आरडीएफ को लेकर मचे घमासान के बीच उद्यमी पंकज अग्रवाल ने उठाये सवाल

किसान संगठन के अर्धनग्न प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आए बिन्दल डुप्लैक्स लिमिटेड के एमडी पंकज अग्रवाल

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में बढ़ते वायु प्रदूषण और म्यूनिसिपल वेस्ट से बने आरडीएफ (रिफ्यूज़ डिराइव्ड फ्यूल) के इस्तेमाल को लेकर छिड़े विवाद के बीच उद्योग और किसान संगठनों के आमने-सामने आने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने भोपा रोड पर म्यूनिसिपल वेस्ट के ट्रकों को रोककर अर्धनग्न प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर पेपर मिल प्रबंधन ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदूषण के आरोपों का खंडन किया है।
बिन्दल डुप्लैक्स लिमिटेड पेपर मिल के मैनेजिंग डायरेक्टर और पेपर मिल एसोसिएशन के प्रांतीय पदाधिकारी पंकज अग्रवाल ने शनिवार को भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के पदाधिकारियों द्वारा भोपा रोड पर म्यूनिसिपल वेस्ट के ट्रकों को रोककर किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरडीएफ को लेकर लगाए जा रहे प्रदूषण के आरोपों को तथ्यहीन बताया है।

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रविवार सुबह अपनी फेसबुक वॉल पर किए गए विस्तृत पोस्ट में पंकज अग्रवाल ने विभिन्न शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि बागपत में एक्यूआई 314, बिजनौर 260, मुजफ्फरनगर 305, मेरठ 310, गाजियाबाद 355, दिल्ली 385, गुरुग्राम 320, लखनऊ 214 और कानपुर 120 दर्ज किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बागपत, मेरठ, लखनऊ, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी एक्यूआई अधिक है, तो क्या वहां भी आरडीएफ के कारण ही प्रदूषण बढ़ा है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में एक्यूआई अपेक्षाकृत कम है, क्योंकि वहां हवा की गति बनी हुई है। उनके अनुसार सर्दियों में हवा की गति धीमी होने से एक्यूआई का स्तर स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।

इससे एक दिन पहले शनिवार को किसान संगठन के प्रदर्शन के दौरान किए गए एक अन्य फेसबुक पोस्ट में पंकज अग्रवाल ने कहा था कि देश में कोयले की कमी के चलते केंद्र सरकार द्वारा बॉयलरों में आरडीएफ जलाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर की पेपर मिलों ने इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है और नए बॉयलरों पर कई अरब रुपये का निवेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरडीएफ का उपयोग पूरी दुनिया में ईंधन के रूप में किया जाता है और यह कोयले की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल है। कुछ लोग स्वयं भ्रमित हैं और दूसरों को भी भ्रमित कर रहे हैं कि आरडीएफ से अधिक प्रदूषण फैलता है, जबकि यह तथ्य सही नहीं है। दिल्ली में इस तरह के आठ से अधिक बॉयलर संचालित हो रहे हैं।
पंकज अग्रवाल के अनुसार मुजफ्फरनगर की मिलों में लगे बॉयलरों पर उन्नत तकनीक के प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित हैं, जिनका डेटा हर घंटे संबंधित विभागों तक पहुंचता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग चाहते हैं कि क्षेत्र की फैक्ट्रियां बंद हो जाएं, जिससे पूरे जनपद को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। अपने पोस्ट में उन्होंने कोयला बनाम आरडीएफ का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए बताया कि आरडीएफ नगर ठोस कचरे से तैयार किया जाता है और इससे कचरे का निस्तारण भी होता है। कोयले के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें अधिक मात्रा में निकलती हैं, जबकि आरडीएफ से शुद्ध कार्बन उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कोयला आयात करने पर देश को भारी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है, जिससे रुपये पर भी असर पड़ता है। आरडीएफ के उपयोग से यह निर्भरता कम होती है। अंत में पंकज अग्रवाल ने जनपदवासियों से अपील की कि वे सच्चाई जानने का प्रयास करें और किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फैक्ट्रियां बंद हुईं तो इसका नुकसान केवल उद्योगों को नहीं, बल्कि पूरे मुजफ्फरनगर जनपद को झेलना पड़ेगा।

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