संजय मित्तल का धोबी पछाड़-हाईकोर्ट के आदेश से कुर्सी पर वापस लौटे

हाईकोर्ट ने संजय मित्तल के चुनाव विवाद में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के 5 अगस्त के आदेश पर लगाई रोक, 22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, अदालत ने रजिस्ट्रार से मांगा हलफनामा, पूछा-अधिकारियों को क्या अधिकार?

मुजफ्फरनगर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दि गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन मुजफ्फरनगर की मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव से जुड़े विवाद में असिस्टेंट रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स, सहारनपुर के 5 अगस्त 2026 के आदेश के अमल पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स उत्तर प्रदेश लखनऊ से अगली सुनवाई पर एक हलफनामा मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने दि गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन की मैनेजमेंट कमेटी व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने एसोसिएशन का चुनाव निरस्त करते हुए नया चुनाव कराने के आदेश जारी किए थे, जिससे मैनेजमेंट कमेटी कालातीत हो गई थी।

दि गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन की मैनेजमेंट कमेटी की ओर से हाईकोर्ट इलाहाबाद में असिस्टेंट रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स, सहारनपुर के आदेश के खिलाफ एक रिट-सी 33511/2026 कोर्ट नम्बर 38 में दायर की गई थी। इस याचिका पर न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से राज्य सरकार और तीन अन्य की खिलाफ दायर याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी और सुमित डागा ने पक्ष रखा तो राज्य सरकार की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल आर.पी. तिवारी ने बहस की।

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इस याचिका में दि गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन की मैनेजमेंट कमेटी और दो अन्य की ओर से असिस्टेंट रजिस्ट्रार द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मैनेजमेंट कमिटी के चुनाव को स्वीकार नहीं करते हुए उसे रद्द कर नए चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्ट्रार या असिस्टेंट रजिस्ट्रार को मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव की वैधता या अवैधता पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। यदि चुनाव एक्ट या सोसाइटी के उपनियमों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो विवाद को धारा 25(1) के तहत निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष भेजा जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट ने इस दलील को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि मामले में यह विचार किया जाना आवश्यक है कि रजिस्ट्रार या असिस्टेंट रजिस्ट्रार स्वयं चुनाव की वैधता पर निर्णय ले सकते हैं अथवा चुनाव से संबंधित विवाद को सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 25 के तहत निर्धारित प्राधिकारी के पास भेजा जाना चाहिए। अदालत ने मामले की व्यापक कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स, लखनऊ को उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। हलफनामे में विभाग द्वारा चुनाव और पदाधिकारियों की सूची से जुड़े विवादों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तथा एक्ट की धारा 4 और 25 के तहत रजिस्ट्रार और निर्धारित प्राधिकारी की शक्तियों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

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अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हलफनामे में उन परिस्थितियों का उल्लेख किया जाए, जिनमें असिस्टेंट रजिस्ट्रार पदाधिकारियों की सूची की जांच कर सकते हैं या उसे पंजीकृत करने से इनकार कर सकते हैं और किन परिस्थितियों में विवाद को निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष भेजना आवश्यक होगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने असिस्टेंट रजिस्ट्रार, सहारनपुर के 5 अगस्त 2026 के विवादित आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले को रिट याचिका संख्या 32557/2026 के साथ संबद्ध करते हुए 22 सितंबर 2026 को नए सिरे से पेश करने का निर्देश दिया गया है।  विरोधियों के खिलाफ संजय मित्तल के इस धोबी पछाड़ दांव से गुड़ खांडसारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ ही मंडी के व्यापारियों में भी खुशी की लहर है। हाईकोर्ट के निर्णय के सहारे संजय मित्तल अपनी निर्वाचित कार्यकारिणी के साथ वापस एसोसिएशन अध्यक्ष के पद की कुर्सी पर वापस लौटे हैं, उनका विश्वास है कि वो 22 सितम्बर की सुनवाई में भी जीत कर आयेंगे।

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