बयान पर बवालः नरेश टिकैत और जयंत के बीच खिंची जुबानी तलवार

भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा-केन्द्र सरकार के इशारे पर मीडिया ने खड़ा किया विवाद, किसान संगठनों को खत्म करने और आपस में लड़ाने की हो रही गहरी साजिश, हम सभी साथ हैं

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर की धरती पर दिण गया एक बयान वर्तमान में देश की राजनीति और खासकर किसान राजनीति में एक बार फिर सुर्खियों में है। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत की रालोद अध्यक्ष व केन्द्रीय मंत्री जयंत सिंह की भूमिका के परिपेक्ष्य में की गई एक बयानबाजी से शुरू हुआ विवाद अब केन्द्र सरकार, मीडिया और किसान संगठनों के रिश्तों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। भारतीय किसान यूनियन और राष्ट्रीय लोकदल के शीर्ष नेताओं के बीच हुई टिप्पणी के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष व केंद्र सरकार में कौशल विकास मंत्री जयंत चौधरी के बीच बयान को लेकर छिड़ी जुबानी तकरार ने नया मोड़ ले लिया है। किसान नेता और भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने अपनी फेसबुक वॉल से एक वीडियो बयान जारी करते हुए इसे केन्द्र की भाजपा सरकार और मीडिया की मिलीभगत की साजिश करार दिया है। राकेश टिकैत ने स्पष्ट कहा कि जयंत चौधरी और नरेश टिकैत किसान हित में एक साथ हैं। उन्होंने कहा कि जब भी किसानों और जनता को जयंत चौधरी की आवश्यकता होगी, वह समाज के साथ खड़े दिखाई देंगे।

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ज्ञात हो कि हाल ही में नरेश टिकैत ने जयंत चौधरी की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह हलवाई का ततैया न बनें और समाज के हितों को प्राथमिकता दें। उनका आशय था कि सत्ता की मलाई के लिए समाज के व्यापक हितों की अनदेखी न की जाए। इस टिप्पणी के बाद देशभर में बहस छिड़ गई। जवाब में जयंत चौधरी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर नरेश टिकैत के लिए प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग हलवाई और ततैया का किस्सा सुना रहे हैं, उन्हें बता दूँ कि मुझे मिठाई का शौक नहीं है। उनके इस कथन को एक सख्त जवाब के रूप में देखा जा रहा है। इसको लेकर भी सोशल मीडिया पर एक बहस का दौर चल रहा है।

इस विवाद के बीच अब राकेश टिकैत ने सफाई पेश करते हुए केन्द्र सरकार के साथ मीडिया को भी लपेटे में लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया स्वतंत्र रूप से प्रश्न नहीं कर रहा, बल्कि सरकार द्वारा तय प्रश्नों को ही अपने कार्यक्रमों में उठा रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को भ्रम पैदा करने वाले सवालों से विवाद खड़ा करने के बजाय देशहित में निष्पक्ष प्रश्न पूछने चाहिए। आज भारत और अमेरिका व्यापार समझौता सबसे बड़ा मुद्दा है, इसके लिए सरकार से सवाल किये जायें। राकेश टिकैत ने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से पूरा मीडिया जयंत चौधरी के लिए दिए गए बयान पर केंद्रित है, जबकि देश में अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी हैं। उन्होंने कहा कि जिन विषयों पर जयंत से सवाल पूछे जा रहे हैं, वे उनके विभाग से संबंधित नहीं हैं। वैसे ही किसान नेताओं से भी गलत सवाल मीडिया कर रहा है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री से जुड़े प्रश्नों को जबरन जयंत चौधरी से जोड़कर पूछा जा रहा है। उन्होंने इसे मीडिया की अनावश्यक दखलअंदाजी बताया।

राकेश टिकैत की प्रतिक्रिया-ध्यान से सुन लो हम सभी एक हैं

बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान नेता अलग-अलग स्थानों पर, अलग गुट और अलग मंच पर हो सकते हैं, लेकिन विचार और संघर्ष में एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सरकार को घेरा जाएगा। जयंत चौधरी के ट्वीट का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि वो कह चुके हैं कि उनको मीठे का शौक नहीं है, बात स्पष्ट है कि वो सरकार से मोह नहीं रखते और जब जरूरत होगी, जयंत जनता के बीच ही मिलेंगे। उन्होंने जोर देकर ये भी कहा कि सभी ध्यान से सुन लो हम सभी एक हैं, समाज में भ्रम फैलाकर हमें अलग नहीं किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ी तो दिल्ली को फिर से घेर लिया जायेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भ्रमित न हों और किसान एकता बनाए रखें।

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किसान संगठनों को कमजोर करने की साजिश रच रही मोदी सरकार

राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार की नीति किसान संगठनों को कमजोर करने की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में बड़े संगठनों को सीमित कर दिया गया और जत्थेबंदियों को आपस में उलझाकर रखा गया। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान किसान संगठनों की एकजुटता ने बड़ी भूमिका निभाई थी। उनका आरोप है कि वर्तमान में समाज को बांटने और किसान संगठनों की एकता तोड़ने की कोशिश हो रही है। राकेश टिकैत ने मीडिया से आग्रह किया कि वह सरकार का प्यादा न बने और स्वतंत्र सोच के साथ प्रश्न पूछे। उन्होंने कहा कि उन्हें साक्षात्कार देने का शौक नहीं है, लेकिन देशहित के मुद्दों पर स्पष्ट रुख जारी रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने किसान राजनीति और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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