मुजफ्फरनगर में ग्रेप का असरः प्रदूषण फैलाने पर 19 पेपर मिलों को नोटिस

मिलों को तीन दिनों के भीतर सड़क किनारे फैली मैली और स्लज हटाने का अल्टीमेटम दिया, हादसा होने पर मिल मालिक फसेंगे

मुजफ्फरनगर। भोपा रोड पर पेपर मिलों द्वारा सड़क पर गीली स्लज और मैली फैलाने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई की है। बोर्ड ने सड़क को फिसलन भरा और खतरनाक बनाने वाली 19 पेपर मिलों को नोटिस जारी किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिकायतों और बढ़ते हादसों के बाद यह कदम उठाया। 17 दिसंबर 2025 को विभाग ने भोपा रोड स्थित 19 पेपर मिलों को नोटिस जारी किया। इन मिलों को तीन दिनों के भीतर सड़क किनारे फैली मैली और स्लज हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि इस कारण कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी फैक्ट्री मालिकों की होगी।

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जिन मिलों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें अग्रवाल डुप्लेक्स एंड बोर्ड मिल्स लिमिटेड, बिंदल पेपर्स मिल्स लिमिटेड, बिंदल डुप्लेक्स लिमिटेड (यूनिट-1 और यूनिट-2), गर्ग डुप्लेक्स एंड पेपर मिल्स लिमिटेड, मीनू पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड, पारिजात पेपर मिल्स, शाकुंभरी पल्प एंड पेपर, श्री भागेश्वरी पेपर मिल्स (यूनिट-1 और यूनिट-2), श्री वीर बालाजी पेपर्स (सीता पेपर्स), सिद्धबली पेपर्स मिल्स लिमिटेड, सिल्वर टोन पल्प एंड पेपर (यूनिट-1 और यूनिट-2), सिल्वरटन पेपर लिमिटेड (यूनिट-1 और यूनिट-2), टिहरी पल्प एंड पेपर्स लिमिटेड (यूनिट-1 और यूनिट-2) और त्रिरूपति बालाजी फाइबर्स लिमिटेड शामिल हैं।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी गीतेश चंद्रा ने बताया कि ये पेपर मिलें अपने गीले कचरे (स्लज) को सड़क पर फेंक रही थीं। ट्रकों और ट्रॉलियों द्वारा कचरा ले जाते समय भी यह स्लज सड़क पर गिर जाती थी, जिससे अत्यधिक फिसलन पैदा होती थी। स्थानीय प्रदूषण अधिकारी गीतेश चंद्रा ने पूर्व में भी इन मिलों को चेतावनी दी थी। हालांकि, फैक्ट्री मालिकों ने इन चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया। बुधवार को हुए कई सड़क हादसों में लोगों के घायल होने के बाद ही ये नोटिस जारी किए गए। नोटिस मिलते ही फैक्ट्री मालिक और प्रबंधक हरकत में आ गए। देर शाम से जेसीबी मशीनें सड़क पर उतर गईं। गीली मैली और चिकनी मिट्टी हटाई गई। अब फिसलन काफी कम हो गई है। राहगीरों ने राहत की सांस ली। ये मिलें न केवल सड़क को फिसलन भरा बना रही थीं, बल्कि वायु और जल प्रदूषण भी फैला रही थीं। गीला कचरा और स्लज से बदबू और बीमारियां फैल रही थीं। कोहरे में फिसलन से हादसे आम हो गए थे। अब सड़क साफ है, जाम और हादसे कम हुए हैं। लेकिन फैक्ट्री मालिकों पर सिर्फ नोटिस काफी है? क्या प्रदूषण और लापरवाही के लिए सख्त सजा नहीं होनी चाहिए? स्थानीय लोग कह रहे हैं, ष्यह सिर्फ शुरुआत है, अभियान जारी रहना चाहिए।

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