सीसामऊ-जहां सपा कर रही थी दोबारा चुनाव की मांग, वहीं मिली जीत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर अधिकांश पर भाजपा के प्रत्याशी बढ़त बनाये हुए हैं, लेकिन इन उपचुनाव में सबसे पहली जीत समाजवादी पार्टी के लिए आई है। मतदान के बाद पुलिस प्रशासन पर लगाये गये आरोपों के बीच सपा की ओर से जिस सीसामऊ सीट पर दोबारा चुनाव कराये जाने की मांग की जा रही थी, वहीं पर सपा ने भाजपा को करारा झटका दिया है। यहां पर अग्निकांड में जेल जाने के बाद हुई सजा में अपनी विधायकी गंवाने वाले सपा के विधायक इरफान सौलंकी के नाम का जलवा कायम रहा। खुद सीएम योगी ने यहां पर सपा के खिलाफ मजबूत प्रचार किया, लेकिन इसके बावजूद भी जनादेश इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी के पक्ष में आया और कांटे की टक्कर में सपा प्रत्याशी ने भाजपा को शिकस्त दी।

नसीम सोलंकी ने भाजपा के सुरेश को 8629 मतों से हराया

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सीसामऊ विधानसभा सीट पर एक बार फिर समाजवादी पार्टी ने विजय पताका फहराई है। इक समय ये सीट कांग्रेस का गढ़ रही है, लेकिन बीते 10 सालों में समाजवादी पार्टी ने यहां अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। इस सीट से सपा नेता इरफान सोलंकी लगातार तीन बार से चुनाव जीते, अग्निकांड में उनके जेल जाने के बाद यह सीट खाली हो गई, जिसके बाद चुनाव करवाए गए। इरफान सोलंकी के जेल जाने की वजह से सपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। पार्टी ने इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को चुनावी अखाड़े में उतारा। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी सुरेश अवस्थी को 8629 वोट से करारी मात दी। यहां सपा को 69,666 और भाजपा को 61,037 वोट मिले।

सीसामऊ सीट को बचाने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इधर, भाजपा ने भी सपा के इस अभेद्य किले पर कब्जा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन फिर भी उसे हार का सामना करना पड़ा है। यहां 20 नवंबर को वोटिंग हो हुई थी और शनिवार यानी 23 नवंबर को मतगणना हुई है। इस सीट के राजनीतिक महत्व का अंदाजा इतने से ही लगाया जा सकता है कि खुद अखिलेश यादव इस सीट पर प्रचार करने आए। तीन बार शिवपाल यादव, डिंपल यादव और अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद भी यहां पहुंचे। उधर, भाजपा की ओर से सीएम योगी आदित्यनाथ ने रोड शो और जनसभा की। वैसे तो सीएम योगी आदित्यनाथ कानपुर आते रहे हैं, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग रही। वह बड़े नेताओं से कम, आम लोगों से ज्यादा मिले। खुद बैठकर बूथ-सेक्टर, शक्ति केंद्र और तमाम मोर्चों के पदाधिकारियों से संवाद किया और हर हाल में सीट को जीतने की गणित बनाई।

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2012 से लगातार कायम है इरफान सोलंकी का जलवा

साल 2007 में सीसामऊ सीट कांग्रेस के संजीव दरियाबादी ने जीती थी। पहली बार साल 2012 में सपा के इरफान सोलंकी ने इस सीट को जीत कर सपा की झोली में डाला और 2022 तक अपनी स्थिति मजबूत करते हुए लगातार जीत दर्ज की। चूंकि 2022 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें आगजनी के एक मामले में जेल जाना पड़ा। ऐसे में रिक्त हुई सीट पर सपा ने उनकी पत्नी नसीम सोलंकी को टिकट दिया।

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राम मंदिर लहर में जीती भाजपा, 1996 के बाद नहीं मिली जीत

साल 1974 के चुनावों के दौरान पहली बार अस्तित्व में आई इस विधानसभा सीट पर पहले विधायक कांग्रेस के शिवलाल बने थे। हालांकि 77 के चुनाव में यह सीट जनता पार्टी के मोतीलाल ने झटक ली। 1980 में कांग्रेस ने वापसी की और 1980 व 1985 का चुनाव लगातार दो बार कमला दरियाबादी जीतीं। 1989 के चुनाव में यहां से जनता दल के टिकट पर शिवकुमार बेरिया विधायक चुने गए। इसके बाद 1991 से 1996 तक यह सीट तीन बार भाजपा के राकेश सोनकर ने जीत ली। उसके बाद से इस सीट पर भाजपा का खाता नहीं खुला है।

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