राज सिंह मर्डर केसः चार हत्यारों को फांसी की सजा

न्यायाधीश रवि दिवाकर ने देरी से इंसाफ की व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा-ये न्यास करने से इंकार जैसा

शामली में 15 साल पहले बाइक पर साथी के साथ जाते समय बदमाशों ने लूटने के इरादे से किया था हमला

मुजफ्फरनगर। पडौसी जनपद शामली के चर्चित राज सिंह हत्याकांड में 15 साल बाद मुजफ्फरनगर की अदालत ने चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। बाइक और नकदी लूट का विरोध करने पर किसान की हत्या की गई थी। जबकि उसके साथी को पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। अदालत ने दुर्लभ से दुर्लभतम अपराध मानते हुए चारों आरोपियों पर 1.20-1.20 लाख रुपये का अर्थदण्ड लगाया। कई बड़े निर्णयों का फैसले में हवाला देते हुए कहा कि कहा कि न्याय में देरी, न्याय से इन्कार के समान है।

मुजफ्फरनगर जनपद की अदालत में शामली के चर्चित राज सिंह हत्याकांड में 15 वर्ष बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने इस प्रकरण में बहस और गवाही पूर्ण होने के बाद 9 जुलाई को चारों आरोपियों को दोषसिद्ध किया था। इसके पश्चात शुक्रवार को न्यायाधीश रवि दिवाकर ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि न्याय में देरी, न्याय से इन्कार के समान होती है। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने दुर्लभ अपराधों के मामले में जल्द न्याय की व्यवस्था बनाये जाने की ओर इशारा किया।

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न्यायाधीश रवि दिवाकर

लूट का विरोध करने पर पीट पीटकर और गोली मारकर हत्या करने का यह सनसनीखेज मामला वर्ष 2011 के अगस्त माह में हुआ था। 20 अगस्त की रात में बाइक और नकदी लूट का विरोध करने पर किसान की गोली मारकर हत्या से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार भोपा थाना क्षेत्र के भोकरहेड़ी निवासी 48 वर्षीय किसान राज सिंह पुत्र बीर सिंह अपने साथी बिजेंद्र के साथ 20 अगस्त 2011 की रात करीब सवा आठ बजे बाइक से अपनी बहन के घर शामली के कुड़ाना गांव जा रहे थे। इस मामले में मृतक राज सिंह के भांजे राहुल मलिक पुत्र हरि सिंह मलिक निवासी कुडाना ने थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था।

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राहुल मलिक के अनुसार गांव कुड़ाना से करीब एक किलोमीटर पहले आम के बाग के पास बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। दोनों पर लाठी-डंडों से हमला किया गया और उन्हें बाग में खींचकर ले जाया गया। वहां बिजेंद्र के हाथ-पैर बांध दिए गए, जबकि लूट का विरोध करने पर राज सिंह की बेरहमी से पिटाई की गई और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए।

डीजीसी राजीव शर्मा ओर एडीजीसी कुलदीप ने बताया कि इस हत्याकांड में शामली पुलिस की जांच में फुगाना के बहावड़ी गांव निवासी अजीत पुत्र सुरेन्द्र धींवर और सूरज उर्फ काला पुत्र प्रकाश धींवर, शहर क्षेत्र के वहलना निवासी अनिल पुत्र मलखान सिंह तथा देवरिया के शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव घुसवा रामपुर निवासी सुनील पुत्र विधि प्रजापति के नाम सामने आए थे। अभियोजन के अनुसार पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए। तीन आरोपी सूरज, अनिल और अजीत जमानत पर चल रहे हैं, जबकि सुनवाई के दौरान सुनील के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर नौ जुलाई को उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था। सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है, इसके साथ ही चारों पर अर्थदण्ड लगाया गया है।

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