रविवार को एसडी इंजीनियरिंग से उड़ेगा सैट-1 रॉकेट

मुजफ्फरनगर। शिक्षा के क्षेत्र में मुजफ्फरनगर जनपद एक और नया आयाम स्थापित करने जा रहा है। रविवार 09 फरवरी का दिन इंजीनियरिंग और टैक्नोलॉजी एजूकेशन में एक इतिहास रचने वाला साबित होगा, क्योंकि मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंट टैक्नोलोजी में इस दिन जहां यूपी की पहली स्पेस एंड रोबोटिक्स लैब का शुभारंभ होगा, वहीं विद्यार्थियों के द्वारा तैयार किया गया सैट-1 रॉकेट की लांचिंग भी की जाने की तैयारी कर ली गई है। इससे स्पेस एंड रोबोटिक्स एजूकेशन में यहां के विद्यार्थियों को कौशल विकास का एक बेहतर अवसर भी प्राप्त होगा।

एस.डी. कॉलेज आफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी के सचिव एवं प्रबंधक अनुभव कुमार ने शनिवार को कॉलेज परिसर में इस उपलब्धि के लिए मीडिया से पूरी जानकारी साझा की और बताया कि एस.डी. कॉलेज आफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी, मुजफ्फरनगर में आगामी 9 फरवरी 2025, दिन रविवार को अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में एक मील का पत्थर स्थापित करने जा रहा है। एक और जहां कॉलेज में स्पेस एंड रोबोटिक्स लैब का उदयक मीलगा, वहीं इस अवसर पर कॉलेज के मेधावी छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किया गया एक सैट-1 नाम का रॉकेट छोड़ा जायेगा, जिसके साक्षी कॉलेज के तमाम शिक्षक व छात्र-छात्राओं के साथ यहां मौजूद जनपद के गणमान्य नागरिक बनेंगे।

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उन्होंने बताया कि 9 फरवरी को कॉलेज में स्थापित की गई यूपी की पहली स्पेस एंड रोबोटिक्स लैब का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार में विज्ञान एवं तकनीक विभाग के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार प्रातः 10 बजे करेंगे। इस लैब में प्रतिदिन छात्र-छात्राओं को यंत्रों के साथ अंतरिक्ष के संबंध में विशिष्ट जानकारी दी जा रही है। उसके बाद कॉलेज के मेधावी छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किया गया एक सैट-1 नाम का रॉकेट छोड़ा जायेगा, जो आसमान में करीब दो से ढाई किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इसके बाद इसे पैराशूट के सहारे उतारा जायेगा। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत के किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किया गया पहला रॉकेट होगा, जिसे आसमान में छोड़ा जायेगा। अनुभव कुमार ने बताया कि कॉलेज में स्पेस एंड रोबोटिक्स लैब स्थापित करने के लिए कॉलेज और इस क्षेत्र में कार्यरत इंडोप्लेनेटएक्स स्पेस वॉल्ट एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के साथ एमओयू साइन किया है। इस लैब को स्थापित करने के लिए 6.50 लाख रुपये खर्च किये गये हैं और इस लैब से मैकेनिकल इंजीनियरिंग के साथ कम्प्यूटर साइंस की शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को भी शिक्षित किया जा सकेगा। विद्यार्थियों में इस लैब से जुड़ने के लिए भारी उत्साह है और अभी तक 11 छात्र-छात्राओं को इससे जोड़ा गया है।

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इंडोप्लेनेटएक्स कंपनी के सीईओ इंजी. अंकित कुमार ने बताया कि जिस रॉकेट सैट-1 को 9 फरवरी को कॉलेज परिसर से छोड़ा जायेगा, उसे एस.डी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी के मेधावी छात्र-छात्राओं द्वारा इंडोप्लेनेटएक्स के वैज्ञानिकों की देखरेख में तैयार किया गया है। इंडोप्लेनेटएक्स कंपनी इसरो से मान्यता प्राप्त है और अपनी 40 सदस्यीय टीम के साथ आईआईटी रुड़की में स्पेस एंड रोबोटिक्स के साथ ही एआई पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि ये उत्तर प्रदेश की पहली स्पेस ट्रेनिंग लैब है। उत्तराखंड में ऐसी ही एक लैब बनी है। इसमें 75 प्रतिशत शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रैक्टिकल बेस नॉलेज पर आधारित रखा गया है ताकि विद्यार्थियों को करके सिखाया जा सके। सैट-1 एक शुगर कैंडी बेस रॉकेट है। इसमें पोटेशियम नाइट्रेट आधारित फ्यूल रखा गया है और इसका वजन करीब 1 से डेढ़ किलोग्राम रहेगा। ये चार किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच सकता है, लेकिन फिलहाल इसकी उड़ान 2.5 किलोमीटर रखी गई है। अपनी ऊंचाई तक जाने पर इसका फ्यूल खात्म हो जायेगा और इसके बाद इसमें एक पैराशूट खुलेगा, जो इसे धीमी रफ्तार से लैंड करायेगा। इसमें अल्टीमेटर लगाया गया है, जो इसको कमांड करने में सहायक होगा और इसकी लोकेशन के बारे में स्पेस लैब को इंडीकेशन देगा। इस लैब के सहारे बच्चों को एडवांस टैक्नोलॉजी के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलेगी और उनका स्किल डवलपमेंट करने में यह सहायक सि( होगी। इससे यहां पढ़ने वाले बच्चों को इसरो तक पहुंच में आसानी होगी और उनके लिए बेहतर अवसर तथा रास्ते खुलेंगे। इस दौरान कॉलेज कमेटी के उपाध्यक्ष विनोद कुमार और कॉलेज के डॉयरेक्टर डा. सि(ार्थ शर्मा भी मौजूद रहे।

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