वन स्टॉप सेंटर प्रबंधक ने नौकरी के नाम पर की ठगी

मुजफ्फरनगर। पीड़ित महिलाओं को कानूनी आश्रय देने के लिए बनाये गये वन स्टॉप सेंटर के नाम पर महिलाओं का ही आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। यह सेंटर लगातार विवादों में बना हुआ है। अब वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक पर महिला कल्याण विभाग के अधीन सेंटर पर ही स्मार्ट पर्सन के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर एक महिला ने ठगी करने और फिर धमकाने के आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। महिला ने डीएम से प्रकरण की जांच कर कार्यवाही करने की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र भी दिया है।

शहर के मौहल्ला गंगारामपुरा निवासी दीपा रानी पत्नी अमित पाल अपनी सास और अन्य महिलाओं बोबी व प्रीति आदि के साथ गुरूवार को कलेक्ट्रेट स्थित जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय पर पहुंची और जमकर हंगामा किया। दीपा ने आरोप लगाया कि वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक पूजा नरूला ने उसके साथ ठगी की है और अब वो उसको धमकी भी दे रही है। इसी को लेकर आज वो उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए यहां आई है। इस दौरान कार्यालय में दीपा की कर्मचारी के साथ बहस भी हुई। इसी बीच दीपा ने जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र भी दिया है। इसमें उसने बताया कि वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक पूजा नरूला उसके मकान में बतौर किराएदार रही थी, इसी बीच उसकी जान पहचान गहरी हो गई। इस दिन पूजा ने उसे और उसकी सास को विश्वास में लेकर कहा कि महिला कल्याण विभाग में वन स्टॉप सेंटर पर स्मार्ट पर्सन के पद पर भर्ती निकल रही है, यहां के सेंटर पर भी महिलाओं को रखा जाना है और भर्ती विज्ञापन दिखाते हुए भरोसा दिया कि तीन लाख रुपये के खर्च में वो यह नौकरी दीपा को दिलवा सकती है। दीपा का आरोप है कि पूजा के झांसे में आने के बाद उसने डेढ़ लाख रुपये नकद उसको दे दिये और शेष रकम बाद में देने का वादा हुआ, जिसकी सिक्योरिटी के नाम पर पूजा ने एक बैंक चेक दीपा से लिया था।

दीपा का कहना है कि पूजा द्वारा भर्ती की बात की पुष्टि करने के लिए वो जिला प्रोबेशन कार्यालय भी गई थी और वहां पर महिला एवं बाल कल्याण संरक्षण अधिकारी नीना त्यागी से मिलकर पूछताछ की थी, उन्होंने भी बताया था कि विभाग में स्मार्ट पर्सन के लिए भर्ती निकली और यह अच्छी नौकरी है। इसके लिए आवेदन कर दो, इसके बाद दीपा ने आवेदन कर दिया था, लेकिन उसकी नौकरी नहीं लगी, जबकि आठ अन्य लोगों को नौकरी मिल गई। आरोप है कि जब नौकरी नहीं लगने पर पूजा से दीपा ने डेढ़ लाख रुपये वापस मांगे तो उसे धमकाया गया। बाद में उस पर झूठे मुकदमे लगवाकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। महिला ने परिजनों के साथ मिलकर मामले को लेकर हंगामा किया। इसी बीच जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार से भी बात करने का प्रयास किया, लेकिन वो हंगामा होने पर अपने कार्यालय से उठकर चले गये और मीडिया कर्मियों को आरोपों को लेकर भी जवाब नहीं दिया। दीपा ने डीएम से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर कार्यवाही करते हुए उसके पैसे वापस दिलाये जाने की मांग की है। 

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