बिजली बिल, एलपीजी किल्लत और लंपी बीमारी को लेकर किसानों ने उठाए सवाल, पुरबालियान के जेई पर कार्रवाई की मांग
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत के चौधरी चरण सिंह सभागार में आयोजित किसान दिवस की बैठक में किसानों और किसान नेताओं ने विभिन्न समस्याओं का समाधान नहीं होने पर अधिकारियों के सामने जमकर नाराजगी जताई। बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत और पशुओं में फैल रही लंपी बीमारी को लेकर किसानों ने तीखे सवाल उठाए। कई मामलों में किसानों ने अधिकारियों पर शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
किसान नदीम निवासी बसी कलां ने विद्युत विभाग से जुड़ी समस्या को किसान दिवस में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि विद्युत उपभोग का करीब 1.21 लाख रुपये का बकाया बिल था, जिसे उनके द्वारा जमा किया जा चुका है। विभागीय स्तर से एनओसी भी जारी कर दी गई है। इसके बावजूद उन्हें नोटिस भेजा गया और पुलिस द्वारा दबिश दिए जाने की शिकायत सामने आई। नदीम ने आरोप लगाया कि बिल का भुगतान और एनओसी जारी होने के बाद भी पुलिस कार्रवाई से उन्हें और उनके परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों से मामले की जांच कराकर अनावश्यक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
किसानों ने एलपीजी गैस की किल्लत का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। किसानों का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। जरूरतमंद उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए परेशान होना पड़ रहा है और कथित तौर पर ब्लैक में करीब 1500 रुपये तक सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों ने प्रशासन से गैस आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त कराने और कालाबाजारी पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने एक माह में उपभोक्ताओं को दो सिलेंडर उपलब्ध कराने की व्यवस्था किए जाने की मांग भी रखी, ताकि घरेलू जरूरतों के लिए उन्हें परेशानी न उठानी पड़े।
किसान नेता नीरज पहलवान ने पुरबालियान क्षेत्र की विद्युत समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने बिजलीघर के जेई की कार्यप्रणाली और कथित गलत आचरण पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों से जांच कर कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप था कि ग्रामीणों की विद्युत संबंधी समस्याओं के समाधान में लापरवाही बरती जा रही है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को बिजली से संबंधित शिकायतों के लिए लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसान नेताओं ने अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति, बिलों और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था की निगरानी करने की मांग की।
किसान दिवस में पशुओं में लंपी बीमारी को लेकर भी किसानों ने विभागीय उदासीनता पर रोष जताया। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि लंपी बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण के जो दावे किए जा रहे हैं, वे धरातल पर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने टीकाकरण अभियान को कागजी बताते हुए गांवों में वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की। किसानों ने मांग की कि पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव भेजी जाएं और पशुओं की जांच के साथ उनका टीकाकरण कराया जाए। किसानों का कहना था कि बीमारी की रोकथाम के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
