21 साल बाद पालिका का क्वार्टर छोड़ने को तैयार हुए कीर्ति भूषण

मुजफ्फरनगर। बिना किराया दिए करीब 21 साल से अवैध रूप से नगरपालिका परिषद् के आवास में परिवार सहित निवास करने वाले रिटायर्ड लिपिक कीर्ति भूषण को अब टाउनहाल का सरकारी आवास खाली करना ही होगा। पालिका के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बावजूद भी उनको राहत नहीं मिली और हाईकोर्ट से मिले दिशा निर्देशों पर पालिका प्रशासन ने अब उनका आवास खाली कराने के लिए सख्ती रवैया अपना लिया है। इसके लिए ईओ की ओर से शुक्रवार को उनको नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह का समय दिया गया है, इसमें आवास खाली नहीं कराये जाने पर पुलिस बल के साथ कब्जा हटवाने की चेतावनी भी दी गई है।

कीर्ति भूषण नगरपालिका परिषद् में लिपिक रहे हैं, वो साल 2003 में सितम्बर माह में वो रिटायर्ड हुए। इसके बाद से ही वो लगातार पालिका पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी पेंशन और अन्य देयकों का भुगतान पालिका के द्वारा नहीं किया गया है। जबकि पालिका प्रशासन उन पर टाउनहाल में पालिका के क्वार्टर पर अवैध कब्जा करने के आरोप लगाती रही है। ऐसे में कीर्ति भूषण ने पालिका से अपने देयकों और पेंशन राशि का भुगतान पाने के लिए 2018 में सिविल मिसलेनियश रिट पेटिशन संख्या 9022 दायर की। इसमें 10 जुलाई 2018 को कोर्ट ने नगरीय निकाय निदेशक को यह आदेश दिया था कि वो कीर्ति भूषण को 9 प्रतिशत ब्याज के साथ ही उनकी पेंशन और अन्य देयकों का भुगतान करें, तभी से यह मामला विचाराधीन चल रहा है। पालिका ने अपने जवाब में कोर्ट को बताया कि रिटायरमेंट के बाद भी कीर्ति पालिका के आवास पर अवैध रूप से काबिज हैं, जिस कारण उनका उपादान और पंेशन भुगतन रोका गया है, इस पर शपथ पत्र के साथ कीर्ति भूषण ने कोर्ट में जवाब दिया कि पालिका ने उनको आवास आजीवन स्थाई रूप से आवंटित किया है। उनका यही जवाब उनके लिए परेशानी का सबब बन गया, क्योंकि कोई भी सरकारी भूमि या आवास आजीवन आवंटित नहीं किया जा सकता। इसी को लेकर कोर्ट ने पिछले दिनों इस मामले में प्रमुख सचिव नगर विकास और निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय लखनऊ को तलब किया तो हलचल मच गई थी। इसमें याचिकाकर्ता कीर्ति भूषण को व्यक्तिगत रूप से पेशन होने के आदेश के साथ सुनवाई की अगली तिथि सात जनवरी लगा दी गई थी।

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हाईकोर्ट इलाहाबाद में मामले की सुनवाई हुई तो कीर्ति भूषण अपने अधिवक्ता के साथ पेश हुए। इसमें पालिका की जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, जिसको लेकर कीर्ति भूषण का पेंशन आदि दय चुकाने के बाद भी उनपर ही पालिका के करीब 30 लाख रुपये बकाया रहने की बात सामने आने पर कोर्ट ने सख्त रवैया अख्तियार किया और उनसे तत्काल प्रभाव से सरकारी आवास खाली कराये जाने के लिए आदेश दिए गये। इसमें ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए शुक्रवार को कीर्ति भूषण को टाउनहाल परिसर में सरकारी आवास खाली करने के लिए नोटिस भेजा गया है। उनको एक सप्ताह का समय दिया गया है, समयावधि बीतने पर पुलिस फोर्स को साथ लेकर आवास खाली कराये जाने की चेतावनी दी गई है।

