राणा हाउस पर छापाः शाहनवाज और नूर सलीम को समन भेजेगी ईडी

दो राज्यों के तीन जिलों में पड़े छापों में 11 ठिकानों से 3.80 करोड़ रुपये नकद बरामद, पूर्व विधायक शाहनवाज राणा की कंपनी ने सरकार को लगाया 27 करोड़ से ज्यादा का चूना

लखनऊ। जीएसटी चोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापे के दौरान सभी ठिकानों से करीब 3.80 करोड़ रुपये नकदी बरामद की है। इसके साथ ही करोड़ों रुपये के जेवरात भी ईडी की टीम ने जब्त किए हैं। साथ ही तमाम ऐसे संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं जो लंबे समय से फर्जी बिलिंग के जरिये जीएसटी चोरी करने से संबंधित हैं। ईडी की छापे की कार्रवाई करीब 24 घंटे बाद मंगलवार सुबह समाप्त हो गई। अब सभी आरोपियों को सितंबर माह के पहले सप्ताह में समन भेजकर पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।

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ईडी ने सोमवार को मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में आरोपियों के 11 ठिकानों पर छापा मारा था। इनमें मुख्य रूप से पूर्व बसपा विधायक और वर्तमान में आजाद समाज पार्टी के नेता शाहनवाज राणा और उनके करीबी परिजन, स्टील कारोबारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि शामिल थे। ईडी ने शाहनवाज राणा आदि पर वर्ष 2024 में पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के चाचा पूर्व सांसद एवं सपा नेता कादिर राणा की वहलान चौक स्थित राणा स्टील फैक्ट्री पर पड़े जीएसटी के छापे में पकड़ी गई टैक्स चोरी और एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की है।

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ईडी के अधिकारियों के अनुसार पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के खिलाफ की गई इस जांच में सामने आया कि बिना कोई सामान लिए फर्जी बिल काटकर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया और उसे आगे बढ़ाया गया। इससे सरकारी खजाने को 27.02 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कंपनी ने फर्जी आईटीसी हासिल करने और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहले से योजना बनाकर जाली बिल्टी (ट्रांसपोर्ट रसीदें) तैयार की थीं।
वहीं कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान अस्तित्वहीन और फजी्र कंपनियों की एक चेन के जरिये लगभग 10.28 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी लिया और आगे बढ़ाया। इसका फायदा उठाने वाली फर्मों से मिले पैसे को उसी दिन ऐसी ही फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया। बाद में उसे कई अकाउंट्स के जरिये डायवर्ट करने के बाद अंत में नकद निकाल लिया गया। छापे के दौरान ईडी ने दस्तावेजों का विश्लेषण करने के साथ आरोपियों के बयान भी दर्ज किए हैं। इससे सामने आया है कि फर्जी आईटीसी का नेटवर्क ऐसी कई अन्य यूनिट्स तक फैला हुआ है। ईडी बरामद दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस की गहनता से पड़ताल कर रहा है।

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