गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी व्याधियों पर वरिष्ठ चिकित्सकों ने की स्वास्थ्य परिचर्चा

मुजफ्फरनगर। भोपा रोड स्थित प्लासा होटल में मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी संबंधित एक स्वास्थ्य परिचर्चा का आयोजन किया गया। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ग्रासनली, पेट, छोटी आंत, बृहदान्त्र और मलाशय, अग्न्याशय, पित्ताशय, पित्त नलिकाओं और यकृत के सामान्य कार्य और रोगों का अध्ययन है। इसमें अपोलो हॉस्पिटल नई दिल्ली से पधारे वरिष्ठ गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट व हेपेटॉलॉजिस्ट डॉ. योगेश बत्रा व डॉ अमित पंडिता ने पेट व लिवर से संबंधित व्याधियों विषय पर मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ स्वास्थ्य परिचर्चा की।

उन्होंने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि पाचन तंत्र की सूजन संबंधी बीमारी इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज जो कि एक पुरानी बीमारी है, जो पाचन तंत्र आंतों में सूजन या जलन पैदा करती है। इसके दो मुख्य प्रकार क्रोहन रोगयह पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से मुंह से लेकर गुदा तक को प्रभावित कर सकता है और अल्सरेटिव कोलाइटिस, यह मुख्य रूप से बड़ी आंत और मलाशय को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि इसके मुख्य लक्षण लगातार दस्त या कब्ज़, पेट में तेज़ दर्द या मरोड़, थकान या वजन घटना, मल में खून या बलगम आना और बुखार या भूख कम लगना शामिल हैं। चिकित्सकों ने बताया कि इसका सटीक कारण अज्ञात है, परंतु यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के गड़बड़ होने, आनुवांशिकता, या पर्यावरणीय कारकों से जुड़ा हो सकता है। तनाव या गलत खानपान लक्षणों को बढ़ा सकते हैं, लेकिन ये मुख्य कारण नहीं हैं।

इन बीमारियों के इलाज के सम्बंध में चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें सूजन कम करने वाली, प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने वाली दवाएं चलाने के साथ ही मरीज को पोषणयुक्त आहार और जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता होती है, इसके साथ ही गंभीर मामलों में सर्जरी की जा सकती है। बताया कि यह बीमारी एक जीवनभर रहने वाली स्थिति है, परंतु सही देखभाल और डॉक्टर की सलाह से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। यदि उपरोक्त लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। स्वस्थ आहार, नियमित जांच, और तनाव प्रबंधन इस बीमारी से निपटने में मददगार हैं। हाल के कुछ वर्षों में युवा लोगों में भी पेट व लीवर से संबंधित बीमारियांे की संख्या में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है। युवा व्यक्तियों में धूम्रपान की बढ़ती आदत, गतिहीन जीवन शैली, अधिक तनावपूर्ण जीवन शैली, गलत खान-पान की आदतें इसका मुख्य कारण है। इस परिचर्चा में मुख्य रूप से डॉ. एम के बंसल, डॉ. अजय गुप्ता, डॉ. ईश्वर चंद्रा, डॉ. सुनील सिंघल, डॉ. डी एस मलिक, डॉ. आर बी सिंह, डॉ. यश अग्रवाल, डॉ. एम एल गर्ग, डॉ. कुलदीप सिंह चौहान, डॉ. रवींद्र सिंह, डॉ. सुजीत कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशाल कुमार का विशेष सहयोग रहा।

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