सीकर/अयोध्या। अयोध्या साइबर पुलिस रिश्वत मामले में राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार को सीकर में एक उपनिरीक्षक और तीन कांस्टेबलों को गिरफ्तार किया। एसीबी का दावा है कि अयोध्या के साइबर अपराध थाने में दर्ज मामले से एक व्यक्ति का नाम हटाने के बदले 2.80 लाख रुपये लिए गए। कार्रवाई के बाद अयोध्या एसएसपी ने चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच बैठा दी है।
क्या है पूरा मामला
एसीबी के अनुसार गिरफ्तार पुलिसकर्मियों की पहचान उपनिरीक्षक यशवंत सिंह, कांस्टेबल पवन कुमार त्रिपाठी, सोहनलाल और गौरव चारग के रूप में हुई है। चारों की तैनाती अयोध्या जिले के साइबर अपराध थाने में बताई गई है।
शिकायतकर्ता ने एसीबी को बताया था कि उसके भाई से संबंधित वर्ष 2024 का एक मामला अयोध्या के साइबर अपराध थाने में दर्ज है। आरोप है कि मामले से उसके भाई का नाम हटाने के बदले पुलिसकर्मियों की ओर से रिश्वत मांगी जा रही थी।
शिकायत मिलने पर राजस्थान एसीबी ने 17 अगस्त को रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया। एसीबी के मुताबिक सत्यापन के दौरान कांस्टेबल गौरव चारग ने शिकायतकर्ता से चार लाख रुपये मांगे। बातचीत के बाद कथित रिश्वत की रकम 2.80 लाख रुपये तय हुई।
सीकर में एसीबी ने बिछाया जाल
मांग के सत्यापन के बाद सीकर एसीबी की टीम ने 18 अगस्त को ट्रैप की योजना बनाई। ब्यूरो का दावा है कि कांस्टेबल सोहनलाल ने उपनिरीक्षक यशवंत सिंह तथा कांस्टेबल पवन कुमार त्रिपाठी और गौरव चारग की मौजूदगी में शिकायतकर्ता से 2.80 लाख रुपये लिए।
इसके बाद एसीबी ने चारों पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेकर कथित रिश्वत की रकम बरामद कर ली। कार्रवाई जयपुर एसीबी के अधिकारियों के पर्यवेक्षण में सीकर इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय कुमार के नेतृत्व में की गई।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार रकम लेने के बाद चारों पुलिसकर्मी कार से उत्तर प्रदेश लौट रहे थे। सीकर-बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रसीदपुरा टोल के पास एसीबी टीम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। आरोप है कि कार सवार पुलिसकर्मियों ने एसीबी के वाहन को टक्कर मारकर निकलने की कोशिश की, लेकिन टीम ने पीछा कर उन्हें पकड़ लिया। वाहन से टक्कर वाले घटनाक्रम की विस्तृत जांच भी की जा रही है।
चारों पुलिसकर्मी निलंबित
राजस्थान में गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर ने उपनिरीक्षक यशवंत सिंह और तीनों कांस्टेबलों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। चारों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई है। रिश्वत के आरोपों पर अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा। गिरफ्तार पुलिसकर्मियों का पक्ष फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
अब आगे क्या होगा
राजस्थान एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर चारों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। कथित रिश्वत की मांग, रकम के लेन-देन और अयोध्या में दर्ज मूल साइबर अपराध मामले में प्रत्येक पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच की जा रही है।
आरोपियों को सक्षम अदालत में पेश करने, पुलिस या न्यायिक हिरासत और दर्ज धाराओं की विस्तृत जानकारी प्रतीक्षित है। अयोध्या पुलिस की विभागीय जांच भी एसीबी की कार्रवाई से अलग चलेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
