कहा-संगठन के नेताओं को सत्यापन के नाम पर थाने बुलाने को फोन कर रहे पुलिस कर्मी, बोले- पहले भाजपा नेताओं का हिसाब सार्वजनिक करें, हमें डराने का काम न करें
मुजफ्फरनगर। किसान संगठनों से जुड़े नेताओं और पदाधिकारियों से पुलिस द्वारा विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी जुटाए जाने की कवायद को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कड़ा विरोध जताया है। टिकैत का कहना है कि किसानों और किसान नेताओं से उनकी संपत्ति, आय, बैंक खातों, आपराधि रिकॉर्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी का ब्यौरा मांगने से पहले सरकार और पुलिस प्रशासन को भाजपा नेताओं तथा सत्ता से जुड़े लोगों की संपत्तियों और आय के स्रोत सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान संगठनों को दबाव में लेने और उन्हें आंदोलनों से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
सोशल मीडिया पर राकेश टिकैत का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह किसानों की बैठक के दौरान इस मुद्दे पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से किसानों तक एक फार्म पहुंचाया जा रहा है, जिसमें करीब आठ से दस बिंदुओं पर जानकारी मांगी जा रही है। इनमें कुछ सवाल सीधे तौर पर संपत्ति और आमदनी से संबंधित हैं। टिकैत ने कहा कि किसानों को अपनी जानकारी देने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि सरकार सभी लोगों का सत्यापन कर रही है तो इसकी प्रक्रिया समान रूप से होनी चाहिए। टिकैत ने कहा कि किसानों का आधार, पैन कार्ड, जमीन और अन्य जरूरी दस्तावेज पहले से ही विभिन्न सरकारी विभागों के रिकॉर्ड में मौजूद हैं। इसके बावजूद किसान नेताओं और संगठन से जुड़े लोगों से दोबारा परिवार की आय, जमीन, संपत्ति और अन्य विवरण मांगना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन केवल किसान संगठनों को निशाना बनाया गया तो इसे दबाव बनाने की कार्रवाई माना जाएगा।
उन्होंने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि पुलिसकर्मी किसानों का सत्यापन करने के नाम पर उन्हें परेशान न करें। टिकैत ने कहा कि पुलिस और प्रशासन का सम्मान किया जाता है, लेकिन किसानों को डराने या संगठन के पदाधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि संगठन से जुड़े कुछ लोगों के पास पुलिसकर्मियों के फोन भी पहुंचे हैं और उन्हें थाने बुलाया जा रहा है। राकेश टिकैत ने कहा कि किसान संगठन फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं, लेकिन इसे उनकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसानों और किसान नेताओं को लगातार दबाव में लेने की कोशिश की गई तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। टिकैत ने किसानों से भी अपील की कि वे इस तरह की कार्रवाई से डरें नहीं।
इन्हीं मुदछों को लेकर मीडिया से बातचीत में टिकैत ने कहा कि किसान नेताओं की संपत्ति और जमीन का विवरण तहसील स्तर पर पहले से उपलब्ध है। जमीन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। ऐसे में पुलिस बल के माध्यम से किसानों से बार-बार जानकारी मांगने की जरूरत पर सवाल उठता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सभी लोगों का सत्यापन कर रही है तो किसान संगठन भी अपना पूरा ब्यौरा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि केवल किसान नेताओं और संगठनों से जुड़े लोगों को चिह्नित कर जानकारी जुटाई जा रही है तो यह एकतरफा कार्रवाई है।
चीनी के बढ़ते दामों पर टिकैत ने उठाए सवाल, लाभ गन्ना किसानों को नहीं
चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर भी राकेश टिकैत ने सरकार और चीनी मिलों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि गन्ने के दाम में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि बाजार में चीनी के दाम बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि चीनी का बढ़ा हुआ मूल्य यदि व्यापारियों और मिल मालिकों तक पहुंच रहा है तो उसका लाभ गन्ना किसानों को भी मिलना चाहिए। टिकैत ने कहा कि बड़ी कंपनियों के खाद्य क्षेत्र में आने के बाद सरकार को बाजार और कीमतों पर नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चीनी के दाम बढ़े हैं तो क्या इसका फायदा गन्ना किसानों तक पहुंचा है। उनके मुताबिक चीनी के बड़े स्टॉक होल्डर बाजार में कीमतों को प्रभावित करने की स्थिति में होते हैं, जबकि किसान को उसके गन्ने का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
राकेश टिकैत ने कहा कि गन्ना मूल्य की घोषणा होने वाली है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए गन्ने का मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए। यदि तत्काल मूल्य वृद्धि नहीं होती तो किसानों को उनके बकाये पर ब्याज का लाभ दिया जाना चाहिए, ताकि बाजार में चीनी के बढ़े दाम का कुछ लाभ किसानों तक भी पहुंच सके। एथेनॉल के मुद्दे पर टिकैत ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन को चीनी के दाम बढ़ने का सीधा कारण बताना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि एथेनॉल के कारण किसी की गाड़ी खराब हुई हो तो उसका उदाहरण सामने लाया जाए। उनका कहना था कि गन्ना किसानों के हित में एथेनॉल नीति को देखने के साथ-साथ गन्ने के मूल्य पर भी सरकार को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। टिकैत ने कहा कि चीनी के दाम बढ़ रहे हैं तो इसका लाभ केवल मिल मालिकों, बड़े व्यापारियों और स्टॉक रखने वालों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। गन्ना किसान पूरे उत्पादन तंत्र की बुनियाद है और उसे भी बढ़ी कीमतों का उचित हिस्सा मिलना चाहिए।
