दलित-पिछड़े समीकरण पर मीरापुर उपचुनाव लड़ेगी भाजपा

मुजफ्फरनगर। मीरापुर सीट पर उपचुनाव को लेकर भले ही भाजपा के द्वारा गठबंधन धर्म निभाकर यहां रालोद को लड़ने का मन बनाने की खबरों ने जोर पकड़ा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद उपचुनाव वाली नौ सीटों के साथ ही मीरापुर सीट पर भी चुनाव प्रचार से लेकर बूथ प्रबंधन तक भाजपा कहीं भी चूक करने को तैयार नहीं है। भाजपा ने यहां पर दलित-पिछड़े समीकरण के आधार पर अपनी चुनावी रणनीति तैयार की है। इसके साथ ही हरियाणा और जम्मू कश्मीर में हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपनाई गई बंटोगे तो कटोगे की सियासी रणनीति को भी यूपी उपचुनाव में अपनाने की तैयारी है।

यूपी में दस में से नौ विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में भाजपा पूरी तरह से सक्रिय और सतर्क है। लोकसभा चुनाव में यूपी से उम्मीदों के आधार पर परिणाम नहीं मिलने के बाद हरियाणा की जीत से भाजपा को संजीवनी मिली है और अब यूपी उपचुनाव में भाजपा जीत सुनिश्चित करने के लिए ऐडी चोटी का जोर लगाये हुए हैं। इसमें मुजफ्फरनगर जिले की मीरापुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में भले ही चुनाव लड़ने का अधिकार भाजपा द्वारा एडीएम गठबंधन में सहयोगी दल रालोद के मुखिया जयंत चौधरी को दिये जाने की बात पूरे दावे के साथ कहीं जा रही है, लेकिन इसके बावजूद भी भाजपा इस सीट के चुनाव के प्रबंधन में अपनी पकड़ को ढीला छोड़ने को तैयार नहीं है। भाजपा की ओर से उपचुनाव वाली प्रत्येक सीट पर तीन-तीन मंत्रियों को प्रभारी बनाया गया है। मीरापुर सीट पर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. सोमेन्द्र तोमर, कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री केपी मलिक को प्रभारी बनाया गया है। मीरापुर सीट के उपचुनाव को भाजपा ने कितनी गंभीरता से लिया है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों में भाजपा के विभिन्न कार्यक्रमों और सरकार की योजनाओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसी क्षेत्र के शुकतीर्थ से आगे बढ़ाने के लिए जनसभा की गई। सीएम योगी के साथ ही पिछड़ों को साधने के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और दलितों को लुभाने के लिए योगी सरकार में समाज कल्याण मंत्री असीम अरूण तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार के कार्यक्रम भी कराये जा चुके हैं।

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अब सीएम योगी ने यूपी उपचुनाव को लेकर प्रचार से प्रबंधन तक की पार्टी की नीति साफ करने के लिए प्रत्येक सीट के लिए बनाये गये तीन-तीन प्रभारियों के साथ शनिवार को अपने आवास पर मीटिंग करते हुए रणनीति तय की। इस रणनीति में यूपी उपचुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए दलित और पिछड़ों को भाजपा के साथ लाने की कोशिश पर बल दिया गया है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में उपचुनाव वाली नौ सीटों पर जातिगत समीरण के आधार पर प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी चर्चा की गई और चुनाव प्रचार तथा बूथ प्रबंधन के विषय में पार्टी की नीतियों को स्पष्ट करते हुए काम करने पर बल दिया गया है। इस बैठक में आने वाले 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई, इसमें यही कहा गया कि कैसे आने वाले चुनावों में दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों को अधिक से अधिक अपने पाले में किया जाए। प्रभारियों को कहा गया कि वो कार्यकर्ताओं के साथ उपचुनाव में जनता के बीच जायें और दलितों तथा पिछड़ों के साथ ही सर्वसमाज में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में प्रचार किया जाये। साथ ही चुनाव प्रचार को बंटोगे तो कटोगे के फार्मूले पर ही आधारित रखने पर भी सहमति बनी है ताकि हिन्दुओं को पार्टी के पक्ष में एकजुट किया जा सके। 

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