MUZAFFARNAGAR-कचहरी और तहसील बंदी से हलकान हुए लोग

मुजफ्फरनगर। गाजियाबाद न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के साथ की गई मारपीट के विरोध में केन्द्रीय संघर्ष समिति के आहवान पर चल रहे अंादोलन की कड़ी में जनपद में अधिवक्ता मंगलवार को दूसरे दिन भी कामबंद हड़ताल पर रहे। इस दौरान कचहरी और तहसील में कामकाज नहीं हेाने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आज भी जिला एवं सिविल बार संगठन से जुड़े अधिवक्ताओं ने कचहरी के मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही पुरजोर मांग की गई।

अधिवक्ताओं के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला बार संघ अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि देश के इतिहास में पहली घटना है, जब किसी न्यायालय परिसर में पुलिस पहुंची और पुलिस कर्मियों ने कोर्ट रूम के बाहर ही अधिवक्ताओं के साथ मारपीट की। इस प्रकरण में अवमानना का मामला सिर्फ अधिवक्ताओं पर ही लागू नहीं होता। जिला जज पर भी अवमानना का केस किया जाए और इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि कोर्ट परिसर में पहुंची पुलिस को किसने बुलाया था। यदि पुलिस बिना लिखित आदेश के पहुंची तो गाजियाबाद के पुलिस विभाग के आला अफसरों पर भी कार्यवाही की जानी चाहिए। सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि इस संघर्ष में समस्त अधिवक्ता साथ हैं और एकजुट हैं, जब तक गाजियाबाद के प्रकरण में वकीलों को न्याय नहीं मिल जाता, हम संघर्ष को जारी रखेंगे। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विधिक कार्यवाही करने की मांग भी उठाई। बता दें कि कुछ दिन पहले गाजियाबाद कोर्ट में जिला जज और वकीलों के बीच केस की सुनवाई के दौरान झड़प हुई थी। इस दौरान वहां पर प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं पर पुलिस कर्मियों ने बल का प्रयोग किया था। इस घटना के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया गया और वेस्ट यूपी के सभी जनपदों के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता भी हड़ताल पर हैं।

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आज दूसरे दिन के प्रदर्शन के दौरान जिला बार संघ के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी, सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजेन्द्र सिंह मलिक, जिला बार संघ के महासचिव सुरेंद्र मलिक, सिविल बार महासचिव अशोक कुशवाहा, अशोक चौहान, अनिल जिंदल, जितेंद्र कुमार, जितेंद्र पाल सिंह, डा. मीरा सक्सेना, ओमकार तोमर, प्रवीण कुमार खोखर, सौरभ पंवार, आदेश कुमार, अश्वनी शर्मा, राकेश पाल, ललित पंवार सहित सैंकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे। वहीं तहसील सदर में भी अधिवक्ताओं की कलमबंद हड़ताल होने के कारण वहां कामकाज ठप रहा। दो दिनों से सम्पत्ति रजिस्ट्री नहीं होने से लोग परेशान नजर आये। काफी संख्या में लोग तहसील में पहुंचे और हड़ताल की जानकारी होने पर वापस लौटना पड़ा। 

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