गजब कारनामा-शहर में यूनीपोल को लग गये पैर

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में बाबुओं के खेल भी निराले हैं, कहीं क्लेरिकल मिस्टेक तो कहीं पर मनमाना रवैया, भ्रष्टाचार के लिए आतुर कुछ पालिका लिपिकों के लिए नियम और कायदे उनके हाथों का खिलौना भर मात्र है। ऐसे ही भ्रष्टाचार और अनियमितता की पोल पालिका ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह के द्वारा दिये गये आदेश के बाद विज्ञापन प्रचार व्यवस्था में खुल रही है। पहले एक विज्ञापन एजेंसी को चार के स्थान पर 14 स्थानों की अनुमति कर विभाग से जारी करा दी गई, तो अब सामने आया है कि अपने पैरों न चलने वाले यूनिपोल के भी बाबुओं ने पैर लगा दिये हैं। ये सारा माजरा अवैध विज्ञापन पट के सर्वे में सामने आया है, सर्वे का काम पूरा करते हुए रिपोर्ट कर विभाग को सौंप दी गई है। इस पर अब जल्द ही एक्शन की तैयारी है।

बता दें कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए पालिका में करीब 20 विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण अभी तक नहीं हो पाया है। मार्च 2024 को इनको जारी अनुमति पूर्ण होने पर लोकसभा चुनाव के लिए एक माह के लिए विशेष अनुमति प्रदान की गई थी, जो 30 अपै्रल को पूर्ण होने पर शहरी क्षेत्र में लगे होर्डिंग, यूनिपोल और रूफटॉप सहित सभी विज्ञापन पट अवैध घोषित हो चुके हैं। ऐसे में विज्ञापन एजेंसियों का नवीनीकरण करने से पूर्व ईओ प्रज्ञा सिंह के निर्देश पर कर अधीक्षक के द्वारा 20 विज्ञापन एजेंसियों को अपने अपने अवैध होर्डिंग और यूनीपोल हटवाने के निर्देश दिये गये थे। ऐसे में विज्ञापन एजेंसियों ने ईओ से मिलकर शहरी क्षेत्र में लगे विज्ञापन पट का सर्वे कराते हुए अवैध विज्ञापन पट को चिन्हित कराने का सुझाव दिया था। इसके बाद ईओ ने कर अधीक्षक को सर्वे कराने के निर्देश दिये गये थे। इसके लिए कर अधीक्षक को विभाग के तीनों राजस्व निरीक्षकों अमित कुमार, विजय कमार और अमरजीत सिंह की संयुक्त टीम बनाने तथा विभागीय लिपिकों को इस टीम से दूर रखने के निर्देश दिये गये थे।

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राजस्व निरीक्षकों ने करीब एक सप्ताह की कड़ी मेहनत के बाद शहरी क्षेत्र में लगे सभी विज्ञापन पट के सर्वे का काम पूर्ण कर लिया है। इसमें कर विभाग से उनको करीब 411 होर्डिंग और 85 यूनीपोल की लिस्ट दी गई थी। जबकि मौके पर इससे कहीं ज्यादा विज्ञापन पट लगे हुए मिले हैं। लिस्ट से अलग पाये गये विज्ञापन पटों को रेड मार्किंग करते हुए अवैध के रूप में चिन्हित करने का काम पूरा कर लिया गया है। राजस्व निरीक्षकों ने अपने रिपोर्ट कर अधीक्षक को सौंप दी है। ऐसे में विज्ञापन पटों की स्वीकृति में पालिका के लिपिकों के द्वारा किये गये कई बड़े घपले और झोल सामने आये हैं। सर्वे ने पूरी तरह से चल रहे गोरखधंधे की पोल खोलने का काम किया है। कर विभाग के लिपिकों ने अनुमति देने में पूर्व अधिकारी के साथ मिलकर इतना बड़ा खेल रचा कि अचल यूनीपोल भी चलते फिरते नजर आये हैं।

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सर्वे के दौरान जब राजस्व निरीक्षकों की टीम सरकूलर रोड पर पहुंची तो लिस्ट के अनुसार दर्शाये गये स्थानों पर यूनीपोल का भौतिक सत्यापन शुरू किया गया। ऐसे में लिस्ट और स्वीकृति पत्रावली में एक विज्ञापन एजेंसी का जो यूनीपोल सरकूलर रोड पर आवास विकास कालोनी शाकुन्तलम के बाहर स्थित दर्शाया गया था, वो मौके से नदारद मिला। इसकी तलाश की गयी तो यह पोल जीआईसी मैदान के आसपास लगा पाया गया, यानि की पत्रावली में कर विभाग ने स्वीकृति आवास विकास के सामने दी थी, लेकिन विज्ञापन एजेंसी ने लिपिकों के साथ मिलकर अपना यूनीपोल जीआईसी मैदान के सामने गाड़ दिया, जो पूरी तरह से अवैध है। ऐसे ही होर्डिंग के स्थानों में भी फेरबदल पाया गया है। इसको लेकर राजस्व निरीक्षकों ने अपनी रिपोर्ट दी है। कर अधीक्षक नरेश शिवालिया ने बताया कि ईओ के आदेश पर अवैध होर्डिंग चिन्हित करने के लिए सर्वे का काम पूरा करा लिया गया है। करीब एक हफ्ते सर्वे का काम हुआ है। इसके साथ ही मुम्बई हादसे के बाद शहरी क्षेत्र में सरकारी, गैर सरकारी और मार्किट के भवनों की छतों पर लगे रूफटॉप होर्डिंग का सर्वे भी पूर्ण हो चुका है। राजस्व निरीक्षकों ने अपनी अपनी रिपोर्ट उपलब्ध करा दी है। रिपोर्ट का परीक्षण कर अवैध होर्डिंग व यूनीपोल आदि की लिस्ट तैयार कराई जा रही है। इसके बाद एक संयुक्त रिपोर्ट ईओ को सौंपी जायेगी।

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