EXCLUSIVE—आयुष मलिक को संविधान ने दिलाई आजादी, पढ़िए क्या बोले-न्यायमूर्ति संदीप जैन

आयुष मलिक धर्मांतरण प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग की पसंद को माना उसका संवैधानिक अधिकार, मर्जी का धर्म और पसंद की शादी का मिला हक
कोर्ट में आयुष मलिक ने कहा- 2014 में अपनी इच्छा से अपनाया था इस्लाम, चांदनी कुरैशी से शादी का भी जताया इरादा, पिता का विरोध कोर्ट में हुआ खारिज

शामली। हरियाणवी सिंगर और एक्टर अंकित बालियान की दिनदहाड़े हत्या की सनसनी से उबर रहे जनपद शामली में एक बार फिर से आयुष मलिक धर्मान्तरण प्रकरण चौक-चौपाल पर लोगों के बीच नई चर्चा का विषय बन गया है। करीब तीन माह से खामोश आयुष मलिक अपने दोस्त सुल्तान कारी के सहारे हाईकोर्ट पहुंचा, जज के सामने दिल खोलकर बोला, यहां उसकी हर बात को सुना गया, यह वो जगह थी, जहां ने तो समाज का दबाव उस पर हावी हुआ और न ही खाकी या किसी संगठन का खौफ और न ही परिवार की जिद उसकी जुबां को ताला लगा पाई।

आयुष मलिक ने स्कूली जीवन से लेकर जून 2026 के बवाल तक सारी कहानी विद्वान न्यायाधीश के सामने रखी। पिता ने कोर्ट में अपना अधिवक्ता खड़ा कर आयुष की बात का, उसकी जिद का विरोध किया, लेकिन बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित संविधान को सामने रखते हुए न्यायाधीश ने जो निर्णय सुनाया, उसने ‘घर वापसी’ के बाद भी घुटन महसूस करते आयुष को आजादी दिलाने का काम किया है। अदालत का ये फैसला ऐसे लोगों के मंुह पर एक जोरदार तमाचा है, जो धर्म का लिबादा ओढ़कर न कानून को मान रहे हैं और संविधान का सम्मान कर रहे हैं। ‘नयन जागृति’ यहां पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस चर्चित निर्णय के फैसले को आपके सामने रख रहा है, इसे पढ़िए और गौर करिए की भारतीय संविधान हमें क्या शक्ति देता है।

जनपद शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए आयुष मलिक प्रकरण में आयुष की बात को उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धर्म चुनने और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ विवाह करने के अधिकार को संवैधानिक संरक्षण से जोड़ा है। आयुष मलिक ने अपने दोस्त मौहम्मद सुल्तान कारी पुत्र रहीस निवासी गांव जगहेता नबीज सरसावा, जनपद सहारनपुर और अन्य के साथ 9 सितम्बर 2026 को बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका संख्या 1307/2026 दायर की। इसमें राज्य सरकार और तीन अन्य को प्रतिवादी बनाया गया। जिनमें आयुष के पिता देवराज मलिक भी शामिल रहे। याचिकाकर्ता के वकील दीपक सिंह, मोहम्मद खालिद, उमर खालिद रहे तथा प्रतिवादी राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता ने पक्ष रखा। आयुष के पिता देवराज मलिक की ओर से उनके अधिवक्ता विभु राय ने तर्क वितर्क किए। इसमें हुई बहस के बाद न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने कहा कि बालिग व्यक्ति अपनी अंतरात्मा के अनुसार धर्म और आस्था का चुनाव करने तथा अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ जीवन बिताने का निर्णय लेने में सक्षम है। अदालत ने आयुष मलिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर रोक जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं पाया और उन्हें अपनी पसंद की जगह तथा अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने की स्वतंत्रता दी।

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आयुष बोला-कोई दबाव नहीं, 2014 में स्वेच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था

इस मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका संख्या 1307/2026 की सुनवाई के दौरान नौ सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने शामली पुलिस को आयुष मलिक को 16 सितम्बर को कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में थाना कोतवाली शामली के उपनिरीक्षक रवि दत्त शर्मा ने 16 सितम्बर को आयुष मलिक को अदालत के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने उनसे सीधे बातचीत की। आयुष ने न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ के समक्ष रखी गई बात में अपनी उम्र करीब 31 वर्ष बताते हुए कहा कि उन्होंने बी.फार्मा तक शिक्षा प्राप्त की है। उनके अनुसार उन्होंने वर्ष 2014 में स्वेच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था। उन्होंने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन का निर्णय किसी दबाव, धमकी, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन के कारण नहीं लिया गया था। आयुष ने यह भी बताया कि इस्लाम अपनाने के बाद से वह उस धर्म की आवश्यक प्रथाओं का पालन कर रहे हैं, लेकिन उनका यह निर्णय उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को स्वीकार नहीं था।

कहा-चांदनी कुरैशी से विवाह की इच्छा, इसी कारण फंसा परिवार

अदालत के समक्ष आयुष मलिक ने चांदनी कुरैशी के साथ वैवाहिक संबंध बनाने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह चांदनी कुरैशी से विवाह करना चाहते हैं और यह निर्णय भी उनके माता-पिता को स्वीकार नहीं है। आयुष के अनुसार, इसी विवाह संबंधी निर्णय को लेकर छह जून 2026 को शामली थाने में चांदनी कुरैशी और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ केस क्राइम नंबर 241/2026 दर्ज किया गया। एफआईआर में उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 की धारा 5(1) और 3 तथा बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए थे।

