मीरापुर सीट से दावेदारी कर रहे जिलाध्यक्ष जिया चैधरी ने हाईकमान को भेजा अपना इस्तीफा, नए जिलाध्यक्ष के ऐलान का इंतजार
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करने और टिकट वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी जिलाध्यक्ष विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं, उन्हें पहले अपने संगठनात्मक पद से इस्तीफा देना होगा। इस नई व्यवस्था के तहत मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष जिया चैधरी एडवोकेट समेत प्रदेश के चार जिलाध्यक्षों ने टिकट की दावेदारी के साथ इस्तीफे का प्रस्ताव हाईकमान को भेज दिया है। मुजफ्फरनगर में अब नए जिलाध्यक्ष का ऐलान हो सकता है, इसका सभी को इंतजार है।
समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन और सियासत में अनुशासन कायम करने के उद्देश्य से नया फार्मूला लागू किया है। पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि जो जिलाध्यक्ष विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार होंगे, उन्हें पहले अपने संगठनात्मक पद का त्याग करना होगा। इस निर्णय का उद्देश्य टिकट को लेकर होने वाली अंदरूनी खींचतान को कम करना और संगठनात्मक निष्पक्षता बनाए रखना है। इस नई व्यवस्था की अग्निपरीक्षा में मुजफ्फरनगर के समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष जिया चैधरी एडवोकेट का नाम भी शामिल हो गया है। मीरापुर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे जिया चैधरी ने इस्तीफे का प्रस्ताव पार्टी हाईकमान को भेज दिया है। हालांकि अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है और वह नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति तक संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व अन्य सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में टिकट को लेकर पार्टी के भीतर दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। दो अप्रैल को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश के सभी 75 जिलाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि कोई जिलाध्यक्ष किसी विधानसभा सीट से टिकट चाहता है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा। इसके बाद पार्टी जो निर्णय करेगी, उसे स्वीकार करना होगा।
सूत्रों के अनुसार अब तक चार जिलाध्यक्षों ने टिकट की दावेदारी के साथ इस्तीफे का प्रस्ताव भेजा है। इनमें कानपुर ग्रामीण के जिलाध्यक्ष मुनीन्द्र शुक्ला, जो बिठूर सीट से दावेदार हैं, वाराणसी कैंट से सपा महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष रीबू श्रीवास्तव, बरेली की बिथरी चैनपुर सीट से बरेली जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप और मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष जिया चैधरी के नाम शामिल हैं। समाजवादी पार्टी इससे पहले वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इसी फार्मूले को लागू कर चुकी है। उस समय प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल से इस्तीफा लेकर उन्हें फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया था, जहां उन्होंने जीत दर्ज की थी। इसके बाद श्यामलाल पाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।
जिया चैधरी मूल रूप से अमरोहा जनपद के निवासी हैं और उनकी परवरिश मुजफ्फरनगर में हुई है। उन्होंने डीएवी कॉलेज, मुजफ्फरनगर से शिक्षा प्राप्त की और छात्र जीवन से ही समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे। आठ अप्रैल 2023 को उन्हें निकाय चुनाव से पूर्व पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। निकाय चुनाव में उनके नेतृत्व में सपा ने अच्छा प्रदर्शन किया। जिया चैधरी लंबे समय से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। वर्ष 2017 में उन्होंने चरथावल विधानसभा सीट से टिकट मांगा था। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने मीरापुर सीट से दावेदारी की थी, लेकिन गठबंधन के तहत टिकट चंदन चैहान को मिला। इसके बाद इस सीट पर चंदन के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में भी उन्होंने दावेदारी की, मगर पार्टी ने पूर्व सांसद कादिर राणा की पुत्रवधु सुम्बुल राणा को प्रत्याशी बनाया था। अब वह एक बार फिर वर्ष 2027 के लिए मीरापुर सीट से टिकट मांग रहे हैं।
जिया चैधरी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2027 के लिए टिकट का आवेदन हाईकमान को भेज दिया है और इस्तीफे का प्रस्ताव भी सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी यदि निर्देश देती है तो वह पद छोड़ने को पूरी तरह तैयार हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार पार्टी उन्हें मीरापुर से मौका देगी। सपा जिला मीडिया प्रभारी साजिद हसन ने बताया कि यह व्यवस्था पार्टी नेतृत्व द्वारा तय की गई है। जो भी जिलाध्यक्ष टिकट मांगेगा, उसे पद छोड़ना होगा। जिया चैधरी का प्रस्ताव उनके इस्तीफे के साथ हाईकमान के पास है और चुनाव से पहले नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति की संभावना है।






