मुजफ्फरनगर-अवैध धर्मान्तरण की पाठशाला बना फुलत मदरसा जमींदोज

फुलत के दारूल उलूम रहीमिया मदरसे पर पुलिस की सख्त निगरानी में आठ दिन तक चला बुलडोजर, स्वामी यशवीर ने जताया आभार

ग्राम सभा की करीब पांच बीघा भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप, राजस्व न्यायालय के आदेश के बाद पूरी हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई

मुजफ्फरनगर। रतनपुरी थाना क्षेत्र के गांव फुलत में स्थित ऐतिहासिक दारूल उलूम रहीमिया मदरसे के अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शनिवार को पूरी हो गई। ग्राम सभा की भूमि पर अवैध कब्जा कर मदरसे के निर्माण का आरोप लगने के बाद पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी में करीब आठ दिनों तक बुलडोजर चलाया गया। कार्रवाई के दौरान मदरसे के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और आसपास स्थित मकानों व दुकानों को भी एहतियातन बंद करा दिया गया।

बताया गया कि जिस भूमि पर मदरसे की दो मंजिला इमारत का निर्माण किया गया था, वह राजस्व अभिलेखों में ग्राम सभा की भूमि तथा कब्रिस्तान के रूप में दर्ज पाई गई। करीब पांच बीघा भूमि पर वर्षों की मेहनत और लागत से निर्मित भवन को हटाने की कार्रवाई प्रशासन की ओर से राजस्व न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई। ध्वस्तीकरण के लिए दर्जनों मजदूरों को लगाया गया और लगातार आठ दिनों तक बुलडोजर से निर्माण को हटाने का काम चलता रहा। मदरसे के खिलाफ योग साधना आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर की ओर से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायत में अवैध धर्मांतरण, शारीरिक शोषण और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराने सहित कई आरोप लगाए गए थे। शिकायत के आधार पर रतनपुरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।

एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार, रतनपुरी थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया था कि ग्राम फुलत में ग्राम सभा की भूमि पर अवैध रूप से दारूल उलूम रहीमिया मदरसे का निर्माण कर मौलाना हिफजुर्रहमान उर्फ हफीजुर्रहमान अंसारी, जुबैर अंसारी और जुनैद अंसारी द्वारा इसका संचालन किया जा रहा था तथा धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इस मामले में रतनपुरी थाने पर मुकदमा अपराध संख्या 98/26 के तहत बीएनएस की धारा 352, 351(2) और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संप्रवर्तन अधिनियम 2021 की धारा 3/5(2) में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने 15 जुलाई 2026 को मामले में आरोपी जुनैद अंसारी को गिरफ्तार किया था। वह वर्तमान में जिला कारागार मुजफ्फरनगर में निरुद्ध है।

इसे भी पढ़ें:  MUZAFFARNAGAR-फ्रेट कॉरीडोर रेलवे लाइन पर मिला एमबीबीएस की छात्रा का शव

पुलिस के मुताबिक, मदरसे के निर्माण से संबंधित अवैध कब्जे का मामला अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) के न्यायालय में विचाराधीन था। 17 अगस्त 2026 को वाद खारिज कर दिया गया। इसके बाद तहसीलदार न्यायिक खतौली के आदेश को बरकरार रखते हुए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67(5) के तहत संबंधित भूमि को सार्वजनिक भूमि घोषित किया गया। प्रशासन की ओर से आदेश के अनुपालन में मदरसा संचालकों को नोटिस तामील कराया गया। इसके बाद 22 अगस्त 2026 से अवैध कब्जे के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में शुरू हुई कार्रवाई 29 अगस्त को पूरी हो गई। यानि इन आठ दिनों तक लगातार पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने मदरसे पर मौजूद रहकर ध्वस्तीकरण का काम कराया।

इसे भी पढ़ें:  नरेश टिकैत ने यूनियन के चार बड़े नेताओं को किया निष्कासित

ध्वस्तीकरण के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मदरसे के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। आसपास के मकानों और दुकानों को भी सुरक्षा के दृष्टिगत बंद कराया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में मजदूरों ने भवन के विभिन्न हिस्सों को हटाने का काम किया। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई पूरी होने के बाद संबंधित भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करा दिया गया है। इस कार्रवाई को लेकर स्वामी यशवीर ने डीएम और एसएसपी के साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए शेष आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

इसे भी पढ़ें:  खतौली: जिम संचालक पर जानलेवा हमला, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग 
Share This Article