आज़म ख़ान का दर्द: “रात 3 बजे उठाया गया, लगा एनकाउंटर होने वाला है”

लखनऊ। सपा नेता आज़म ख़ान ने अपने हालिया इंटरव्यू में जेल जीवन के दौरान झेले गए डर और तकलीफ़ों को बेहद भावनात्मक अंदाज़ में साझा किया। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल को दिए एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्हें एक रात अचानक साढ़े तीन बजे सोते से उठाया गया। उस वक्त उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला को जेल से बाहर अलग-अलग गाड़ियों में बैठाया जा रहा था। बाहर एनकाउंटर की ख़बरें सुनकर उन्हें लगा कि शायद अब उनकी ज़िंदगी का अंत आने वाला है। उन्होंने कहा — “मैंने बेटे को गले लगाया और कहा, अगर ज़िंदगी रही तो मिलेंगे, नहीं रही तो ऊपर मिलेंगे।”

अक्टूबर 2023 में रामपुर से आज़म ख़ान को सीतापुर जेल और उनके बेटे अब्दुल्ला को हरदोई जेल भेजा गया था। आज़म ने बताया कि जेल की कोठरी फांसीघर जैसी थी, जहाँ न खिड़की थी, न हवा। उन्होंने कहा कि वे 23 महीने तक बेटे के साथ एक अंधेरे कमरे में रहे और रातभर सांप-बिच्छुओं से बचने के लिए लाठी लेकर जागते रहते थे। उनकी पत्नी तंजीन फातिमा जेल में गिर गईं और उनकी हंसली टूट गई, मगर इलाज वहीं कराया गया।

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उन्होंने बताया कि 2017 में उन्हें, पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया गया था। तीनों को एक ही जेल में रखा गया था, जिससे थोड़ी राहत थी कि वे एक-दूसरे के पास हैं। लेकिन कुछ ही समय बाद आदेश आया कि उन्हें अलग-अलग जेलों में भेजा जाएगा। रात तीन बजे जब अधिकारियों ने दरवाज़ा खटखटाया तो उन्हें डर लगा कि शायद ये आखिरी रात है। वे बोले, “जब तक मुझे ये पता नहीं चला कि अब्दुल्ला जिंदा है, तब तक वो रात और अगला दिन बहुत भारी गुज़रा।”

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आज़म ख़ान ने कहा कि उनका एकमात्र गुनाह यह था कि उन्होंने रिक्शा चालकों और बीड़ी बनाने वालों के बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाना चाहा। “जोहर यूनिवर्सिटी के पीछे मेरी वही सोच थी, जो सर सैयद अहमद ख़ान की थी। फर्क बस इतना है कि सर सैयद को ‘सर’ का खिताब मिला, और मुझे नारा मिला — जो आज़म का सर लाएगा वही रामभक्त कहलाएगा।”

उन्होंने कहा कि मंत्री बनने के बाद सियासत ने उन्हें अपराधी बना दिया। “अब राजनीति वोट मांगने की नहीं, वोट छीनने की हो गई है। मेरे परिजनों, सहयोगियों, और यहां तक कि बूढ़ी मां व बहन तक पर केस कर दिए गए। पुलिस हर बार शादियों में पहुंचकर कहती कि तिजोरी चोरी हुई है। बाराती डरकर भाग जाते थे। अब सिर्फ अदालतें ही लोकतंत्र की आखिरी उम्मीद हैं।”

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आज़म ख़ान ने कहा कि उनके खिलाफ 94 से ज़्यादा मुकदमे दर्ज हैं। सभी में ज़मानत मिल चुकी है, लेकिन हर बार नई धाराएं जोड़ दी जाती हैं ताकि जेल में रोका जा सके। उन्होंने कहा कि एक केस में उन पर ‘पायल’ और ‘मुर्गियां’ चोरी करने का आरोप लगाया गया, दूसरे में ‘शराब की दुकान लूटने’ का। “डिब्बे खुले तो उनमें सस्ता सामान निकला, मगर बदनाम मुझे किया गया,” उन्होंने तंज कसते हुए कहा।

इंटरव्यू के अंत में आज़म ख़ान भावुक हो गए और एक शायरी पढ़ी —

 “इस दिल के टुकड़े हज़ार हुए,

कोई यहां गिरा, कोई वहां गिरा।”

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