केन्द्रीय कौशल विकास मंत्री ने कहा-एथनॉल पर बोलने वाला विपक्ष, गन्ना और किसान के मुद्दे की बात पर क्यों हो जाता है खामोश, जवाब देना होगा
सामाजिक समरसता सम्मेलन में बोले रालोद अध्यक्ष-जातिवाद के खिलाफ खड़े होकर समानता और सम्मान का संदेश गांव-गांव तक पहुंचाना होगा
मुजफ्फरनगर। रालोद के सामाजिक समरसता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि संत रविदास के सामाजिक जुड़ाव और प्रेम के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए सर्वसमाज के लोग एक मंच पर जुटे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में भेदभाव समाप्त कर भाईचारे और समानता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है, लेकिन विपक्ष तीन शब्दों का नारा देकर समाज को विभाजित करने का प्रयास कर रहा है।
गांव मुस्तफाबाद पचेंडा स्थित जनता इण्टर कॉलेज में रविवार को आयोजित सामाजिक समरसता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि सामाजिक समरसता का मंच किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सर्वसमाज की भागीदारी जरूरी है। मुजफ्फरनगर को स्वर्गीय चौधरी अजित सिंह की कर्मभूमि बताते हुए सामाजिक आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने समाज की दरारों को भरने और लोगों को जोड़ने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। ऐसी किसी एक सभा से समाज नहीं जुड़ सकता, बल्कि जब विभिन्न वर्गों के लोग साथ बैठेंगे और संवाद करेंगे, तभी सामाजिक दूरी कम होगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में समाज के विभाजन और नफरत को पनपने नहीं दिया जाएगा तथा सभी को बराबरी और सम्मान दिलाने का प्रयास जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की खूबसूरती उसकी विविधता में है। अलग-अलग विचार और समुदाय एक माला के फूलों की तरह हैं, जिन्हें एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ रहना चाहिए। जातिवाद के खिलाफ संतों, महापुरुषों और राजाओं ने संघर्ष किया। डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि उन्होंने जाति व्यवस्था को चुनौती देते हुए समानता और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर किसी एक रंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत के हर रंग में उनके विचार दिखाई देते हैं। भारतीय ध्वज का हर रंगा अंबेडकर की विचारधारा का रंग है।
केन्द्रीय शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जयंत चौधरी ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के सामाजिक संघर्षों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि चरण सिंह ने जाति तोड़ो सम्मेलनों के माध्यम से समाज को जोड़ने का प्रयास किया। शिक्षण संस्थानों के नामों में जातिगत पहचान के स्थान पर किसानों और समाज से जुड़े नामों को स्थान दिलाने में भी उनका योगदान रहा। उन्होंने कहा कि चरण सिंह उनके लिए आदर्श होने के साथ-साथ साहस और हिम्मत के स्रोत भी हैं। समाज में बराबरी लाने के लिए लोगों को अपने-पराये और जातिगत चश्मे को हटाना होगा।

उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने के लिए ही हमने टीम आरएलडी का गठन किया है। रालोद कार्यकर्ताओं से समाज को जोड़ने के अभियान को गांव और घर तक ले जाने का आह्वान करते हुए कहा कि टीम आरएलडी उनके और समाज के बीच सेतु का काम करे। उनका और जनता का संबंध किसी जाति से नहीं, बल्कि चौधरी चरण सिंह की उस विचारधारा से है, जो जातिगत विभाजन के बजाय समाज को जोड़ने की बात करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चौधरी चरण सिंह को सम्मान दिए जाने के कारण ही उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन किया। उनका लक्ष्य किसी एक चुनाव या कुछ विधायकों की जीत या पार्टी को एक विशेष क्षेत्र तक करने की राजनीतिक तक सीमित नहीं है, बल्कि चरण सिंह की विरासत और अंबेडकर के समानता के विचार को व्यापक स्तर तक ले जाना है।
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से खेती, रोजगार, कारोबार और फसल के उचित भाव जैसे मुद्दों पर सवाल उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान की फसल की पर्ची उसका अधिकार है और किसानों के मुद्दे जमीन से उठने चाहिए। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि किसान उसके एजेंडे में दिखाई नहीं देता। उन्होंने गन्ने की खेती और एथेनॉल नीति का जिक्र करते हुए कहा कि एथेनॉल नीति से गन्ना किसानों को लाभ मिला है। आर्थिक हालात बदले हैं। जयंत चौधरी ने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान गन्ने का भाव 305 रुपये तक था, जबकि पिछले सत्र में यह 400 रुपये तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि एथेनॉल नीति के कारण गन्ने की खरीद और किसानों को भुगतान की व्यवस्था को मजबूती मिली है। उनके अनुसार, गन्ना मूल्य का करीब 95 प्रतिशत भुगतान हो चुका है और किसानों को तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि समाज के सम्मान और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे सभी के लिए गंभीर हैं। लोकतंत्र में सभी समुदायों के प्रति सम्मान का भाव होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंबेडकर और चौधरी चरण सिंह की सोच को आधार बनाकर सामाजिक समानता और संवाद को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। जयंत चौधरी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह के गांव में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर को फतेहपुर सीकरी, आगरा में स्वाभिमान रैली होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि 31 सितंबर तक भेदभाव नहीं, समानता, दूरी नहीं, संवाद और टकराव नहीं, समन्वय का संदेश लेकर रालोद कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचेंगे।
