मीरापुर में औवेसी आने से हलचल, हिन्दूवादी संगठनों ने भी बिछाया सियासी जाल

मुजफ्फरनगर। मीरापुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए दावेदारी का दौर सोमवार से शुरू होने की संभावना है। नामांकन के दो दिन किसी भी दल या निर्दल दावेदार ने अपना दावा नहीं पेश किया है। ऐसे में अब इस सीट पर बन रही सीमकरणों में फायर ब्रांड नेता असदुद्दीन औवेसी की आमद हो जाने से नई हलचल पैदा हो गई है। ऐसे में यहां पर हिन्दूवादी संगठनों के नेता और निर्दल प्रत्याशी भी मौका भुनाने की जुगत में लग गये हैं। ये लोग जातिगत और धार्मिक आधार पर अपने अपने पक्ष में एक मजबूत जनाधार होने का दावा लेकर मैदान में आने की तैयारी में हैं। ऐसे में बड़े दलों के प्रमुख प्रत्याशी भी मीरापुर में सियासी हवा का रुख भांपने के लिए पूरी सतर्कता के साथ दांव पेंच तैयार करने में जुटे नजर आ रहे हैं।

जनपद के इतिहास की बात करें तो छोटे दलों और निर्दल प्रत्याशियों ने जातिगत तथा धार्मिक आधार पर वोटों में सेंध लगाकर कई बार जनादेश की हवा का रुख बदलने का काम किया है। नगरपालिका परिषद् मुजफ्फरनगर की चेयरमैनी में सपा प्रत्याशी चितरंजन स्वरूप और भाजपा प्रत्याशी जगदीश भाटिया के बीच हुई सीधी सियासी जंग में रागिब नसीम की गुड़िया का अडंगा आज तक लोगों के जहन में ताजा है। इसके साथ ही साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा की मजबूत लहर के दौर में मीरापुर विधानसभा सीट पर ही सपा प्रत्याशी लियाकत अली और भाजपा प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ान के बीच हुए मुकाबले का परिणाम भी ऐसा ही रहा। यहां पर लियाकत अली ने भाजपा को एक मजबूत फाइट उस दौरान दी, जबकि मोदी लहर की आंधी ने सभी सियासी समीकरण और दलों को उड़ाकर रख दिया था। लियाकत अली मात्र 193 मतों के अंतर से पराजित हुए। जबकि यहां पर अखिल भारतीय विकास कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी इमराना 462, बहुजन मुक्ति पार्टी के मौहम्मद जीशान 292, निर्दल प्रत्याशी मौहम्मद मूसा 451 और नवाब अली 305 वोट ले गये थे। यदि ये छोटे और निर्दल प्रत्याशी नहीं होते तो सपा के खिलाफ गये इन मुस्लिम मतों का लाभ भी लियाकत को मिलता और उनकी जीत की संभावना प्रबल हो सकती थी। इतना ही नहीं साल 2023 में हुए नगरपालिका परिषद् चेयरमैन पद के चुनाव में भी एआईएमआईएम की प्रत्याशी ने यहां पर सपा की जीत में बाधा पैदा की। इस सीट के लिए सपा की लवली शर्मा और भाजपा प्रत्याशी मीनाक्षी स्वरूप के बीच हुई सीधी चुनावी टक्कर में औवेसी की पार्टी की प्रत्याशी ने 11500 मत हासिल किये और लगभग इतने ही अंतर से भाजपा प्रत्याशी मीनाक्षी ने अपनी प्रतिद्वंद्वी लवली शर्मा को पराजित कर चेयरमैनी जीत ली थी।

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अब मीरापुर उपचुनाव की बात करें तो अभी तक इस सीट पर केवल सपा ने ही अपनी प्रत्याशी मैदान में उतारी है। सपा ने पुराने राजनीतिक घराने राणा परिवार की बहू सुम्बुल राणा को टिकट दिया है। इसके अलावा किसी अन्य प्रमुख दल ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। पहली बार किसी उपचुनाव में भागीदारी कर रही बसपा ने यहां पर शाहनजर और सांसद चन्द्रशेखर आजाद के दल आसपा ने जाहिद हुसैन को प्रभारी बनाकर मुस्लिमों पर दांव खेलने का इशारा तो दिया है, लेकिन वो भी अभी प्रत्याशी की अधिकृत घोषणा करने से कतरा रहे हैं। इसी बीच औवेसी ने एआईएमआईएम से यहां पर कांग्रेस में रहे अरशद राणा को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। शनिवार को हैदराबाद में अरशद ने कांग्रेस छोड़कर एआईएमआईएम की सदस्यता ली और वहीं पर औवेसी ने उनको अपनी पार्टी का सिम्बल भी प्रदान कर दिया।

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सोमवार को अरशद राणा अपना नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। औवेसी की मीरापुर उपचुनाव में आमद की आहट ने नई सियासी हलचल पैदा कर दी है। इसके साथ ही हिन्दूवादी संगठनों के नेता और निर्दल प्रत्याशी भी जातिगत और धार्मिक आधार पर एक मौके को भुनाने की जुगत में लग चुके हैं। वहीं सपा, बसपा और आसपा प्रत्याशियों ने भी अपने सियासी नफे और नुकसान को तौलने के लिए हवा का रुख भांपना शुरू कर दिया है। मीरापुर उपचुनाव के इस सियासी समर में जीत और हार के समीकरण बनाने के लिए मतलबी प्रत्याशियों का मोल भाव किये जाने का दौर भी गुपचुप तरीके से शुरू हो चुका है। कुछ मुस्लिम प्रत्याशियों ने हिन्दुओं की वोट में सेंध मारने के लिए जातिगत और धर्म आधारित व्यवस्था में प्रत्याशी उतारने के लिए चौसर बिछानी शुरू कर दी है तो वहीं निर्दल प्रत्याशी भी अपनी अपनी जाति के आधार पर पर्चा भरने के लिए कमर कस रहे हैं ताकि मीरापुर में सज रही इस चुनावी मंडी में अपने समाज के मजबूत आधार का प्रदर्शित् करते हुए वो कीमत लगाकर बहती गंगा में हाथ धोने में सफल हो सकें। ऐसे में भाजपा-रालोद गठबंधन से प्रत्याशी घोषणा में लगातार हो रही देरी के कारण भी दूसरे दलों में खामोशी बनी है। माना जा रहा है कि रविवार को करवा चौथ का पर्व होने के कारण भाजपा-रालोद गठबंधन में प्रत्याशी का ऐलान सोमवार शाम तक के लिए टाल दिया गया है। इसमें चेहरा भाजपा से आने और सिम्बल रालोद पर जाने की चर्चाओं ने पूरा जोर पकड़ा हुआ है। हालांकि मुख्य तौर पर इस गठबंधन में जो नाम अभी तक सामने आये हैं, उनमें पूर्व सांसद राजपाल सैनी, रालोद सांसद चंदन चौहान की पत्नी याशिका चौहान, पूर्व सांसद मलूकर नागर के पुत्र अक्षय नागर, पूर्व विधायक मिथलेश पाल, रालोद नेता रामनिवास पाल, अजीत राठी और रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक का दावा ही बना हुआ है, लेकिन यहां पर राजपाल सैनी और याशिका चौहान के नामों की चर्चाओं ने जोर पकड़ा हुआ है। 

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