पूर्व मंत्री डाू. संजीव बालियान के लिए हरियाणा से आई ‘खास कांवड़, पत्नी डॉ. सुनीता की भी तस्वीर शामिल
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों की अलग-अलग रंग और स्वरूप की कांवड़ें लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इसी बीच मुजफ्फरनगर में हरियाणा से आए युवाओं के एक समूह की एक विशेष कांवड़ चर्चा का विषय बनी हुई है। इस कांवड़ पर पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और उनकी पत्नी सुनीता के चित्र लगाए गए हैं। इस कांवड़ के सहारे कांवड़ मार्ग पर पूरे जोश के साथ ‘म्हारा भाई बालियान’ गूंज रहा है। युवाओं का कहना है कि इस कांवड़ के माध्यम से वे डॉ. बालियान के प्रति अपने समर्थन और भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं।
कांवड़ यात्रा मुजफ्फरनगर में पड़ाव डाल चुकी है। इसी दौरान हरियाणा से आए कांवड़ यात्रियों की यह विशेष कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कांवड़ पर लगाए गए चित्रों के कारण राहगीरों और आसपास मौजूद लोगों में भी इसे देखने की उत्सुकता दिखाई दी। सामान्य तौर पर कांवड़ यात्रा में शिवभक्त भगवान शिव की भक्ति और आस्था से जुड़ी कांवड़ लेकर हरिद्वार से अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। कांवड़ में धार्मिक प्रतीकों, शिव परिवार और अन्य देवी-देवताओं के चित्र देखने को मिलते हैं। हालांकि, इस बार हरियाणा से आई इस कांवड़ का स्वरूप कुछ अलग नजर आया। इस पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान और उनकी पत्नी सुनीता के चित्र लगाए गए हैं। इनमें एक चित्र डॉ. संजीव बालियान का वो भी है, जब वो कांवड़ लेकर आये थे।

हरियाणा से आए युवाओं के अनुसार, वे डॉ. बालियान के प्रति अपने समर्थन और भावनाओं को कांवड़ के माध्यम से प्रदर्शित करना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह उनके लिए भावनात्मक जुड़ाव और समर्थन का प्रतीक है। मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद कांवड़ यात्रियों ने कुछ समय के लिए पड़ाव डाला। इस दौरान विशेष कांवड़ को देखने के लिए लोगों की नजरें उस पर टिक गईं। कांवड़ यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर आकर्षक और अनोखी कांवड़ें देखने को मिलती हैं, लेकिन किसी राजनीतिक व्यक्तित्व और उनके परिवार के चित्र वाली कांवड़ होने के कारण यह कांवड़ अलग तरह से चर्चा में आ गई। लोग इस कांवड़ को धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक संदेश से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, कांवड़ लेकर आए युवाओं ने इसे अपने समर्थन और भावनाओं की अभिव्यक्ति बताया है। कांवड़ यात्रा के बीच यह अनोखा अंदाज फिलहाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
