ईओ की गाड़ी, फर्जी एफडीआर पर कमिश्नर ने बैठाई जांच

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में चल रहे फर्जी एफडीआर, ईओ की गाड़ी और कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका गायब होने के साथ ही अन्य मामलों के आरोप प्रत्यारोप और जांच के दौर के बीच अब नया तड़का लगा है। इन मामलों में चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप को गंभीर अनियमितता में फंसाने की साजिश का आरोप लगाते हुए सभासद उनके समर्थन में अडिग हो गये हैं और कर्मचारी संगठन की बैठक में उठे शपथ पत्र के प्रकरण में सभासदों ने शपथ पत्र के साथ कमिश्नर सहारनपुर को नये सिरे से शिकायत की, जिसको गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर ने डीएम को पत्र भेजकर आरोपों के सम्बंध में बिन्दूवार जांच कराकर एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिये हैं। इसमें कमिश्नर ने भी चेयरपर्सन को फंसाने की साजिश होने की शिकायत पर गंभीरता दिखाई है। इससे पालिका में अब नई हलचल शुरू हुई है।

नगरपालिका के वार्ड 25 से सभासद भाजपा नेता राजीव शर्मा ने पालिका में निर्माण विभाग के टैण्डर में फर्जी एफडीआर लगाने, बॉडी वॉर्न कैमरों के गायब होने, कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका गायब होने और ईओ द्वारा गाड़ी का प्रयोग करने के मामले में शिकायत की थी, जिसके बाद स्वायत्त शासन कर्मचारी संगठन के प्रांतीय उपाध्यक्ष निर्माण लिपिक ओमवीर सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों के एक गुट ने सभासद राजीव शर्मा के खिलाफ मोर्चाबंदी की। इसमें संगठन ने ऐतराज जताया कि शासनादेश के अनुसार शपथ पत्र पर शिकायत को ही जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इसी को लेकर 26 जुलाई को सभासद राजीव शर्मा ने कमिश्नर सहारनपुर हृषिकेश यशोद भास्कर को शपथ पत्र पर बिन्दूवार शिकायत करते हुए जांच कराये जाने का आग्रह किया था। बताया गया है कि निर्माण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप को साजिशन फंसाने के आरोपों को कमिश्नर सहारनपुर ने गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी को जांच के आदेश दिये हैं।

कमिश्नर सहारनपुर ने डीएम को भेजे अपने पत्र में कहा कि वार्ड 25 के सभासद राजीव शर्मा ने शिकायत की है कि नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर में कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा मिलीभगत कर तथा साठ-गाँठ करके वित्तीय अनियमिताएं की जा रही है। इनकी मंशा निर्वाचित अध्यक्ष को अनावश्यक रूप से फंसाने की है। अधिशासी अधिकारी बोर्ड में राजनीति करते हुये अपने लिये अंकन 25000 महावार एवं डीजल व 18 प्रतिशत जीएसटी पर कार किराये पर ली हुई है। राजनीतिवश इस आशय का प्रस्ताव अधिशासी अधिकारी द्वारा बोर्ड में रखकर पास करा लिया गया है। इस किराये की गाड़ी को वह अपने निजी कार्यों में प्रयोग करते हुये फर्जी ढंग से लॉगबुक भरवाने के कार्य में लिप्त है। इसमें कुछ अधिकारियों / कर्मचारियों द्वारा अध्यक्ष को भ्रमित एवं गुमराह करके उन्हें फंसाने का जाल बुना जा रहा है। कुछ कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा अपनी सेवा पुस्तिका अपने पास रखी हुयी है। सहायक अभियन्ता निर्माण एवं निर्माण लिपिकों के द्वारा निकाली गयी निविदाओं में फर्जी एफडीआर पूरे षडयन्त्र के तहत ठेकेदारों से सांठ-गांठ व मिलीभगत कर लगाकर पालिका को आर्थिक क्षति पहुँचाने के साथ धोखाधड़ी की गई। इसके अतिरिक्त भी कई अन्य तथ्यों की जाँच कराकर दोषियों पर कार्यवाही की मांग की गई है। कमिश्नर श्री भास्कर ने डीएम अरविन्द मल्लप्पा बंगारी को सभी तथ्यों की गहनता से जांच कराकर, निष्पक्ष और विधिक कार्यवाही उपरान्त एक सप्ताह के भीतर आख्या उपलब्ध कराने के आदेश दिये हैं।

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न कोई साजिश और न ही कोई अनियमितता हुईः डॉ. प्रज्ञा सिंह

मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् में शिकायतों को लेकर ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि यहां पर न तो किसी के खिलाफ कोई साजिश रची जा रही है और न ही कोई अनियमितता की गई है। ईओ ने कहा कि नगर पालिका के समस्त अधिकारी कर्मचारी अपनी अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप के साथ हैं, बिना अध्यक्ष की स्वीकृति या बिना अनुमति प्राप्त किये कोई कार्य नहीं किया जाता है। नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी सभी अधिकारी निभा रहे हैं। छोटी छोटी चीजों को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है, जिन कार्यों को बोर्ड सर्वसम्मति से नियमानुसार पारित कर चुका है, उनको मुद्दा बनाकर छवि धूमिल की जा रही है।

