शब-ए-चेहल्लुम की मजलिस में गूंजा इंसानियत और इंसाफ का पैगाम

मौलाना जकी कासमी बोले— इमाम हुसैन की शहादत पूरी मानवता के लिए मिसाल

मुजफ्फरनगर। शब-ए-चेहल्लुम के अवसर पर शहर के मोहल्ला खालापार में आयोजित मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। धार्मिक आयोजन में इंसानियत, न्याय, सब्र और सत्य के संदेश पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। शिया धर्मगुरु मौलाना जकी कासमी ने कहा कि कर्बला की कुर्बानी किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरी मानवता को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

इसे भी पढ़ें:  नाबालिग से कुकर्म की शर्मनाक घटना को अंजाम देने वालों को भेजा जेल

मोहल्ला खालापार स्थित रोशन अली आरफी के आवास पर सोमवार रात आयोजित शब-ए-चेहल्लुम की मजलिस में मुजफ्फरनगर सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने शिरकत की। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई थीं। अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में गमगीन माहौल में इबादत, दुआ और मातमी रस्मों में हिस्सा लिया।

मजलिस का आगाज मर्सिया-ख्वानी से हुआ, जिसमें इब्राहिम आढ़ती ने कर्बला की दर्दनाक घटना और शहीदों की कुर्बानियों को मार्मिक अंदाज में पेश किया। इसके बाद मौलाना जकी कासमी ने अपने संबोधन में कहा कि हज़रत इमाम हुसैन ने सत्ता या व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि दीन, इंसाफ, सत्य और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान की। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन का पैगाम आज भी दुनिया को अमन, भाईचारे, न्याय और मानवता का रास्ता दिखाता है।
मौलाना जकी कासमी ने बताया कि सफर माह की 20 तारीख को मनाया जाने वाला चेहल्लुम, जिसे अरबईन भी कहा जाता है, हज़रत इमाम हुसैन की शहादत के 40वें दिन का स्मरण है। इस अवसर पर दुनिया भर में अकीदतमंद मजलिसों, मातमी जुलूसों और दुआओं के माध्यम से कर्बला के शहीदों को याद करते हैं तथा उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।

इसे भी पढ़ें:  5Gringo: Slots und Jackpot-Spiele im Überblick
Share This Article