कीर्ति भूषण से वसूली में जुटी पालिका को नहीं मिल रहा नया पता

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् के द्वारा 21 साल से पालिका मुख्यालय टाउनहाल परिसर में पालिका के क्वार्टर में अवैध रूप से रह रहे रिटायर्ड लिपिक कीर्ति भूषण से हाईकोर्ट इलाहाबाद के आदेश पर अपना भवन खाली तो करा लिया, लेकिन कीर्ति भूषण पर किराया राशि के रूप में बकाया रकम की वसूली को लेकर पालिका प्रशासन के हाथ पांव फूले हुए हैं, क्योंकि इस राजस्व वसूली को लेकर भी पालिका की ओर से हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया जाना है। पालिका के कर विभाग के रिकॉर्ड में कीर्ति भूषण का नया पता ही लापता हो गया है। लाख प्रयासों के बावजूद भी पालिका प्रशासन लापता कीर्ति भूषण को तलाशने में आज तक नाकाम नजर आ रहा है। ऐसे में पालिका की ओर से बकाया राशि की वसूली के लिए की जाने वाली रिकवरी की कार्यवाही भी अधर में अटक गई है, क्योंकि कीर्ति भूषण का कोई अता-पता पालिका को नहीं लग पा रहा है। ऐसे में पता बताने वाले को ईनाम देने की बात भी कही जाने लगी है। जो चर्चा का विषय बनी हुई है।

बता दें कि किसी जमाने में नगरपालिका परिषद् में कीर्ति भूषण का बड़ा भारी प्रभाव था। साल 2003 में वो रिटायर्ड हुए तो भी पालिका में उनकी कार्यशैली और दबंगता के किस्से आम बने रहे। वो रिटायर्ड होने के बाद भी टाउनहाल परिसर में बने पालिका के क्वार्टर में परिवार के साथ किरायेदार में रूप में रहते रहे, लेकिन कभी इसके लिए उन्होंने निर्धारित किराया पालिका को नहीं चुकाया। इतना ही नहीं पेंशन और अन्य देयकों का निर्धारण और भुगतान नहीं किये जाने के आरोप लगाते हुए साल 2018 में पालिका प्रशासन के खिलाफ कीर्ति भूषण ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में याचिका दायर कर दिया। यही कदम उनके गले की फांस बन गया। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान कीर्ति भूषण को पीड़ित मानते हुए हाईकोर्ट ने अपने 10 जुलाई 2018 के आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिये कि नगरपालिका मुजफ्फरनगर से कीर्ति भूषण को उनकी पेंशन और अन्य देयकों का पैसा 9 प्रतिशत ब्याज सहित अदा किया जाये।

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इस पर पालिका ने अपनी पैरवी को मजबूत किया तो नौबत कीर्ति भूषण से मकान खाली कराने तक आ गई। इसमें ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने 7 दिसम्बर 2024 को कर निर्धारिण अधिकारी दिनेश कुमार यादव को जांच सौंपी थी। उन्होंने 13 दिसम्बर को अपनी जांच आख्या ईओ को सौंप दी, जिसमें कीर्ति भूषण के आवास पर कब्जे को अवैध मानते हुए उनसे बकाया किराया राशि की वसूली करने की संस्तुति की गई। कर निर्धारण अधिकारी द्वारा उनके सेवानिवृत्ति वर्ष 2003 से 2024 के दिसम्बर तक किराया तय किया गया है, जो 46 लाख 21 हजार 488 रुपये बना है। इसमें उनका उपादान और पेंशन राशि का पालिका पर बकाया 16 लाख 98 हजार 500 रुपये है। यह राशि बकाया किराया से समायोजित करते हुए कीर्ति भूषण पर किराये के रूप में 29 लाख 22 हजार 988 रुपये पालिका के बकाया है, यह जांच रिपोर्ट ईओ को सौंपी गई तो उन्होंने वसूली नोटिस जारी करने के निर्देश दिये थे। कर निर्धारण अधिकारी द्वारा कीति भूषण को 31 दिसम्बर को नोटिस भेजकर 15 दिन में बकाया राशि जमा कराने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने अपने 07 जनवरी 2025 के आदेश में भी कीर्ति भूषण से बकाया राशि वसूली करने के लिए सख्ती से कहा और 10 मार्च को तय सुनवाई में पालिका प्रशासन को वसूली के लिए की गई कार्यवाही भी हाईकोर्ट में पेश करनी है।

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ऐसे में वसूली करना पालिका के कर विभाग के लिए अब किसी यक्ष प्रश्न से कम नहीं है, क्योंकि पालिका परिसर से क्वार्टर खाली करने के बाद पालिका प्रशासन के लिए कीर्ति भूषण लापता हो गये हैं। लाख प्रयास के बाद भी कीर्ति का अता-पता पालिका के हाथ नहीं लग पा रहा है। इसके लिए पालिका ने कुछ लोगों से सम्पर्क भी किया है और कीर्ति भूषण का पता लगाने में मदद भी मांगी है, लेकिन अभी तक के प्रयास विफल होते ही नजर आ रहे हैं। सीधे तौर पर कहा जाये तो कीर्ति भूषण पालिका के 29.22 लाख रुपये लेकर गायब हो गये हैं। कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव का कहना है कि कीर्ति भूषण को पालिका के द्वारा बकाया राशि वसूली के लिए नोटिस की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। वसूली के लिए अब रिकवरी की कार्यवाही की जानी है, लेकिन यहां से क्वार्टर खाली करने के दौरान उन्होंने अपना नया पता विभाग को उपलब्ध नहीं कराया, काफी प्रयासों के बावजूद भी विभाग को उनका पता नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए हमने विभागीय स्तर पर अपने प्रयास जारी रखे हैं, अन्य लोगों से भी जानकारी की जा रही है। पता बताने पर ईनाम भी देंगे। कीर्ति भूषण से बकाया राशि की वसूली हर हाल में की जायेगी। 

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