खतौली। भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) की जिला इकाई में संगठनात्मक मजबूती और कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक अहम निर्णय लिया गया है। संगठन के जिला अध्यक्ष ठाकुर नीरज सिंह इन दिनों सेमिनार में भाग लेने के लिए जनपद से बाहर जा रहे हैं। ऐसे में संगठन की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए सैयद मुमताज अली को कार्यवाहक जिला अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति संगठन की एकजुटता और निरंतरता का प्रतीक मानी जा रही है। संगठन को पूरा विश्वास है कि सैयद मुमताज अली अपनी निष्ठा, संघर्षशील स्वभाव और किसानों की आवाज़ को बुलंद करने की क्षमता से जिला अध्यक्ष ठाकुर नीरज सिंह की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष ठाकुर नीरज सिंह ने कहा कि संगठन हमेशा किसान और मजदूर हितों के लिए संघर्षरत रहा है और रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यवाहक जिला अध्यक्ष के रूप में सैयद मुमताज अली किसानों की समस्याओं को और मजबूती से उठाएंगे। कार्यवाहक जिला अध्यक्ष सैयद मुमताज अली ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि यह कदम संगठन के उस संकल्प को दोहराता है कि किसान और मजदूर की आवाज़ कभी भी कमजोर नहीं पड़ने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वे संगठन के हर साथी के सहयोग से किसानों के हक और अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहेंगे। संगठन के इस निर्णय से कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। सभी ने एक स्वर में भरोसा जताया कि सैयद मुमताज अली के नेतृत्व में संगठन और अधिक मजबूती के साथ किसानों के हित में कार्य करेगा। भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) के परिचय सम्मेलन में मुख्य रूप से ठाकुर नीरज सिंह,
राधे प्रणामी, राकेश भटनागर, मिंटू पांचाल, कुलदीप कुमार, सचिन गुप्ता, शाहनवाज अली, परवेज आलम, डॉ. अंकुर प्रकाश गुप्ता, मोहम्मद शमीम, फिरोज खान, अफान अख्तर, जावेद सोनू, इसरार, फुरकान अंसारी, मोहसिन, आस मोहम्मद और अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।

अरावली में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बनेगी हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी
अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां पर्यावरण को ऐसा नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने खनन से जुड़े तमाम पहलुओं की गहन जांच के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि अरावली जैसे संवेदनशील और पारिस्थितिक रूप से अहम क्षेत्र में अवैध खनन केवल प्रकृति ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है। कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और एमिकस क्यूरी को निर्देश