आयुष ने लगाया नजरबंद करने और धमकी देने का आरोप

आयुष ने अदालत को बताया कि जून 2026 में उठे उनके धर्मान्तरण मामले के बाद उन्हें धमकियां दी गईं और कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से कैद में रखा गया। उन्होंने कहा कि चार जून 2026 से उन्हें नजरबंद करके रखा गया था। अदालत के आदेश के बाद उन्हें अब न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। आयुष ने न्यायालय के सामने दोबारा स्पष्ट किया कि उन पर किसी व्यक्ति का दबाव, धमकी या अनुचित प्रभाव नहीं है और इस्लाम अपनाने तथा उसका पालन करने का निर्णय उन्होंने अपनी इच्छा और सोच-विचार के बाद लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि चांदनी कुरैशी से विवाह करने का फैसला भी उनकी स्वतंत्र इच्छा है।

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पिता देवराज ने कोर्ट में बेटे के दावे से जताई असहमति

न्यायालय ने आयुष के पिता देवराज सिंह मलिक से भी बातचीत की। पिता ने आयुष के आरोपों को गलत बताया। उनका कहना था कि उनका बेटा कुछ लोगों के प्रभाव अथवा ‘ब्रेनवॉशिंग का शिकार हुआ है और उसने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म नहीं अपनाया। पिता ने अदालत को बताया कि उन्हें अपने बेटे की भलाई की चिंता है और इसी कारण वह आयुष के इस्लाम अपनाने तथा चांदनी कुरैशी से विवाह करने के निर्णय से सहमत नहीं हैं। हालांकि, आयुष मलिक ने अपने पिता की इन बातों का खंडन करते हुए अदालत के समक्ष अपने निर्णयों को स्वतंत्र और स्वयं की इच्छा से लिया गया बताया।

कोर्ट ने कहा- बालिग व्यक्ति की पसंद पर संदेह का आधार नहीं

न्यायालय ने कहा कि आयुष मलिक बालिग हैं और अपनी जिंदगी से जुड़े निर्णय लेने में सक्षम हैं। अदालत के अनुसार, कोर्ट के समक्ष आयुष ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया और यह निर्णय किसी धमकी, जबरदस्ती, अनुचित प्रभाव या दबाव में नहीं लिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री सामने नहीं आई, जिससे आयुष द्वारा न्यायालय के समक्ष दिए गए बयान पर अविश्वास करने का आधार मिले। ऐसे कोई साक्ष्य नहीं दिए गए और न ही आयुष पर संदेह का कोई आधार ही साबित हो पाया है।

संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म चुनने की स्वतंत्रता

हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता संवैधानिक रूप से संरक्षित है, हालांकि यह अधिकार संविधान में निर्धारित सीमाओं के अधीन है। अदालत ने कहा कि बालिग व्यक्ति सामान्य तौर पर अपनी अंतरात्मा के अनुसार अपने धर्म या आस्था का चुनाव करने का अधिकार रखता है। व्यक्तिगत स्वायत्तता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता से जुड़े इस निर्णय को केवल इसलिए नहीं बदला जा सकता कि वह परिवार के सदस्यों को स्वीकार्य नहीं है।

अनुच्छेद 21 में पसंद का विवाह भी व्यक्तिगत आजादी का हक

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ विवाह संबंध बनाने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी बालिग व्यक्ति का यह निर्णय कि वह किससे विवाह करना चाहता है या किसके साथ संबंध बनाना चाहता है, उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है। अदालत ने कहा कि केवल इसलिए ऐसी पसंद को सीमित नहीं किया जा सकता कि वह परिवार की इच्छाओं या अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।

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चांदनी और उनके पिता इस्लाम को मिल चुकी है जमानत

अदालत ने रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी, जिनके खिलाफ उपरोक्त मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी, को मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में शामली (कैराना) के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 24 जुलाई 2026 के आदेश से दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया था। अदालत के समक्ष रखे गए साक्ष्यों के अनुसार आयुष मलिक पुलिस की मौजूदगी में अपने घर पर रह रहे थे और मौजूदा न्यायिक कार्यवाही के तहत उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई बालिग व्यक्ति अदालत के समक्ष अपनी स्वतंत्र इच्छा और पसंद को स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है, तो सामान्य तौर पर उस पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए, जब तक यह साबित न हो कि कानून में मान्य परिस्थितियों के कारण उस पसंद का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत को किसी बालिग व्यक्ति की सोच-समझकर बनाई गई पसंद की जगह अपनी सोच नहीं रखनी चाहिए कि उसके लिए क्या लाभकारी या उचित होगा।

पिता की चिंता समझने योग्य, आयुष की आजादी महत्वपूर्ण

न्यायालय ने कहा कि पारिवारिक संबंधों के संदर्भ में पिता की ओर से बेटे की भलाई को लेकर जताई गई चिंता समझ में आती है। हालांकि, ऐसी चिंता अकेले किसी बालिग व्यक्ति की संवैधानिक रूप से संरक्षित स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकती, जब वह अपने धर्म, निवास और जीवनसाथी के संबंध में निर्णय लेने में सक्षम हो। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों के आधार पर आयुष मलिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर किसी भी तरह की रोक जारी रखने का कानूनी आधार नहीं पाया।

अपनी पसंद की शादी, आजाद जिन्दगी का मिला अधिकार

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप जैन ने 16 सितंबर के अपने इस आदेश में कहा कि आयुष मलिक को अपनी पसंद की जगह पर और अपनी इच्छा से चुने गए व्यक्ति के साथ रहने की स्वतंत्रता है। साथ ही उन्हें अपनी पसंद के धर्म को मानने और उसका पालन करने तथा कानून के अनुसार अपने वैवाहिक संबंध के संबंध में उचित निर्णय लेने की स्वतंत्रता होगी। इन टिप्पणियों और निर्देशों के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण कर दिया।

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