कटरा भूस्खलन में मारे गए मुजफ्फरनगर के सात तीर्थयात्रियों की अर्थियां, गमगीन परिजन और शोकसभा का माहौल

वैष्णो देवी हादसाः तीन घरों से उठी छह अर्थियां, रो पड़ा पूरा शहर

कटरा में हुए भूस्खलन में मुजफ्फरनगर में चार परिवारों के सात तीर्थयात्रियों की मौत से छाया शोक

चार दिन बाद ताबूत में लौटे पोतों के शव देखकर बिलख पड़े दादा, मां से लिपटकर बेतहाशा रोई बेटियां

मुजफ्फरनगर। जम्मू कश्मीर के कटरा में माता वैष्णो देवी की यात्रा पर गये प्रजापति समाज के 23 लोगों के साथ हुए हादसे की एक भयावह तस्वीर शनिवार को सामने आई। शहर के दक्षिणी रामपुरी में तीन घरों से जब छह तीर्थयात्रियों की अर्थियां लोगों के कंधों के सहारे उठी तो पूरा शहर ही गमगीन नजर आया। परिजनों में कोहराम था और हर आंख नम तथा दिल इन परिवारों के विलाप को देखकर भावुक हो गया था। बेहद गमगीन माहौल में सभी छह लोगों का हजारों लोगों की मौजूदगी में शहर श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान राजनीतिक दलों के लोगों ने पहुंचकर मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त कर परिजनों से मिलकर उनका दुख बांटने का प्रयास किया और संकट की इस घड़ी में हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

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वैष्णो देवी यात्रा के दौरान हादसे में मारे गए सात तीर्थयात्रियों की अर्थियों को कंधा देते लोग

जम्मू कश्मीर के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी पर इस बार आई आपदा ने मुजफ्फरनगर के कई परिवारों को जीवन भर का एक दर्द दे दिया। वैष्णो देवी पर 26 अगस्त के दिन हुए भूस्खलन में इस जिले के सात तीर्थयात्रियों की मौत होने की खबर अब तक आ चुकी है। अभी वहां पर कई लोग लापता हैं और कई गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं। परिजन चाहकर भी उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। शनिवार को इस आपदा का एक भयावह चेहरा एक बार फिर से ताजा हुआ, जब शहर के मौहल्ला दक्षिणी रामपुरी में डबल टंकी रोड पर रहने वाले प्रजापति समाज के तीन परिवारों के छह तीर्थयात्रियों के शव घरों में पहुंचे।


दक्षिणी रामपुरी निवासी 55 वर्षीय धर्मवीर सिंह चार परिवारों के 23 लोगों के साथ 25 अगस्त को जम्मू तवी एक्सप्रेस ट्रेन से माता वैष्णो देवी की यात्रा करने के लिए निकले थे। इस दल में 12 बच्चे भी शामिल थे। ये लोग 26 अगस्त को अर्धकुमारी से माता धाम पहुंचने के लिए चढ़ाई कर ही रहे थे कि अचानक भूस्खलन हो जाने से पानी के साथ मलबा नीचे आ गया। इसमें न जाने कितने तीर्थयात्री दब गये। इसी में धर्मवीर के साथ गये दल के लोग भी शामिल रहे। इस दल में शामिल रहे दो मासूम भाई अनंत कुमार (10) और दीपेश कुमार उर्फ डमरू (8) पुत्रगण अजय प्रजापति, रामबीरी देवी (49) पत्नी इन्द्रपाल प्रजापति, अंजलि (22) पुत्री इन्द्रपाल प्रजापति, मन्तेश उर्फ ममता (43) पत्नी रविन्द्र सिंह, आकांक्षा (16) पुत्री रविन्द्र सिंह की मौत हो गई। बुधवार की देर रात करीब 11 बजे धर्मवीर ने ही अस्पताल से फोन कर मुजफ्फरनगर में इसकी सूचना दी। हादसे के चार दिन बाद शनिवार की सुबह करीब छह बजे सभी छह मृतक तीर्थयात्रियों के शव दक्षिणी रामपुरी पहुंचे तो कोहराम मच गया।

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दादा देशराज प्रजापति अपने मासूम पोतों के शवों से लिपटकर बिलख पड़ा तो रामबीरी और मन्तेश की बेटियां अपनी माताओं और बहनों के शवों पर विलाप करती रही। पूरा मौहल्ला इस गम में शामिल रहा। यहां से करीब साढ़े सात बजे रविन्द्र, इन्द्रपाल और देशराज के घरों से छह तीर्थयात्रियों की अर्थियां उठी तो पूरा शहर ही रो पड़ा। अर्थियों के पीछे तक परिजन भागते रहे। हर आंख नम नजर आई। इसके बाद सभी छह शवों को काली नदी रोड स्थित शहर श्मशान घाट ले जाया गया। यहां पर बेहद गमगीन वातावरण में रविन्द्र सिंह और इन्द्रपाल ने अपनी पत्नियों और बेटियों की चिताओं को मुखाग्नि दी तो वहीं बुजुर्ग देशराज ने अपने हाथों से बाल शव गृह में मासूम अनंत और दीपेश के शवों को सुपुर्दे खाक कर दिया। सोमवार को सुबह परिजन फिर से श्मशान घाट जाकर विसर्जन के लिए चिताओं की राख से मृतकों की अस्थियां एकत्रित करेंगे। प्रजापति समाज के लोग सभी छह मृतकों की एक साथ ही रस्म तेरहवीं करने पर विचार कर रहे हैं।

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