इंडिया गठबंधन के कार्यक्रम में जाने की तैयारी के बीच पुलिस तैनात, राकेश शर्मा समेत विपक्षी नेताओं को भी घरों में रोके जाने की सूचना
मुजफ्फरनगर। इंडिया गठबंधन के दिल्ली में प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले मुजफ्फरनगर में पुलिस ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद हरेंद्र मलिक को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पुलिस ने प्रेमपुरी स्थित उनके आवास को घेरकर पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया था। उनके दोनों आवासों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। दो सीओ और थाना प्रभारियों की मौजूदगी में सांसद की गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज सांसद ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
सोमवार को दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सांसद हरेंद्र मलिक रवाना होने की तैयारी में थे। इसी बीच पुलिस ने उनके आवास पर पहुंचकर घेराबंदी कर दी। सीओ नई मंडी राजू कुमार साव, सीओ सदर सुनील कुमार सिंह, शहर कोतवाली प्रभारी बृजेश शर्मा और खालापार थाना प्रभारी विजय कुमार सहित पुलिसकर्मी तैनात रहे। सांसद को घर से बाहर निकलने से रोकने के लिए पुलिस ने पूरी व्यवस्था की थी।

सांसद हरेंद्र मलिक को रोकने के लिए इस बार पुलिस ने विशेष सतर्कता बरती। इससे पहले आठ सितंबर को सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले में सपा प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने का कार्यक्रम था। उस समय पुलिस की नजरबंदी के बावजूद हरेंद्र मलिक पिछले दरवाजे से निकलकर सहारनपुर पहुंच गए थे। वहां उन्होंने सपा नेताओं के साथ पहुंचकर विरोध जताया था। इस मामले में तत्कालीन एसएसपी संजय वर्मा ने ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। इनमें दरोगा नितिन कुमार और यशपाल सिंह के अलावा कांस्टेबल नदीम, निशांत कुमार, दीपक गौतम और दिनेश कुमार शामिल थे। इस बार पुलिस ने सांसद को उनके आवास से बाहर निकलने से रोकने के लिए पहले ही व्यापक इंतजाम कर दिए।
राकेश शर्मा और कांग्रेस नेताओं के घर आधी रात पहुंची पुलिस
सपा के राष्ट्रीय सचिव राकेश शर्मा के अंकित विहार स्थित आवास पर भी पुलिस ने आधी रात को पहुंचकर उन्हें नजरबंद कर दिया। कांग्रेस के कई नेताओं को भी उनके घरों में रोके जाने की जानकारी मिली है।

कांग्रेस सहित अन्य सपा के कई अन्य नेताओं को दिल्ली जाने से रोकने की कार्रवाई भी की गई। सांसद हरेंद्र मलिक ने पुलिस की तैनाती और घर से बाहर निकलने पर रोक लगाए जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना जनप्रतिनिधियों का अधिकार है। सरकार और पुलिस लोकतांत्रिक आवाज को दबा नहीं सकतीं। शांतिपूर्ण विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार है। हमें रोककर जनता की आवाज नहीं दबाई जा सकती।