कमिश्नर की ओर से जांच आई है तो हम इसमें जिलाधिकारी के समक्ष अपना जवाब देने को तैयार हैं। इस जांच में पालिका की ओर से पूर्ण सहयोग किया जायेगा। निर्माण विभाग के द्वारा ही पालिका के प्रशासनिक कार्यों को करने के लिए गाड़ी किराये पर लेने का प्रस्ताव उनकी पोस्टिंग से पहले बोर्ड से पारित किया गया था और 20 जुलाई की बैठक में भी यह प्रस्ताव बोर्ड ने आम सहमति से पारित किया है। वो गाड़ी का उपयोग निजी स्तर पर नहीं कर रही, बल्कि पालिका के प्रशासनिक कार्यों, निरीक्षण और बैठकों में आने जाने के लिए किया जा रहा है। कांवड़ यात्रा में दौरान पालिका के जिम्मे 22 किलोमीटर का कांवड़ रूट था, इस पर पैदल भ्रमण नहीं किया जा सकता है। यहां पर व्यवस्था बनाने के लिए आवागमन को गाड़ी चाहिए। सेवा पुस्तिका प्रकरण में चेयरपर्सन ने जांच के आदेश दिये थे। इसमें अधिष्ठान लिपिकों से रिपोर्ट मांगी गई थी, जो प्रभारी कार्यालय अधीक्षक पारूल यादव के द्वारा चेयरपर्सन को प्रेषित कर दी गई, इसमें उनके स्तर से ही कार्यवाही की जानी है, उनको जो आदेश होगा उसको क्रियान्वित किया जायेगा।

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पालिका अफसरों पर भरोसा नहीं, अंतरविभागीय कमेटी गठित कर हो जांचः राजीव शर्मा

मुजफ्फरनगर। शिकायतकर्ता सभासद राजीव शर्मा ने कहा कि कर्मचारी संगठनों ने शासनादेश के अनुसार शिकायत नहीं होने के आरोप लगाये थे, हमने कमिश्नर सहारनपुर को शपथ पत्र के साथ शिकायत की है। हर शिकायत का हमारे पास साक्ष्य भी मौजूद है, जो जांच में उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के साथ हम जी जान से खड़े हैं, उनको फंसाने की कोई भी साजिश हम सफल नहीं होने देंगे। हमने जिलाधिकारी से मांग की है कि इन बिन्दुओं पर जांच अंतर विभागीय कमेटी का गठन करते हुए ही कराई जाये, क्योंकि पूर्व में दी गई शिकायतों पर पालिका स्तर से की जा रही जांच में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है। हमें पालिका स्तर से होने वाली जंाच में भरोसा नहीं है, इसलिए कमेटी बनाकर जांच होनी आवश्यक है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

मुझे किसी से खतरा नहीं, कोई साजिश नहीं कर रहाः मीनाक्षी स्वरूप

मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने सभासदों की शिकायत पर कमिश्नर द्वारा बैठाई गई जांच को लेकर पूरी तरह से पालिका के अधिकारियों और खासकर अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह का बचाव किया है। उन्होंने इस बात का जमकर खंडन किया कि उनके खिलाफ पालिका में किसी भी प्रकार की कोई साजिश चल रही है या उनको वित्तीय अनियमितता में फंसाने का खतरा है। पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि हमें जनता ने शहर के विकास के लिए चुना है और पहले ही दिन से हमने यही प्रयास किया कि सभी 55 वार्डों के सदस्यों को साथ लेकर सम्पूर्ण शहर का समग्र विकास किया जाये। पालिका में इन दिनों छोटे मोटे मतभेदों को बड़ा बनाया जा रहा है, जो सही नहीं है। हम पालिका को पूरी तरह से नियमानुसार चला रहे हैं। जहां तक ईओ को गाड़ी देने का सवाल है, वो उनके यहां आने से पहले ही निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर बोर्ड की सहमति से तय हुआ है। गाड़ी निर्माण विभाग की है, जो ईओ को आवश्यकतानुसार प्रदान की गई है।

उन्होंने कहा कि ईओ महिला हैं और उनकी एक साल की छोटी बच्ची भी है, जिसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी उनके पास है, ऐसे में एक मानवीय दृष्टिकोण भी बोर्ड को उनके साथ अपनाना चाहिए। वो गाड़ी का निजी प्रयोग नहीं कर रही है, प्रशासनिक कार्यों के लिए गाड़ी की आवश्यकता और अधिकार उनका है। हर प्रस्ताव पालिका अधिनियम के अन्तर्गत लाया गया है। छोटी मोटी गलती सुधारात्मक होनी चाहिए। हमें मिलकर शहर को सुन्दर और स्वच्छ बनाना है, इसके लिए आरोप प्रत्यारोप में उलझने से विकास प्रभावित होगा। जो शिकायत मिली हैं, हम भी उनकी जांच करा रहे हैं। फर्जी एफडीआर मामले में दोषी पाये गये चार ठेकेदारों के खिलाफ हमने एक्शन लिया और अगली निविदाओं से उनको वंचित रखा गया। सर्विस बुक वाले मामले में हमने जांच कराई है। इसमें भी आगामी दिनों में हम कार्यवाही करेंगे। पालिका के अधिकारी, कर्मचारी और सभासद सभी एक परिवार है। परिवार में छोटा मोटा विवाद रहता है, इसे बड़ा न बनाया जाये। उन्होंने सभासदों से अपील करते हुए कहा कि पालिका हम सभी की है, इसे साथ लेकर चलें और जनता के हित में विकास की आहुति देने का काम करें। सहभागिता सभी की होगी तो हम आसानी से शहर को विकास के शिखर तक ले जाने वाले साबित होंगे। 

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