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कीर्ति भूषण पर पालिका का बकाया है 29.22 लाख किराया

मुजफ्फरनगर। रिटायर्ड लिपिक कीर्ति भूषण हमेशा ही पालिका पर अपना बकाया बताते रहे हैं, इसी को लेकर ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने 7 दिसम्बर 2024 को कर निर्धारिण अधिकारी दिनेश कुमार यादव को जांच सौंपी थी। उन्होंने 13 दिसम्बर को अपनी जांच आख्या ईओ को सौंप दी, जिसमें कीर्ति भूषण के आवास पर कब्जे को अवैध मानते हुए उनसे बकाया किराया राशि की वसूली करने की संस्तुति की गई। कर निर्धारण अधिकारी ने उनके सेवानिवृत्ति वर्ष 2003 से 2024 दिसम्बर तक किराया तय किया गया है। यह 4621488 रुपये बना है। इसमें उनका उपादान और पेंशन राशि 1698500 रुपये पालिका पर बकाया है। यह राशि बकाया किराया से काटते हुए कीर्ति भूषण पर किराये के रूप में 2922988 रुपये बकाया है, जिसकी वसूली के लिए उनको 15 दिन का समय देते हुए नोटिस 31 दिसम्बर को भेजा जा चुका है। ईओ का कहना है कि इसी बीच उन्होंने पेंशन का निर्धारण नियमानुसा नहीं होने की शिकायत की है, इसके लिए जांच करते हुए उनकी पेंशन का निर्धारण करने के निर्देश दिये गये हैं।

चेयरपर्सन और ईओ को हाईकोर्ट ने किया तलब

मुजफ्फरनगर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात जनवरी की सुनवाई के दौरान बेहद सख्त रूख अपनाया है। इसमें कीर्ति भूषण के सरकारी आवास पर काबिज रहने के बावजूद कार्यवाही नहीं करने को लेकर उन्होंने जहां उनको आवास आवंटन करने वाले चेयरमैन और ईओ पर कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं तो वहीं मौजूदा चेयरमैन और ईओ को व्यक्तिगत रूप से मामले की अगली सुनवाई तिथि 18 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किये हैं। इसके साथ ही स्थानीय निकाय निदेशालय के निदेशक को तत्काल प्रभाव से आवास खाली कराकर अवगत कराने के लिए कहा गया है। निदेशक ने मामले में ईओ को गंभीरता के साथ कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया है। बताया गया है कि कीर्ति भूषण को आजीवन आवंटन करने वाले चेयरमैन और ईओ का पूर्व में निधन हो चुका है। इससे कोर्ट भी अवगत कराया जायेगा।

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1976 में चेयरमैन के आदेश पर ईओ ने किया था आजीवन आवंटन

कीर्ति भूषण ने कोर्ट में जो तथ्य रखे, उनके अनुसार 12 जून 1976 को उनको तत्कालीन पालिका अध्यक्ष ने ईओ को आवास परमानेंट आवंटन करने के लिए निर्देशित किया, जिस पर 14 जून 1976 को ईओ द्वारा उनको पड़ाव भूमि पर पालिका के क्वार्टर संख्या 11 स्थाई रूप से आवंटित कर दिया था। किराया वेतन का दस प्रतिशत तय किया गया था। कीर्ति भूषण ने 16 नवम्बर 1992 को अध्यक्ष से आदेश कराते हुए पड़ाव के बजाये पालिका केम्पस में स्थित क्वार्टर नम्बर 3 को 75 रुपये प्रतिमाह किराया दर पर आवंटित करा लिया और तभी वो इस पर काबिज बने हुए हैं। जबकि वो सितम्बर 2003 में सेवानिवृत्त हो गये। इसके बाद 4 फरवरी 2013 को तत्कालीन ईओ मसूद अहमद ने उनको आवंटन निरस्त करते हुए खाली करने का नोटिस दिया गया, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई और इसके बाद कीर्ति भूषण 2018 में पालिका के खिलाफ होईकोर्ट चले गये। 

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