहलवान, नौशाद खान, अन्नू कुरैशी, रजत धीमान, रविकांत शर्मा, हनी पाल, सभासदपति विकल्प जैन, राजू आढती, नदीम खान आदि मौजूद रहे।

एई निर्माण की रिपोर्ट पर निरस्त किये गये टैण्डरः ईओ प्रज्ञा सिंह

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मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् की ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि 202 निर्माण कार्यों के टैण्डर को लेकर जिलाधिकारी से कुछ सभासदों ने पूल होने की शिकायत की थी। इसमें प्रशासन ने जांच के लिए कहा था। इसी को लेकर टैण्डर खुलने से पहले ही उनके द्वारा एई निर्माण अखंड प्रताप सिंह और लेखाकार प्रीति रानी की दो सदस्यीय समिति का गठन करते हुए टैण्डर खोलने के दौरान पूल होने सम्बंधी आरोपों की जांच करते हुए रिपोर्ट देने के लिए कहा था। इसमें जांच समिति के दौरान टैण्डर खुलने के उपरांत तकनीकी बिड की जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट उनको प्रस्तुत की, जिसमें बताया गया कि 202 कार्यों में से 100 कार्यों की निविदा नॉन रेस्पोन्सिव पाई गई है। इसके साथ ही करीब 45-50 निविदा में निविदा शुल्क के लिए लगाये गये डीडी ईओ नगरपालिका के नाम दे दिये गये हैं, जबकि नगरपालिका के नाम मांगे गये थे। इसी रिपोर्ट पर टैण्डर निरस्त किये गये हैं। जांच टीम ने पूल की संभावना की जांच के लिए उनसे वित्तीय बिड खोलने की अनुमति मांगी है। ईओ का कहना है कि इस रिपोर्ट पर डीडी वाले प्रकरण में उन्होंने खुद बैंक से सलाह करने की बात एई को कही थी, लेकिन कोई सलाह नहीं ली गई तो रिपोर्ट के आधार पर चेयरपर्सन के निर्देश प्राप्त होने के बाद निविदा निरस्त की गई है। 

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