द्वारिका सिटी के निवासियों को सुप्रीम कोर्ट की राहत

मुजफ्फरनगर। सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के जानसठ रोड स्थित द्वारिका सिटी कालोनी से जुडे एक प्रकरण में अपने पूर्व आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यथास्थिति केवल याचिकाकर्ता गुंजन गुप्ता के स्वामित्व वाली भूमि के सम्बन्ध में ही बनी रहेगी। राज्य या प्रतिवादी को अपनी विकास गतिविधियां जारी रखने की स्वतंत्रता होगी। गुंजन गुप्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तिथि तय की है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुजफ्फनगर की श्री बाला जी द्वारिका कंसोर्टियम द्वारा जानसठ रोड पर विकसित की जा रही द्वारिका सिटी कालोनी को लेकर याचिकाकर्ता गुंजन गुप्ता की याचिका पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची ने आज सुनवाई की। गुंजन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2025 के आदेश की कॉपी जिलाधिकारी तथा मुजफ्फरनगर प्राधिकरण के अधिकारियों को रिसीव कराते हुए दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने द्वारिका सिटी में होने वाले समस्त निर्माण कार्यो पर रोक लगा दी है। जिस पर प्रशासन ने द्वारिका सिटी के विभिन्न भूखण्डों पर चल रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी थी इससे वहां मकान बना रहे लोगों में सनसनी के साथ-साथ भय का माहौल भी बन गया है। अनिश्चितता का माहौल बनने पर भूखण्ड खरी. दने वाले लोगों ने प्रदर्शन भी किया था तथा द्वारिका सिटी के भविष्य को लेकर कई प्रश्न खड़े हो गये थे, जबकि द्वारिका सिटी संचालकों का कहना था कि आदेश में केवल गुंजन गुप्ता द्वारा दशार्यी गई निजी सम्पत्ति को लेकर ही रोक के आदेश जारी किये गये हैं। इस मामले को लेकर निजी स्तर पर भी दोनों पक्षों के बीच सुलह के प्रयास किये गये थे, लेकिन सुलह न होने पर सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी थी।

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द्वारिका सिटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमणयम, अनुभव कुमार आदि ने तर्क रखे और कोर्ट को अवगत कराया कि 27 मई के यथास्थिति बनाये रखने सम्बन्धी आदेश को गलत समझा जा रहा है। राज्य अधिवक्ता ने भी ऐसा ही तर्क दिया। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि प्रतिवादी गुंजन गुप्ता के स्वामित्व वाली भूमि के सम्बन्ध मे ही यथास्थिति रहेगी, शेष भूमि पर विकास गतिविधियां जारी रखने की स्वतंत्रता होगी। गौरतलब बात यह भी है कि द्वारिका सिटी की ओर से विद्वान अधिवक्ता अनुभव कुमार द्वारा कहा गया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा की गई प्रार्थना को स्वीकार करने के लिए तैयार एवं इच्छुक हंै, अर्थात उसके प्लाट की उत्तरी सीमा पर आन्तरिक चकरोड के माध्यम से पहुंच मार्ग प्रदान करने के लिए तैयार हंै। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से द्वारिका सिटी के संचालकों के साथ-साथ कालोनी के लोगों ने भी राहत की सांस ली है।

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